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Hindi News ›   Delhi ›   Teacher's Day: Santram's school teaches lessons of life and values

शिक्षक दिवस : संस्कारों का सबक सिखाती है संतराम की पाठशाला

Sat, 04 Sep 2021 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Sep 2021 05:51 AM IST
सार

  • प्लंबर, सेल्समैन, कंडक्टर, साबुन और अगरबत्ती बेचने के बाद इत्तेफाक से बने शिक्षक
  • 24 साल से दिल्ली के सरकारी स्कूल में दे रहे हैं सेवा, गरीब बच्चों की करते हैं मदद

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Teacher's Day: Santram's school teaches lessons of life and values
पाठशाला में संतराम... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कब, कहां और कैसे, किसी का जीवन बदल जाए कहना मुश्किल है। संतराम भी उन्हीं में से एक हैं। साल-दर-साल उनका भाग्य भी पलटी मारता रहा। वह कभी प्लंबर बने तो कभी सेल्समैन। स्क्रीन प्रिंटिंग और बस कंडक्टरी भी की। साबुन और अगरबत्ती बेची। तमाम संघर्षों को झेलते हुए एक दिन वह इत्तेफाक से शिक्षक बन गए। 24 साल से अब वह अज्ञानता के तमस को मिटाकर बच्चों के जीवन में ज्ञानरूपी ज्योति प्रज्ज्वलित कर रहे हैं। उनकी पाठशाला में न सिर्फ किताबी ज्ञान, बल्कि संस्कारों का भी उदय होता है।

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दिल्ली के रहने वाले संतराम सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में 1997 से हिंदी शिक्षक के तौर पर पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह काफी संघर्ष के बाद इस मुकाम तक पहुंचे हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते चले गए। जब वह 10वीं में थे तब ही घर के पास वर्ष 1983 में स्क्रीन प्रिंटिंग का काम शुरू किया। तब उनकी तनख्वाह 240 रुपये प्रतिमाह थी। इसके बाद उन्होंने सेल्समैन का काम किया।
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साइकिल पर साबुन और अगरबत्ती भी बेची। जाकिर हुसैन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। 1989 में उन्हें एक कंपनी मेें स्टोर मैनेजर की नौकरी मिली। उसके बाद नौकरी छूट गई तो फिर बस में डेढ़ महीना कंडक्टरी की। इस दौरान प्लंबर का काम भी किया। 
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पत्नी के लिए लाए थे फॉर्म
उन्होंने बताया कि ऐसे ही जिंदगी आगे बढ़ रही थी कि वह अपनी पत्नी को ऐलिमेंट्री टीचर कोर्स कराने के लिए फॉर्म ले आए। किसी कारणवश वह फॉर्म नहीं भर सकीं तो उन्होंने खुद का फॉर्म भर दिया। उन्हें उम्मीद भी नहीं थी कि उनका चयन होगा, लेकिन उनका चयन राजेंद्र नगर स्थित शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान ( डायट) में हो गया। तब से वह बच्चों को पढ़ा रहे हैं। 


पहले प्राइमरी शिक्षक शादी खामपुर स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में पढ़ाना शुरू किया और अब वह सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में पढ़ा रहे हैं। वह राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के पश्चिमी जोन के जिला सचिव भी हैं। वह झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे बच्चों के लिए वर्कशॉप और समर कैंप भी लगाते हैं, ताकि उन बच्चों के शिक्षा उत्थान का कार्य किया जा सके। 

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