{"_id":"6005efb48ebc3e31d240a4f6","slug":"students-returned-to-schools-after-10-months-ashram-news-noi5606754142","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूलों में 10 माह बाद लौटी रौनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूलों में 10 माह बाद लौटी रौनक
विज्ञापन
चिराग एंक्लेव स्थित स्कूल में पहुंचे बच्चे।
- फोटो : Ashram
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। स्कूलों के दरवाजे फूलों व गुब्बारों से सजे तो कहीं बच्चों पर फूल बरसाकर स्वागत...गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन और कक्षाओं में सामाजिक दूरी का पालन। कोरोना काल में दस माह तक बंद रहे दिल्ली के स्कूल10वीं-12वीं के बच्चों के लिए सोमवार से खुले तो कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। बच्चों के पहुंचने से वीरान पड़े स्कूलों में फिर से रौनक लौट आई। सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त सभी स्कूल खुल गए, वहीं कुछ निजी स्कूलों ने तीन-चार दिन बाद स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। सभी बच्चे मास्क लगाकर पहुंचे और कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया। विद्यार्थियों की उपस्थिति 40 से 60 फीसदी के बीच रही। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी स्कूलों का जायजा लेने पहुंचे और विद्यार्थियों से बातचीत की। दिल्ली सरकार ने दसवीं बारहवीं की परीक्षा के मद्देनजर बीते सप्ताह स्कूल खोलने की मंजूरी दी थी। इसके बाद स्कूलों ने अभिभावकों से एनओसी मिलते ही बच्चों को स्कूल में आने की अनुमति दे दी। जितनी खुशी बच्चों को स्कूल पहुंचने की थी उतनी ही खुशी शिक्षकों को थी। अनेक स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ अभिभावक भी पहुंचे। पेश है अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट:
महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल
सुबह आठ बजे से विद्यार्थी स्कूल पहुंचने लगे।सामाजिक दूरी का पालन करवाते हुए स्कूल में एंट्री दी गई। पहले तापमान मापा गया और इसके बाद हाथ सैनिटाइज करवाए। सामाजिक दूरी के लिए परिसर में गोले चिन्हित किए गए और उनमें बच्चों को खड़ा किया गया और फिर छोटे-छोटे ग्रुप में कक्षा में भेजा गया। इस बात का ध्यान रखा गया कि कहीं भी छात्रों की भीड़ एकत्र ना होने पाए। साढ़े आठ बजे से कक्षाओं की शुरुआत हुई। एक कक्षा में 10 से 15 बच्चों को ही बैठाया गया। इस दौरान सभी बच्चों ने मास्क लगा रखे थे। दोपहर दो बजे कक्षाएं समाप्त हो गईं। बच्चों के निकलने के दौरान भी इस बात का ध्यान रखा गया कि गेट पर भीड़ ना हो। स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी मृत्युंजय प्रताप सिंह ने बताया कि पहले दिन दसवीं व बारहवीं कक्षा में 30-40 फीसदी के बीच उपस्थिति रही।
जोसेफ एंड मैरी पब्लिक स्कूल
सुबह नौ स्कूल की शुरुआत हुई। बच्चों को दो शिफ्ट में बुलाया। पहली शिफ्ट 9 बजे से 11.00 बजे तक थी। दूसरी शिफ्ट की शुरुआत 11.15 से हुई जो कि दोपहर 1.15 बजे तक चली। सामाजिक दूरी का पालन करवाते हुए बच्चों को अलग-अलग गेट से एंट्री दी गईं। एक कक्षा में 12-12 बच्चे ही बैठे नजर आए। कक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों को अलग गेट से निकाला गया। गेट, कॉरिडोर व कक्षाओं में मास्क, सेनिटाइजर व हैंडवॉश की व्यवस्था की गई थी। स्कूल संचालिका वंदना हांडा ने बताया कि पहले अभिभावकों से एनओसी ले ली गई थी। इस कारण हले दिन बच्चों की उपस्थिति अच्छी रही। लगभग 80 फीसदी बच्चे स्कूल पहुंचे। प्रार्थना सभा नहीं हुई और कक्षाओं में बच्चों की पढ़ाई करवाई गई।
विज्ञापन
बाल भवन पब्लिक स्कूल
लक्ष्मी नगर स्थित बाल भवन पब्लिक स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों के चेहर पर खुशी झलक रही थी। सुबह साढ़े सात बजे से ही बच्चों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे मास्क, फेस शील्ड और ग्लव्स लगाकर आए थे। स्कूल परिसर में घुसने से पहले तापमान मापा गया। इसके बाद हाथ सैनिटाइज करवाए और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए क्लास तक पहुंचाया गया। क्लास रूम में भी सामाजिक दूरी का पालन करवाकर बैठाया गया। बच्चों ने बताया कि उनका पूरा साल बिना स्कूल आए गुजर गया, अब जब मौका मिला है तो पूरे कोर्स को समझकर जल्द से जल्द परीक्षा के लिए खुद को तैयार करेंगे। प्रिंसिपल सरोज गुप्ता ने बताया कि कक्षाएं दो शिफ्ट में सुबह 8 से 11 बजे और दोपहर 12 से 2.15 बजे तक चलीं। पहली शिफ्ट में 12वीं कॉमर्स और दूसरी शिफ्ट में दसवीं और 12वीं के अन्य संकाय के छात्र शामिल हुए।
जसोला गांव
दसवीं कक्षा के छात्र मोहम्मद बिलाल के चेहरे पर अलग ही चमक दिख रही थी। स्कूल के गेट पर खड़ा बिलाल अपने और सहपाठियों का इंतजार रहा था। ठीक इसी तरह मो. समीर की भी खुशी का ठिकाना नहीं था। बिलाल का कहना था कि पूरे साल फ्रिक थी कि बोर्ड में उनका क्या होगा। पूरे साल ऑनलाइन क्लास ली। घर वालों ने कोरोना से डर की वजह से ट्यूशन भी नहीं करने दीा। थोड़ी बहुत मदद यू-ट्यूब से मिली। गेट पर ही मौजूद गार्ड छात्रों के शरीर का तापमान जांच कर हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दे रहे थे। एक छात्र के अभिभावक मुस्लिम खान का कहना था कि अभी भी बच्चों को स्कूल भेजते हुए डर लग रहा है, लेकिन अब इस बीमारी के साथ जीने की आदत डालना होगी। सुबह की पाली में करीब 80 फीसदी छात्राएं पहुंची थी। टीचर्स भी स्कूल खुलने से काफी उत्साहित दिखे। दूसरी पाली में भी छात्रों की संख्या ठीक-ठाक रही।
क्या बोले विद्यार्थी
स्कूल आकर काफी खुशी हो रही है, क्योंकि इससे मुझे अपने शिक्षकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला है, जो कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी में मददगार होगा।
- भूमिका, बारहवीं की छात्रा
कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से घर पर था। अब स्कूल आकर सकारात्मकता महसूस हो रही है। स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया है।
- सात्विक सिंह, दसवीं का छात्र
दस महीने बाद स्कूल आकर काफी अच्छा लग रहा है। कोरोना के कारण तनावपूर्ण दौर के बाद परीक्षा की तैयारी के लिए स्कूल खुलना बड़ी राहत है।
- निशा, बारहवीं की छात्रा
स्कूल आकर दोस्तों व शिक्षकों से मिलना अच्छा लगा। स्कूल आना परीक्षा की तैयारी के लिए लिए मेरी शंकाओं को दूर करने में काफी सहायक होगा।
- उदय गुप्ता, दसवीं का छात्र
इतने दिन बाद स्कूल आने का अनुभव काफी अच्छा रहा। परिवार वालों ने काफी एहतियात बरत कर स्कूल भेजा। आनलाइन पढ़ाई के दौरान जो कमियां रह गईं थी, उन्हें दूर करने का मौका मिलेगा।
- हर्ष, 12वीं का छात्र
स्कूल आकर काफी अच्छा लग रहा है। एक साल बिना स्कूल के गुजर गया। स्कूल लाइफ का अपना अनुभव होता है। अब वह जल्द से जल्द कोर्स को पूरा कर परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर पाएंगी।
- अक्षरा जैन, 12वीं की छात्रा
विज्ञापन
महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल
सुबह आठ बजे से विद्यार्थी स्कूल पहुंचने लगे।सामाजिक दूरी का पालन करवाते हुए स्कूल में एंट्री दी गई। पहले तापमान मापा गया और इसके बाद हाथ सैनिटाइज करवाए। सामाजिक दूरी के लिए परिसर में गोले चिन्हित किए गए और उनमें बच्चों को खड़ा किया गया और फिर छोटे-छोटे ग्रुप में कक्षा में भेजा गया। इस बात का ध्यान रखा गया कि कहीं भी छात्रों की भीड़ एकत्र ना होने पाए। साढ़े आठ बजे से कक्षाओं की शुरुआत हुई। एक कक्षा में 10 से 15 बच्चों को ही बैठाया गया। इस दौरान सभी बच्चों ने मास्क लगा रखे थे। दोपहर दो बजे कक्षाएं समाप्त हो गईं। बच्चों के निकलने के दौरान भी इस बात का ध्यान रखा गया कि गेट पर भीड़ ना हो। स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी मृत्युंजय प्रताप सिंह ने बताया कि पहले दिन दसवीं व बारहवीं कक्षा में 30-40 फीसदी के बीच उपस्थिति रही।
विज्ञापन
जोसेफ एंड मैरी पब्लिक स्कूल
सुबह नौ स्कूल की शुरुआत हुई। बच्चों को दो शिफ्ट में बुलाया। पहली शिफ्ट 9 बजे से 11.00 बजे तक थी। दूसरी शिफ्ट की शुरुआत 11.15 से हुई जो कि दोपहर 1.15 बजे तक चली। सामाजिक दूरी का पालन करवाते हुए बच्चों को अलग-अलग गेट से एंट्री दी गईं। एक कक्षा में 12-12 बच्चे ही बैठे नजर आए। कक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों को अलग गेट से निकाला गया। गेट, कॉरिडोर व कक्षाओं में मास्क, सेनिटाइजर व हैंडवॉश की व्यवस्था की गई थी। स्कूल संचालिका वंदना हांडा ने बताया कि पहले अभिभावकों से एनओसी ले ली गई थी। इस कारण हले दिन बच्चों की उपस्थिति अच्छी रही। लगभग 80 फीसदी बच्चे स्कूल पहुंचे। प्रार्थना सभा नहीं हुई और कक्षाओं में बच्चों की पढ़ाई करवाई गई।
विज्ञापन
बाल भवन पब्लिक स्कूल
लक्ष्मी नगर स्थित बाल भवन पब्लिक स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों के चेहर पर खुशी झलक रही थी। सुबह साढ़े सात बजे से ही बच्चों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे मास्क, फेस शील्ड और ग्लव्स लगाकर आए थे। स्कूल परिसर में घुसने से पहले तापमान मापा गया। इसके बाद हाथ सैनिटाइज करवाए और सामाजिक दूरी का पालन करते हुए क्लास तक पहुंचाया गया। क्लास रूम में भी सामाजिक दूरी का पालन करवाकर बैठाया गया। बच्चों ने बताया कि उनका पूरा साल बिना स्कूल आए गुजर गया, अब जब मौका मिला है तो पूरे कोर्स को समझकर जल्द से जल्द परीक्षा के लिए खुद को तैयार करेंगे। प्रिंसिपल सरोज गुप्ता ने बताया कि कक्षाएं दो शिफ्ट में सुबह 8 से 11 बजे और दोपहर 12 से 2.15 बजे तक चलीं। पहली शिफ्ट में 12वीं कॉमर्स और दूसरी शिफ्ट में दसवीं और 12वीं के अन्य संकाय के छात्र शामिल हुए।
जसोला गांव
दसवीं कक्षा के छात्र मोहम्मद बिलाल के चेहरे पर अलग ही चमक दिख रही थी। स्कूल के गेट पर खड़ा बिलाल अपने और सहपाठियों का इंतजार रहा था। ठीक इसी तरह मो. समीर की भी खुशी का ठिकाना नहीं था। बिलाल का कहना था कि पूरे साल फ्रिक थी कि बोर्ड में उनका क्या होगा। पूरे साल ऑनलाइन क्लास ली। घर वालों ने कोरोना से डर की वजह से ट्यूशन भी नहीं करने दीा। थोड़ी बहुत मदद यू-ट्यूब से मिली। गेट पर ही मौजूद गार्ड छात्रों के शरीर का तापमान जांच कर हाथों को सैनिटाइज करने के बाद ही प्रवेश दे रहे थे। एक छात्र के अभिभावक मुस्लिम खान का कहना था कि अभी भी बच्चों को स्कूल भेजते हुए डर लग रहा है, लेकिन अब इस बीमारी के साथ जीने की आदत डालना होगी। सुबह की पाली में करीब 80 फीसदी छात्राएं पहुंची थी। टीचर्स भी स्कूल खुलने से काफी उत्साहित दिखे। दूसरी पाली में भी छात्रों की संख्या ठीक-ठाक रही।
क्या बोले विद्यार्थी
स्कूल आकर काफी खुशी हो रही है, क्योंकि इससे मुझे अपने शिक्षकों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला है, जो कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी में मददगार होगा।
- भूमिका, बारहवीं की छात्रा
कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से घर पर था। अब स्कूल आकर सकारात्मकता महसूस हो रही है। स्कूल में कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया है।
- सात्विक सिंह, दसवीं का छात्र
दस महीने बाद स्कूल आकर काफी अच्छा लग रहा है। कोरोना के कारण तनावपूर्ण दौर के बाद परीक्षा की तैयारी के लिए स्कूल खुलना बड़ी राहत है।
- निशा, बारहवीं की छात्रा
स्कूल आकर दोस्तों व शिक्षकों से मिलना अच्छा लगा। स्कूल आना परीक्षा की तैयारी के लिए लिए मेरी शंकाओं को दूर करने में काफी सहायक होगा।
- उदय गुप्ता, दसवीं का छात्र
इतने दिन बाद स्कूल आने का अनुभव काफी अच्छा रहा। परिवार वालों ने काफी एहतियात बरत कर स्कूल भेजा। आनलाइन पढ़ाई के दौरान जो कमियां रह गईं थी, उन्हें दूर करने का मौका मिलेगा।
- हर्ष, 12वीं का छात्र
स्कूल आकर काफी अच्छा लग रहा है। एक साल बिना स्कूल के गुजर गया। स्कूल लाइफ का अपना अनुभव होता है। अब वह जल्द से जल्द कोर्स को पूरा कर परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर पाएंगी।
- अक्षरा जैन, 12वीं की छात्रा