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Delhi News: डीयू के लॉ सेंटर के छात्र स्कूल फीस विनियमन कानून से हुए रूबरू

Wed, 27 Aug 2025 08:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 27 Aug 2025 08:48 PM IST
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Students of DU Law Centre became familiar with the School Fee Regulation Act
-शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने निजी स्कूल फीस विनियमन कानून पर छात्रों के साथ किया संवाद
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-कहा, दिल्ली सरकार का नया शिक्षा कानून लागू, अब सभी 1700 प्राइवेट स्कूल होंगे फीस रेगुलेशन के दायरे में

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली में निजी स्कूल फीस विनियमन विधेयक 2025 अब कानून का रूप ले चुका है। डीयू के लॉ सेंटर-2 के छात्र बुधवार को इस कानून से रूबरु हुए। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस कानून के विषय में छात्रों के साथ संवाद किया। इससे छात्रों को नए शिक्षा कानून की विस्तृत जानकारी मिली। शिक्षा मंत्री ने उन्हें बताया कि कैसे यह कानून दिल्ली के नागरिकों के हित में हैं।

दिल्ली सरकार की ओर से निजी स्कूलों की ओर से मनमाने ढंग से फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया गया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, विश्वविद्यालय से उनके पुराने जुड़ाव और प्रतिबद्धता के कारण लॉ सेंटर-2 में उपस्थित हुआ हूं। छात्र जीवन व डूसू अध्यक्ष रहने की घटनाओं को याद करते हुए उन्होंने छात्रों को बताया कि आपातकाल विरोधी आंदोलन हो या बोफोर्स घोटाले के खिलाफ संघर्ष सभी की शुरुआत इसी कैंपस से हुई थी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 में केवल 300 प्राइवेट स्कूल (जिन्होंने डीडीए से जमीन ली थी) को रेगुलेट करने का ही प्रावधान था। इसके कारण अन्य स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं होती थी।
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दिल्ली में अब प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़कर 1700 हो चुकी है, जिनमें 18 लाख बच्चे पढ़ते हैं। अब निजी स्कूल फीस विनियमन विधेयक 2025 कानून लागू हो जाने के बाद सभी 1700 प्राइवेट स्कूलों पर सरकार का आदेश लागू होगा।
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उन्होंने बताया कि इस कानून के तहत तीन-स्तरीय फीस निर्धारण तंत्र बनाया गया है जिसमे स्कूल लेवल फीस फिक्सेशन कमेटी होगी। इसमें मैनेजमेंट, प्रिंसिपल, 3 टीचर्स, 5 पैरेंट्स (एससी-एसटी महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य) और शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि होंगे। इसके अलावा जिला स्तर कमेटी भी बनाई गई है। यदि स्कूल स्तर पर सहमति न बने तो कोई भी अकेला पेरेंट्स भी इस समिति में जा सकता है। तीसरी और अंतिम समिति स्टेट लेवल अपीलेट कमेटी बनाई गई है। इस समिति का अंतिम निर्णय होगा। जिसको स्कूलों को मानना ही होगा। समिति के सारे निर्णय सर्वसम्मति से किए जाएंगे। एक बार फीस तय होने के बाद वह 3 साल तक लागू रहेगी।

उन्होंने कहा कि इस कानून के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं जैसे फीस निर्धारण में पारदर्शिता, अभिभावकों की सशक्त भागीदारी और फीस वृद्धि में अभिभावकों को मिला वीटो पावर। अब कोई निजी स्कूल अपनी मर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। फीस तय करने के लिए स्कूलों को लोकेशन, सुविधाएं, खर्च और शिक्षण स्तर जैसी विस्तृत जानकारी देनी होगी।


उन्होंने छात्रों को बताया कि इस कानून के तहत बिना अनुमति फीस बढ़ाने या छात्रों-पैरेंट्स का शोषण करने पर 50,000 से 2 लाख प्रति छात्र तक का जुर्माना का भी प्रावधान रखा गया है। साथ ही 20-20 दिन की देरी पर पेनल्टी दोगुनी कर दी जाएगी। और यदि कोई भी स्कूल समिति के सुझावों को नहीं मानता है तो स्कूल की मान्यता रद करने का प्रावधान है।
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