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ग्रेप लागू पर सख्ती अगले सप्ताह से
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नई दिल्ली। प्रदूषण से निपटने के लिए राजधानी में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू हो गया है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) संतोषजनक श्रेणी में रहने के कारण अभी इसके नियम सख्ती से लागू नहीं किए गए हैं। अगले सप्ताह ग्रेप पर एजेंसियों की बैठक होनी है। इसमें दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण वाली गतिविधियों को रोकने के लिए ग्रेप सख्ती से लागू करने की योजना है।
सर्दी की शुरुआत से पहले ही हर साल 15 अक्तूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप लागू किया जाता है। यह 15 मार्च तक जारी रहता है। इस दौरान एजेंसियां दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलानी वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती हैं। नियमों की अवहेलना पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले सप्ताह संबंधित एजेंसियों की बैठक में ग्रेप सख्ती से लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
इधर, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार मानसून जमकर बरसा है। इसका रिकॉर्ड 1169 मिमी है। इसका असर एक्यूआई पर पड़ा है। हवा अभी ज्यादा नहीं बिगड़ी है। अगले तीन दिन में भी दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश के आसार हैं। इससे हवा को साफ होने में मदद मिलेगी। नतीजतन पीएम10 व पीएम2.5 का स्तर संतोषजक श्रेणी में है।
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पराली जलाने की घटनाओं में भी कमी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में एक महीने में धान के अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष के मुकाबले कमी हुई है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 69.49 फीसदी, हरियाणा में 18.28 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 47.61 फीसदी कम हुई हैं। पराली जलाने की घटनाएं पंजाब में घटनाएं पिछले वर्ष के 4216 के मुकाबले 1286, हरियाणा में 596 से घटकर 487 और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) के आठ जिलों में पिछले वर्ष के 42 से घटकर केवल 22 हैं। दिल्ली और राजस्थान के एनसीआर से जुड़े दो जिलों में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है।ॉ
पराली जलाने की पहली घटना पंजाब में 16 सितंबर, हरियाणा में 28 सितंबर और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 18 सितंबर को दर्ज की गई थी। एक माह के भीतर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जिलों के कुल 1795 साइट में से 663 का निरीक्षण प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित राज्यों के प्रतिनिधियों ने किया है। इसमें से 252 मामलों में पर्यावरण जुर्माना लगाया गया है।
यह है ग्रेप का नियम
वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेप को मंजूरी दी थी। एक साल बाद वर्ष 2017 में इसे लागू किया गया था। ग्रेप का इस्तेमाल विभिन्न चरणों में प्रदूषण का स्तर खराब होने पर किया जाता है। प्रदूषण का स्तर बिगड़ने के साथ इसकी कारक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाता है। इसका मकसद पीएम10 और पीएम2.5 के वायुमंडल में प्रभाव पर काबू पाना है।
श्रेणियां और लागू प्रतिबंध
औसत से खराब
(पीएम2.5 61-120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर व पीएम10 101-350 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
- ईट भट्टों को बंद करना, पटाखों पर प्रतिबंध
- खुले में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध
- सड़कों पर धूल नियंत्रण
- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर जुर्माना
बहुत खराब
(पीएम2.5 121-250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, पीएम10 351 से 430 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
- पार्किंग फीस को तीन से चार गुना बढ़ाना
- बस और मेट्रो के फेरे बढ़ाना
- होटल, रेस्तरां व ढाबों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक
- डीजल जनरेटर पर रोक
गंभीर
(पीएम2.5 250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक, पीएम10 430 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक)
- सड़कों पर धूल नियंत्रण और पानी का छिड़काव
- स्टोन क्रशर और हॉट मिक्स प्लांट पर रोक
- पावर प्लांट पर रोक
आपातकालीन
(पीएम2.5 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक, पीएम10 500 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक)
- दिल्ली में डीजल ट्रकों के प्रवेश पर रोक
- निर्माण गतिविधियों पर रोक
- वाहनों पर ऑड-इवन लागू
- स्कूलों को बंद करना
अब तक की कार्रवाई
- धूल नियंत्रण अभियान के तहत अब तक 522 निर्माण स्थलों का निरीक्षण
- 165 निर्माण स्थलों पर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन मिलने पर 53.5 लाख का जुर्माना
- प्रतिदिन 20 से अधिक टीमें अलग-अलग निर्माण स्थल का कर रही हैं निरीक्षण
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सर्दी की शुरुआत से पहले ही हर साल 15 अक्तूबर को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप लागू किया जाता है। यह 15 मार्च तक जारी रहता है। इस दौरान एजेंसियां दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण फैलानी वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती हैं। नियमों की अवहेलना पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगले सप्ताह संबंधित एजेंसियों की बैठक में ग्रेप सख्ती से लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
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इधर, मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस बार मानसून जमकर बरसा है। इसका रिकॉर्ड 1169 मिमी है। इसका असर एक्यूआई पर पड़ा है। हवा अभी ज्यादा नहीं बिगड़ी है। अगले तीन दिन में भी दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश के आसार हैं। इससे हवा को साफ होने में मदद मिलेगी। नतीजतन पीएम10 व पीएम2.5 का स्तर संतोषजक श्रेणी में है।
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पराली जलाने की घटनाओं में भी कमी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में एक महीने में धान के अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष के मुकाबले कमी हुई है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 69.49 फीसदी, हरियाणा में 18.28 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 47.61 फीसदी कम हुई हैं। पराली जलाने की घटनाएं पंजाब में घटनाएं पिछले वर्ष के 4216 के मुकाबले 1286, हरियाणा में 596 से घटकर 487 और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) के आठ जिलों में पिछले वर्ष के 42 से घटकर केवल 22 हैं। दिल्ली और राजस्थान के एनसीआर से जुड़े दो जिलों में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है।ॉ
पराली जलाने की पहली घटना पंजाब में 16 सितंबर, हरियाणा में 28 सितंबर और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में 18 सितंबर को दर्ज की गई थी। एक माह के भीतर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के जिलों के कुल 1795 साइट में से 663 का निरीक्षण प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित राज्यों के प्रतिनिधियों ने किया है। इसमें से 252 मामलों में पर्यावरण जुर्माना लगाया गया है।
यह है ग्रेप का नियम
वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेप को मंजूरी दी थी। एक साल बाद वर्ष 2017 में इसे लागू किया गया था। ग्रेप का इस्तेमाल विभिन्न चरणों में प्रदूषण का स्तर खराब होने पर किया जाता है। प्रदूषण का स्तर बिगड़ने के साथ इसकी कारक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाता है। इसका मकसद पीएम10 और पीएम2.5 के वायुमंडल में प्रभाव पर काबू पाना है।
श्रेणियां और लागू प्रतिबंध
औसत से खराब
(पीएम2.5 61-120 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर व पीएम10 101-350 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
- ईट भट्टों को बंद करना, पटाखों पर प्रतिबंध
- खुले में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध
- सड़कों पर धूल नियंत्रण
- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान कर जुर्माना
बहुत खराब
(पीएम2.5 121-250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, पीएम10 351 से 430 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
- पार्किंग फीस को तीन से चार गुना बढ़ाना
- बस और मेट्रो के फेरे बढ़ाना
- होटल, रेस्तरां व ढाबों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक
- डीजल जनरेटर पर रोक
गंभीर
(पीएम2.5 250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक, पीएम10 430 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक)
- सड़कों पर धूल नियंत्रण और पानी का छिड़काव
- स्टोन क्रशर और हॉट मिक्स प्लांट पर रोक
- पावर प्लांट पर रोक
आपातकालीन
(पीएम2.5 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक, पीएम10 500 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक)
- दिल्ली में डीजल ट्रकों के प्रवेश पर रोक
- निर्माण गतिविधियों पर रोक
- वाहनों पर ऑड-इवन लागू
- स्कूलों को बंद करना
अब तक की कार्रवाई
- धूल नियंत्रण अभियान के तहत अब तक 522 निर्माण स्थलों का निरीक्षण
- 165 निर्माण स्थलों पर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन मिलने पर 53.5 लाख का जुर्माना
- प्रतिदिन 20 से अधिक टीमें अलग-अलग निर्माण स्थल का कर रही हैं निरीक्षण