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दिल्ली कैबिनेट ने दी प्रस्तावित स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय विधेयक को मंजूरी

Fri, 04 Oct 2019 02:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 02:09 AM IST
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Sports university proposal approved
नई दिल्ली। दिल्ली के युवा आने वाले समय में फुटबाल, क्रिकेट, हाकी समेत दूसरे खेलों में स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की डिग्री ले सकेंगे। दिल्ली कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को दिल्ली स्पोर्ट्स युनिवर्सिटी खोलने के शिक्षा विभाग के विधेयक को मंजूर कर खेल में करियर बनाने वाले युवाओं को तोहफा दिया है। इसे मुंडका इलाके में 90 एकड़ जमीन पर खोला जाएगा। वित्तीय विधेयक होने के कारण इसे उपराज्यपाल अनिल बैजल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद शीतकालीन सत्र में विधेयक को सदन में पेश किया जाएगा।
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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सचिवालय में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि देश में अपनी तरह का यह पहला राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय होगा। इसमें दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को एकेडमिक डिग्री के लिए अलग से कोर्स करने की आवश्यकता नहीं होगी। स्थापना के बाद विश्वविद्यालय अपने स्तर पर स्कूल से लेकर पीएचडी तक की डिग्री देगा। देश के नामचीन खिलाड़ी इस विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर के तौर पर नियुक्त होंगे, जबकि उपराज्यपाल पदेन चांसलर होंगे।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि अभी तक खेलों में दिलचस्पी रखने वाले युवाओं को हमेशा यह डर लगा रहता है कि अगर वह खेलों में बहुत आगे नहीं बढ़ सके तो उनका करियर खराब हो जाएगा। लिहाजा उनको अलग से पढ़ाई करनी पड़ती थी। दिल्ली सरकार ऐसे युवाओं की समस्या का समाधान लेकर आई है। स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय खुलने के बाद खिलाड़ियों को किसी दूसरी डिग्री की जरूरत नहीं होगी। वे अपने पसंदीदा खेल में प्रदर्शन के आधार पर ही डिग्री ले सकेंगे। प्रोफेशनल करियर में भी यह डिग्री मददगार होगी। विशेषज्ञों की एक टीम इसका कोर्स तैयार करेगी।
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राज्य विश्वविद्यालय का मिलेगा दर्जा : सिसोदिया
मनीष सिसोदिया ने बताया कि इसे राज्य विश्वविद्यालय के तौर पर बनाया जाएगा। यहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षा के साथ खेलों में शोध भी होंगे। संबंधित खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट खेल प्रभाग बनेंगे। यह कोचिंग से लेकर दूसरी अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। दूसरी तरफ विधेयक की उपराज्याल से मंजूरी मिलने के सवाल पर मनीष सिसोदिया ने कहा कि विधेयक को रोकने का कोई मतलब नहीं है। जबकि अरविंद केजरीवाल का कहना है कि विश्वविद्यालय कितने समय में बनेगा यह उपराज्यपाल से मंजूरी मिलने पर निर्भर करेगा। हालांकि, दिल्ली सरकार की योजना शीतकालीन सत्र में इसे पास करने की है।
इस तरह से मिलेगा दाखिला
विश्वविद्यालय के स्कूलों में नामांकन लेने वालों छात्रों को तो कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन सामान्य स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा देनी होगी। परीक्षा का मानक भी विशेषज्ञों की टीम तैयार करेगी। मनीष सिसोदिया का कहना है कि यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों की डिग्री दूसरे विश्वविद्यालयों की डिग्री के समकक्ष होगी।
उपमुख्यमंत्री ने सुनाया अपना अनुभव
मनीष सिसोदिया ने बताया कि बृहस्पतिवार को दो होनहार खिलाड़ी थाइलैंड से पदक जीतकर उनके पास आए थे। दोनों ने बताया कि वह स्नातक होने के लिए ओपन कॉलेज से पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसा न करने पर उनको नौकरी नहीं मिलेगी। उनका कहना था कि ध्यान बटने से वह खेलों की तैयारी नहीं पा रहे हैं। सिसोदिया ने दावा किया कि विश्वविद्यालय इस तरह की समस्याओं का समाधान देगा। वह फुल टाइम खेल में अपना ध्यान दे सकेंगे।

1997 से ही चल रही है स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की कवायद
दिल्ली में स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय बनाने की लंबे समय से योजना है। 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के समय में जमीन का अधिग्रहण भी किया गया था। लेकिन मामला अदालत में जाने से अधर में लटक गया। वहीं, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने बजट भाषण में इस विश्वविद्यालय के लिए दस करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। साथ ही इसकी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी भी गठित हुई थी। कमेटी ने सितंबर 2017 में सरकार को ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश की थी। कुछ संशोधन के साथ जनवरी 2018 में फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार हो गई थी।
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