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Delhi News: जनकपुरी स्कूल दुष्कर्म मामले में आरोपी का बेटा दे रहा धमकी
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आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने आरोप लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जनकपुरी के निजी स्कूल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पीड़िता की मां ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि आरोपी के बेटे की तरफ से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि आरोपी के बेटे ने उन्हें हाई कोर्ट के गेट नंबर-7 के पास डराया-धमकाया। पीड़िता की तरफ से पेश अधिवक्ता ने भी अदालत को बताया कि घटना के बाद कुछ नई घटनाएं हुई हैं, जिससे परिवार को सुरक्षा का खतरा है।
दिल्ली पुलिस ने भी ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने का अनुरोध किया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाश पीठ के समक्ष कहा कि यह पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत गंभीर यौन अपराध का मामला है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। राजू ने कहा कि बच्ची ने आरोपी की पहचान साफ तौर पर की है, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी की मौजूदगी साबित होती है और ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय लापरवाही बरती। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मामले में आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी की जमानत के खिलाफ याचिका को 29 जून को फैसले के लिए सूचीबद्ध किया है।
यह है मामला
मामले के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल जाने वाली तीन साल की बच्ची घर लौटने के बाद दर्द की शिकायत करने लगी। मां के पूछने पर बच्ची ने बताया कि स्कूल के सुनसान स्थान पर आरोपी 57 वर्षीय कर्मचारी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। 1 मई को जनकपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, द्वारका कोर्ट ने 7 मई को अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद आरोपी को जमानत दे दी। घटना छिपाने के आरोप में स्कूल की एक शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया गया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जनकपुरी के निजी स्कूल में तीन वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पीड़िता की मां ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि आरोपी के बेटे की तरफ से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीड़िता की मां ने आरोप लगाया कि आरोपी के बेटे ने उन्हें हाई कोर्ट के गेट नंबर-7 के पास डराया-धमकाया। पीड़िता की तरफ से पेश अधिवक्ता ने भी अदालत को बताया कि घटना के बाद कुछ नई घटनाएं हुई हैं, जिससे परिवार को सुरक्षा का खतरा है।
दिल्ली पुलिस ने भी ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने का अनुरोध किया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने न्यायमूर्ति विनोद कुमार की अवकाश पीठ के समक्ष कहा कि यह पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत गंभीर यौन अपराध का मामला है, जिसमें न्यूनतम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। राजू ने कहा कि बच्ची ने आरोपी की पहचान साफ तौर पर की है, सीसीटीवी फुटेज में आरोपी की मौजूदगी साबित होती है और ट्रायल कोर्ट ने जमानत देते समय लापरवाही बरती। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मामले में आरोपी को राहत नहीं दी जानी चाहिए।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी की जमानत के खिलाफ याचिका को 29 जून को फैसले के लिए सूचीबद्ध किया है।
यह है मामला
मामले के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल जाने वाली तीन साल की बच्ची घर लौटने के बाद दर्द की शिकायत करने लगी। मां के पूछने पर बच्ची ने बताया कि स्कूल के सुनसान स्थान पर आरोपी 57 वर्षीय कर्मचारी ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया। 1 मई को जनकपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, द्वारका कोर्ट ने 7 मई को अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद आरोपी को जमानत दे दी। घटना छिपाने के आरोप में स्कूल की एक शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया गया था।
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