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उम्मीदों का शहर दिल्ली : यहां कठिन परिस्थितियों में ‘कांटों’ पर खिलते हैं ख्वाब

Sun, 27 Feb 2022 04:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 27 Feb 2022 04:57 AM IST
सार

सपनों को बटोरने हर साल दूसरे राज्यों से दिल्ली आते हैं हजारों छात्र-छात्राएं।

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Some problems of students studying in DU living in Delhi
ये है मुखर्जी नगर में खाने-पीने का जुगाड़... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिविल सेवा पास करने का सपना लिए जो छात्र दिल्ली पहुंचते हैं उनका पहला वास्ता किराए के कमरे से पड़ता है, जहां से उनका सफर पेइंग गेस्ट (पीजी) के एक बेड से शुरू होता है। इनकी कोशिश यही रहती है कि कोचिंग और पीजी के बीच की दूरी न्यूनतम रखी जाए। यही वजह है कि मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर कोचिंग हब के 500 मीटर के दायरे में स्थित पीजी सबसे महंगे होते हैं। जैसे-जैसे इनकी दूरी बढ़ती जाती है, किराया भी कम होता जाता है। सुविधाओं के हिसाब से पीजी में एक बेड के लिए 7 हजार से 15 हजार रुपये के बीच देने पड़ते हैं। इसी के साथ खानपान भी जुड़ जाता है। लजीज व्यंजनों के मामले में दोनों इलाके लघु भारत सरीखे हैं, जहां हर प्रदेश का खाना मिल जाता है। यहां कठिन परिस्थितियों के बीच ‘कांटों’ पर भी ख्वाब खिलते हैं।

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एक कमरे में पलते हैं कई सपने
यहां रहने वाले अधिकांश छात्र एक ही कमरे को अन्य छात्रों के साथ साझा करते हैं। इसकी प्रमुख वजह कमरों के अधिक किराये के भार को कम करना है। यहां एक ही कमरे में दो सिंगल बेड डालकर छात्रों के लिए तैयार किया जाता है। कुछ कमरों में तीन बेड की भी व्यवस्था है। ऐसे में यहां एक कमरे में अलग-अलग उम्मीदों के साथ कई सपने पलते हैं।
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अर्थव्यवस्था का भी जुड़ाव
रहना और खाना छात्रों के लिए तो जरूरी है ही, दोनों इलाकों की अर्थव्यवस्था भी इससे ही जुड़ती है। करीब दो किमी के दायरे में फैले व छात्रों के लिए मक्का माने जाने वाले इन इलाकों का पूरा कारोबार विद्यार्थियों के खर्च से ही चलता है। कोचिंग संचालकों के साथ दूसरों के लिए भी छात्र-छात्राएं उपभोक्ता के तौर पर देखे जाते हैं। यहां फर्क इससे नहीं पड़ता कि दुकान बहुमंजिला इमारत की है या फुटपाथ की रेहड़ी। दिनभर यहां छात्रों की चहलकदमी रहती है।
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कोचिंग की दूरी और सुविधा से उठता-गिरता पीजी मीटर

  • कोचिंग संस्थानों के 500 मीटर के दायरे में सबसे महंगा पीजी मिलता है। दूरी बढ़ने के साथ कम हो जाता है किराया।
  • सुविधाओं के हिसाब से भी किराए में रहता है फर्क।
  • सुबह-शाम के नाश्ते के साथ दोपहर व शाम का खाना, कमरे में एसी, बैकअप के साथ बिजली-पानी की सुविधा से युक्त पीजी के एक बेड की औसत कीमत 15,000 रुपये।
  • कई मामलों में यह कीमत होती 20,000 रुपये तक भी है।
  • कोचिंग से दूरी और कम सुविधाओं वाली पीजी का बेड 7000 रुपये तक मिलता है।

यहां नजर आती है लघु भारत की झलक
पीजी के कांबो पैक के अलावा यहां की सड़कों, तंग गलियों व फुटपाथ पर पूरे भारत की रसोई सजती है। छात्रों की पसंद के हिसाब से स्वाद की भी व्यवस्था दुरुस्त है। यहां पर विभिन्न राज्यों के पकवान भी चखने के लिए मिल जाएंगे। इसमें प्रमुख रूप से चेन्नई का डोसा, मुंबई की पाव भाजी, केरल का नारियल पानी, बिहार का लिट्टी-चोखा, अमृतसरी नान व कुलचे, पुरानी दिल्ली की कचौड़ी, चाइनीज फूड से लेकर कोल्ड कॉफी आदि शामिल हैं। इसी तरह की व्यवस्था कुछ पीजी द्वारा छात्रों को दी जाती है, जिसमें छात्रों के राज्यों के हिसाब से खाना परोसा जाता है। खास बात यह है कि दूरदराज से आने वाले छात्रों की जेब का ध्यान रखते हुए इनके दाम भी वाजिब रखे गए हैं। छात्रों का पेट भरने के लिए यहां रेहड़ी-खोमचों का भी अपना अलग स्वाद है, जहां सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक के लिए भीड़ जुटती है।



मुखर्जी नगर पहुंचकर यहां पीजी की तलाश शुरू कर दी थी। कुछ पीजी के दाम जेब के हिसाब से फिट नहीं बैठ रहे थे। इसलिए कोचिंग से दूर पीजी की तलाश की है। अब कोचिंग व पीजी के बीच समय की अधिक खपत होगी।
-नवदीप त्रिपाठी, प्रतियोगी छात्र

यहां विभिन्न तरह के पकवान मिल जाते हैं। इनमें बिहार के लिट्टी-चोखा से लेकर चेन्नई का डोसा भी शामिल है। वहीं, कोल्ड कॉफी का जवाब नहीं है, जो सस्ते दाम में मिल जाती है, लेकिन पीजी काफी महंगा मिलता है।
-फैसल, प्रतियोगी छात्र

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