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कोरोना का असरः दिल्ली के कुछ निजी विद्यालयों में लग सकता है ताला

Mon, 25 Jan 2021 06:57 AM IST
नोएडा ब्यूरो रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Mon, 25 Jan 2021 06:57 AM IST
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Delhi private schools find it difficult to survive in COVID Crisis, might get closed
demo pic... - फोटो : amar ujala

कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर स्कूली शिक्षा पर पड़ा है। दिल्ली में प्ले, प्राइमरी व आठवीं तक चलने वाले कई निजी स्कूलों में ताला लग सकता है। स्कूल संचालक किराया और स्टाफ को वेतन नहीं दे पाने के कारण बंद करने की तैयारी कर रहे हैं।

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स्कूलों को बंद करने के पीछे वजह यह भी है कि कई बच्चे फीस नहीं दे सकने के कारण सरकारी स्कूलों में शिफ्ट हो गए हैं तो कुछ लोग दिल्ली छोड़कर घर चले गए हैं। इनमें से अधिकतर स्कूल ऐसे हैं जो कि किराए की इमारतों व जमीनों पर चल रहे हैं।
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कोरोना महामाही के कारण स्कूल बीते मार्च 2020 से बंद हैं। स्कूल बंद होने के बावजूद पढ़ाई ऑनलाइन हो रही हैं, लेकिन कई ऐसे बजट स्कूल हैं जो कि फीस नहीं आने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करा पा रहे हैं।
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दरअसल वह अपने स्कूल बंद करने की तैयारी में हैं। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में काफी निजी स्कूल प्ले, प्राइमरी (पहली से पांचवीं) व पहली से आठवीं तक चलते हैं। पहली से पांचवीं व पहली से आठवीं तक के इन स्कूलों मेें बच्चों की संख्या 100 सौ से तीन सौ तक है।

यह ऐसे स्कूल हैं जिसमें अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मोटी फीस नहीं दे सकने के कारण बच्चों बजट स्कूल में भेजते हैं। क्योंकि ऐसे स्कूलों की फीस 500 से 1500 रुपये तक होती है। लेकिन कोरोना महामारी के कारण अभिभावक यह फीस भी नहीं दे पा रहे हैं।

40 से 50 स्कूल बंद करने की तैयारी में
अर्फोडेबल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्य छाबडिय़ा ने बताया कि अभी ऐसे लगभग 40-50 स्कूल हैं जो कि बंद करने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ स्कूलों ने तो बंद करने की कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने बच्चों से केवल ट्यूशन फीस लेने को कहा है, लेकिन अभिभावक वह फीस भी नहीं दे रहे। इस कारण से उन्हें अपने स्टाफ को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। फीस नहीं आने के कारण वह न ही किराया और न ही स्टाफ को वेतन दे पा रहे हैं।

कोरोना महामारी, सरकार मदद और फीस नहीं मिलने के कारण पचास मान्यता प्राप्त प्राइमरी स्कूल 31 मार्च के बाद बंद हो जाएंगे। काफी स्कूलों ने एसोसिएशन से संपर्क किया है। उन्हें सलाह दी गई हैं कि जो बच्चे पढ़ रहे हैं उन्हें दूसरे स्कूल में एडजस्ट कराएं ताकि कोई बच्चा बिना दाखिला के न रहे। साथ ही शिक्षक भी लिए नौकरी की तलाश कर लेंगे। मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने के लिए मंजूरी लेनी पड़ती है। जिसकी प्रक्रिया लंबी होती है।
आरसी जैन, अध्यक्ष, दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन

अभिभावक फीस नहीं दे पा रहे हैं। इस वजह से स्टाफ को वेतन देने में दिक्कत आ रही है। स्कूल संचालकों को टैक्स, बिजली, पानी के बिल देने पड़ रहे हैं। सरकार से न तो कोई सहायता और न ही कोई छूट मिल रही है। इस कारण से स्कूल बंद करने के बारे में सोचना पड़ रहा है।

सत्यवीर सिंह मावी, अध्यक्ष, डेवलपिंग इंडिपेंडेंट स्कूल अलायंस

इन इलाकों में हैं स्कूल
भलस्वा, जहांगीर पुरी, कोंडली, दुल्लुपुरा, मयूर विहार फेज-3, करावल नगर, सोनिया विहार, हर्ष विहार, भजनपुरा, मंडोली, सबोली, अशोक नगर, झड़ौदा, नरेला, बवाना, बदरपुर, जैतपुर, मीठापुर, संगम विहार।

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