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स्कूली बच्चों को अक्षर ज्ञान देंगे एसओएल के विद्यार्थी
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) अब अपने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ भी पढ़ाएगा। इसके तहत एसओएल के छात्र सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के लर्निंग गैप को कम करेंगे। इसके लिए गैर सरकारी संस्थाओं के साथ करार किया जाएगा। एसओएल ने इसे सामाजिक उत्तरदायित्व इंटर्नशिप योजना का नाम दिया है। इस योजना की जानकारी जल्द ही विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएगी ताकि वह अपनी भागीदारी कर सकें।
कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो नेे बताया स्कूलों में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई) के तहत ड्रॉप आउट या कभी स्कूल नहीं गए बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से कक्षा में दाखिला मिलता है। आरटीई के तहत आठवीं तक बच्चे को पास करना जरूरी होता है। सरकारी स्कूलों में अगली कक्षाओं में भेज दिया जाता है। मसलन यदि किसी का दाखिला उसकी आयु के अनुसार दूसरी कक्षा में हुआ तो सत्र समाप्त होने पर उसे तीसरी कक्षा में भेज दिया जाता है।
एसओएल एनजीओ से करेगा करार
प्रो. पायल मागो नेे बताया कि कई बच्चे पहली कक्षा में पहुंचे बिना दूसरी और तीसरी में आ जाते हैं। इससे बच्चों में काफी लर्निंग गैप आता है। इसी गैप को पूरा करने के लिए यह योजना तैयार की गई है। एसओएल के छात्र स्कूलों में जाकर ऐसे बच्चों की अलग से कक्षाएं लेंगे। उन्होंने बताया कि इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पहले चरण में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे ड्रॉप इन द ओशियन एनजीओ के साथ जल्द एमओयू साइन करने जा रहे हैं। यह संस्था ही स्कूलों में बच्चों को पढ़वाने के लिए अनुमति दिलवाएगी। एसओएल और एनजीओ के सहयोग से विद्यार्थी के घर के पास के किसी स्कूल का आवंटन किया जाएगा। सामाजिक उत्तरदायित्व का इंटर्नशिप का हिस्सा बनने के लिए विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
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इच्छुक छात्रों को कराना होगा पंजीकरण
प्रो. पायल मागो नेे बताया कि स्नातक स्तर के किसी भी कोर्स के दूसरे व तीसरे वर्ष के विद्यार्थी या फिर स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी भागीदारी कर सकते हैं। इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा। जो विद्यार्थी कहीं पढ़ाने के इच्छुक हैं तो वह स्कूल में जाकर पढ़ा सकते हैं। इसके लिए उसे पंजीकरण करना होगा।
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कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक प्रो. पायल मागो नेे बताया स्कूलों में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई) के तहत ड्रॉप आउट या कभी स्कूल नहीं गए बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से कक्षा में दाखिला मिलता है। आरटीई के तहत आठवीं तक बच्चे को पास करना जरूरी होता है। सरकारी स्कूलों में अगली कक्षाओं में भेज दिया जाता है। मसलन यदि किसी का दाखिला उसकी आयु के अनुसार दूसरी कक्षा में हुआ तो सत्र समाप्त होने पर उसे तीसरी कक्षा में भेज दिया जाता है।
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एसओएल एनजीओ से करेगा करार
प्रो. पायल मागो नेे बताया कि कई बच्चे पहली कक्षा में पहुंचे बिना दूसरी और तीसरी में आ जाते हैं। इससे बच्चों में काफी लर्निंग गैप आता है। इसी गैप को पूरा करने के लिए यह योजना तैयार की गई है। एसओएल के छात्र स्कूलों में जाकर ऐसे बच्चों की अलग से कक्षाएं लेंगे। उन्होंने बताया कि इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पहले चरण में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे ड्रॉप इन द ओशियन एनजीओ के साथ जल्द एमओयू साइन करने जा रहे हैं। यह संस्था ही स्कूलों में बच्चों को पढ़वाने के लिए अनुमति दिलवाएगी। एसओएल और एनजीओ के सहयोग से विद्यार्थी के घर के पास के किसी स्कूल का आवंटन किया जाएगा। सामाजिक उत्तरदायित्व का इंटर्नशिप का हिस्सा बनने के लिए विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
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इच्छुक छात्रों को कराना होगा पंजीकरण
प्रो. पायल मागो नेे बताया कि स्नातक स्तर के किसी भी कोर्स के दूसरे व तीसरे वर्ष के विद्यार्थी या फिर स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी भागीदारी कर सकते हैं। इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा। जो विद्यार्थी कहीं पढ़ाने के इच्छुक हैं तो वह स्कूल में जाकर पढ़ा सकते हैं। इसके लिए उसे पंजीकरण करना होगा।