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Delhi News: देश के भूजल में बढ़ रहा 'धीमा जहर', पानी में मिले नाइट्रेट, यूरेनियम और आर्सेनिक
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केंद्रीय भूमि जल आयोग (सीजीडब्ल्यूए) ने एनजीटी में दाखिल की रिपोर्ट
23,610 सैंपल की जांच में चौंकाने वाला खुलासा, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आयरन, यूरेनियम और आर्सेनिक ने बढ़ाई चिंता
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। देश के भूमिगत जल की गुणवत्ता खराब हो गई है। इसकी गवाही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर दाखिल केंद्रीय भूमि जल आयोग (सीजीडब्ल्यूए) की रिपोर्ट देती है। आयोग की प्री-मानसून नेशनल ग्राउंड वाटर क्वालिटी बुलेटिन-2025 रिपोर्ट में देशभर के भूजल में बढ़ते रासायनिक प्रदूषण की गंभीर तस्वीर सामने आई है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि देश का हर पांचवां भूजल सैंपल नाइट्रेट से प्रदूषित मिला है, जबकि कई राज्यों में फ्लोराइड, यूरेनियम, आयरन और आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्व तय सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाए गए हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश का अधिकांश भूजल अभी भी निर्धारित मानकों के भीतर पीने योग्य है लेकिन कुछ राज्यों और विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में रासायनिक प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट सीजीडब्ल्यूए के प्रशासक विनोद कुमार धौंडियाल द्वारा एनजीटी में पेश की गई है। इसे सीजीडब्ल्यूए के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों यशवीर सिंह, डॉ. सुरेश कुमार, जितेंद्र कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने तैयार किया है।
इस बार भूजल गुणवत्ता सर्वेक्षण का दायरा पहले से कहीं अधिक बढ़ाया गया। पहले जहां लगभग 15 हजार सैंपल की जांच होती थी वहीं, इस वर्ष देशभर के 23,610 बैकग्राउंड मॉनिटरिंग स्टेशनों से पानी के नमूने लिए गए। इनकी वैज्ञानिक जांच और डेटा विश्लेषण के आधार पर यह राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में इस नेटवर्क के कम से कम 25 प्रतिशत स्टेशन को ट्रेंड मॉनिटरिंग स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक भूजल की गुणवत्ता में होने वाले बदलावों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
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दिल्ली में नाइट्रेट प्रदूषण 34.62 फीसदी, महाराष्ट्र में सबसे खराब हालात
देश में भूजल प्रदूषण अलग-अलग राज्यों में अलग रूप में सामने आया है। नाइट्रेट प्रदूषण सबसे ज्यादा महाराष्ट्र (43.33%), राजस्थान (41.73%), कर्नाटक (36.49%), दिल्ली (34.62%) और आंध्र प्रदेश (31.29%) में पाया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश भी इस समस्या से प्रभावित हैं। वहीं, फ्लोराइड प्रदूषण मुख्य रूप से राजस्थान (32.25%) में सबसे अधिक है। इसके बाद हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली और कर्नाटक प्रभावित हैं। इसके अलावा, सिक्किम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में यह समस्या लगभग नहीं पाई गई।
पंजाब में यूरेनियम प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, यूरेनियम प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति पंजाब (31.53%) में है। इसके बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली, बिहार और राजस्थान प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। साथ ही, आयरन (लोहा) प्रदूषण सबसे ज्यादा त्रिपुरा (41.86%) और असम (30.30%) में पाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, मिजोरम, ओडिशा और नागालैंड भी इससे प्रभावित हैं। इसके अलावा, आर्सेनिक प्रदूषण मुख्य रूप से असम (8.90%), पश्चिम बंगाल (8.81%), बिहार, पंजाब और उत्तर प्रदेश में देखा गया है। वहीं, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (खारापन) सबसे ज्यादा राजस्थान (32.89%), दिल्ली (24.52%), हरियाणा (22.46%) और गुजरात (16.04%) में पाया गया है, जबकि हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में है।
क्या असर पड़ता है?
-पानी का स्वाद धातु जैसा हो जाता है।
-कपड़ों और बर्तनों पर लाल-भूरे दाग पड़ते हैं।
-पाइपलाइन जाम होने लगती है।
-आयरन बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं।
किस प्रदूषण से क्या असर पड़ता है?
-नाइट्रेट से शरीर में ऑक्सीजन की कमी और बच्चों में ब्लू बेबी सिंड्रोम हो सकता है।
-फ्लोराइड से दांत कमजोर और हड्डियों में दर्द होता है।
-यूरेनियम किडनी खराब कर कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
-आर्सेनिक त्वचा रोग और कैंसर करता है।
-आयरन से पानी खराब होता है और खारापन थकान व हृदय समस्याएं बढ़ाता है।
रिपोर्ट में सुझाए गए समाधान
-खादों का संतुलित उपयोग
-किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए
-जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि नाइट्रेट प्रदूषण कम हो सके।
-रेन वाटर हार्वेस्टिंग
-बारिश के पानी को संरक्षित कर कृत्रिम भूजल रिचार्ज के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जाए, जिससे रसायनों की सांद्रता कम हो सके।
-जल शोधन व्यवस्था
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23,610 सैंपल की जांच में चौंकाने वाला खुलासा, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आयरन, यूरेनियम और आर्सेनिक ने बढ़ाई चिंता
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। देश के भूमिगत जल की गुणवत्ता खराब हो गई है। इसकी गवाही राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर दाखिल केंद्रीय भूमि जल आयोग (सीजीडब्ल्यूए) की रिपोर्ट देती है। आयोग की प्री-मानसून नेशनल ग्राउंड वाटर क्वालिटी बुलेटिन-2025 रिपोर्ट में देशभर के भूजल में बढ़ते रासायनिक प्रदूषण की गंभीर तस्वीर सामने आई है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि देश का हर पांचवां भूजल सैंपल नाइट्रेट से प्रदूषित मिला है, जबकि कई राज्यों में फ्लोराइड, यूरेनियम, आयरन और आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्व तय सुरक्षित सीमा से कहीं अधिक पाए गए हैं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि देश का अधिकांश भूजल अभी भी निर्धारित मानकों के भीतर पीने योग्य है लेकिन कुछ राज्यों और विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में रासायनिक प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है। रिपोर्ट सीजीडब्ल्यूए के प्रशासक विनोद कुमार धौंडियाल द्वारा एनजीटी में पेश की गई है। इसे सीजीडब्ल्यूए के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों यशवीर सिंह, डॉ. सुरेश कुमार, जितेंद्र कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने तैयार किया है।
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इस बार भूजल गुणवत्ता सर्वेक्षण का दायरा पहले से कहीं अधिक बढ़ाया गया। पहले जहां लगभग 15 हजार सैंपल की जांच होती थी वहीं, इस वर्ष देशभर के 23,610 बैकग्राउंड मॉनिटरिंग स्टेशनों से पानी के नमूने लिए गए। इनकी वैज्ञानिक जांच और डेटा विश्लेषण के आधार पर यह राष्ट्रीय रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में इस नेटवर्क के कम से कम 25 प्रतिशत स्टेशन को ट्रेंड मॉनिटरिंग स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक भूजल की गुणवत्ता में होने वाले बदलावों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।
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दिल्ली में नाइट्रेट प्रदूषण 34.62 फीसदी, महाराष्ट्र में सबसे खराब हालात
देश में भूजल प्रदूषण अलग-अलग राज्यों में अलग रूप में सामने आया है। नाइट्रेट प्रदूषण सबसे ज्यादा महाराष्ट्र (43.33%), राजस्थान (41.73%), कर्नाटक (36.49%), दिल्ली (34.62%) और आंध्र प्रदेश (31.29%) में पाया गया है। इसके अलावा तमिलनाडु, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश भी इस समस्या से प्रभावित हैं। वहीं, फ्लोराइड प्रदूषण मुख्य रूप से राजस्थान (32.25%) में सबसे अधिक है। इसके बाद हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, दिल्ली और कर्नाटक प्रभावित हैं। इसके अलावा, सिक्किम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में यह समस्या लगभग नहीं पाई गई।
पंजाब में यूरेनियम प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, यूरेनियम प्रदूषण की सबसे गंभीर स्थिति पंजाब (31.53%) में है। इसके बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली, बिहार और राजस्थान प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। साथ ही, आयरन (लोहा) प्रदूषण सबसे ज्यादा त्रिपुरा (41.86%) और असम (30.30%) में पाया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, मिजोरम, ओडिशा और नागालैंड भी इससे प्रभावित हैं। इसके अलावा, आर्सेनिक प्रदूषण मुख्य रूप से असम (8.90%), पश्चिम बंगाल (8.81%), बिहार, पंजाब और उत्तर प्रदेश में देखा गया है। वहीं, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (खारापन) सबसे ज्यादा राजस्थान (32.89%), दिल्ली (24.52%), हरियाणा (22.46%) और गुजरात (16.04%) में पाया गया है, जबकि हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में है।
क्या असर पड़ता है?
-पानी का स्वाद धातु जैसा हो जाता है।
-कपड़ों और बर्तनों पर लाल-भूरे दाग पड़ते हैं।
-पाइपलाइन जाम होने लगती है।
-आयरन बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं।
किस प्रदूषण से क्या असर पड़ता है?
-नाइट्रेट से शरीर में ऑक्सीजन की कमी और बच्चों में ब्लू बेबी सिंड्रोम हो सकता है।
-फ्लोराइड से दांत कमजोर और हड्डियों में दर्द होता है।
-यूरेनियम किडनी खराब कर कैंसर का खतरा बढ़ाता है।
-आर्सेनिक त्वचा रोग और कैंसर करता है।
-आयरन से पानी खराब होता है और खारापन थकान व हृदय समस्याएं बढ़ाता है।
रिपोर्ट में सुझाए गए समाधान
-खादों का संतुलित उपयोग
-किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए
-जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि नाइट्रेट प्रदूषण कम हो सके।
-रेन वाटर हार्वेस्टिंग
-बारिश के पानी को संरक्षित कर कृत्रिम भूजल रिचार्ज के माध्यम से जमीन में पहुंचाया जाए, जिससे रसायनों की सांद्रता कम हो सके।
-जल शोधन व्यवस्था