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ऑनलाइन परीक्षा में अपनी जगह किसी और को बैठाया, 3 युवतियां गिरफ्तार
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नई दिल्ली। रोहिणी निवासी चार युवतियों ने प्राइमरी टीचर की ऑनलाइन परीक्षा में अपनी जगह किसी अन्य युवती को बैठाया था। डीएसएसएसबी की अक्तूबर-नवंबर 2018 आयोजित परीक्षा में चारों का चयन हो गया था। चारों ने नौकरी ज्वाइन कर ली थी। कागजात के वेरिफिकेशन के दौरान चारों के एडमिट कार्ड पर एक ही युवती की तस्वीर होने से भेद खुल गया। डीएसएसएसबी की शिकायत के बाद अपराध शाखा ने दिसंबर 2018 में एक युवती को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि तीन अन्य फरार हो गई थीं। अपराध शाखा ने सोमवार को तीनों को बाहरी दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को उन्हें जेल भेज दिया गया। डीएसएसएसबी ने चारों के किसी भी परीक्षा में बैठने पर अजीवन प्रतिबंध लगा दिया है।
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि डीएसएसएसबी के परीक्षा नियंत्रक अनिल कुमार सिंह ने इसकी शिकायत दी थी। अक्तूबर और नवंबर 2018 में अलग-अलग तारीख पर प्राइमरी टीचर के लिए ऑनलाइन परीक्षा हुई थी। परीक्षार्थियों से एडमिट कार्ड के दूसरे पेज पर पोस्टकार्ड साइज की फोटो लगवाकर उसका दूसरा पेज वहीं परीक्षा केंद्र पर जमा कर लिया गया था। परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ तो पास हुई चार अलग-अलग एडमिट कार्ड पर एक ही युवती की तस्वीर मिली। चारों की अलग-अलग तारीख पर परीक्षा हुई थी। रिजल्ट आने के बाद इन युवतियों ने ज्वाइन कर लिया था। चारों के एडमिट कार्ड संबंधित विभाग को जांच के लिए भेजे गए तो इसका खुलासा हुआ। अपराध शाखा ने छानबीन के बाद दिसंबर 2018 में एक युवती को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि बाकी तीनों अपने पतों से गायब मिली थीं। तभी से पुलिस इनकी तलाश कर रही थी। सूचना के बाद सोमवार को पुलिस ने तीनों युवतियों को बाहरी दिल्ली में अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया।
परीक्षा देने वाली युवती फरार, परीक्षा देने के लिए थे 5-5 लाख रुपये
तीनों ने बताया कि पंजाबी बाग की एक कोचिंग में उनकी मुलाकात एक युवती से हुई। उसने पांच-पांच लाख रुपये लेकर परीक्षा पास करवाने की बात की। इसमें दो-दो लाख रुपये पहले और तीन लाख रुपये रिजल्ट आने के बाद देने थे। रिजल्ट में पास होने के बाद तीनों ने पूरे पैसे युवती को दे दिए थे। अपराध शाखा मुख्य आरोपी युवती और गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश तेज कर दी है।
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अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह ने बताया कि डीएसएसएसबी के परीक्षा नियंत्रक अनिल कुमार सिंह ने इसकी शिकायत दी थी। अक्तूबर और नवंबर 2018 में अलग-अलग तारीख पर प्राइमरी टीचर के लिए ऑनलाइन परीक्षा हुई थी। परीक्षार्थियों से एडमिट कार्ड के दूसरे पेज पर पोस्टकार्ड साइज की फोटो लगवाकर उसका दूसरा पेज वहीं परीक्षा केंद्र पर जमा कर लिया गया था। परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ तो पास हुई चार अलग-अलग एडमिट कार्ड पर एक ही युवती की तस्वीर मिली। चारों की अलग-अलग तारीख पर परीक्षा हुई थी। रिजल्ट आने के बाद इन युवतियों ने ज्वाइन कर लिया था। चारों के एडमिट कार्ड संबंधित विभाग को जांच के लिए भेजे गए तो इसका खुलासा हुआ। अपराध शाखा ने छानबीन के बाद दिसंबर 2018 में एक युवती को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि बाकी तीनों अपने पतों से गायब मिली थीं। तभी से पुलिस इनकी तलाश कर रही थी। सूचना के बाद सोमवार को पुलिस ने तीनों युवतियों को बाहरी दिल्ली में अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया।
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परीक्षा देने वाली युवती फरार, परीक्षा देने के लिए थे 5-5 लाख रुपये
तीनों ने बताया कि पंजाबी बाग की एक कोचिंग में उनकी मुलाकात एक युवती से हुई। उसने पांच-पांच लाख रुपये लेकर परीक्षा पास करवाने की बात की। इसमें दो-दो लाख रुपये पहले और तीन लाख रुपये रिजल्ट आने के बाद देने थे। रिजल्ट में पास होने के बाद तीनों ने पूरे पैसे युवती को दे दिए थे। अपराध शाखा मुख्य आरोपी युवती और गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश तेज कर दी है।
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