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ट्रैकर बोर्ड के सदस्य की आपबीती : रात में सोते-सोते उठाने लगते हैं फोन, सपने में सुनाई देता है ऑक्सीजन

Sun, 02 May 2021 09:44 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 02 May 2021 09:44 PM IST
सार

दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को 14वें दिन भी राजधानी के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। 

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shortage of oxygen did not over in delhi on sunday as well
ऑक्सीजन सपोर्ट पर कोरोना मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को 14वें दिन भी राजधानी के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। स्थिति यह रही कि दिन भर अस्पतालों से फोन घनघना रहे थे। इतना ही नहीं ऑक्सीजन टैंकर को लेकर बनाए ट्रैकर बोर्ड के सदस्य भी अब परेशान होने लगे हैं। इसी बोर्ड के एक सदस्य का यहां तक कहना है कि जब वे रात में घर पहुंचते हैं तो सपने में भी सोते-सोते फोन उठाने लगते हैं। उन्हें ऑक्सीजन ही सुनाई देता है। 15 से 16 घंटे तक ड्यूटी करने के दौरान यही तनाव रहता है कि टैंकर का लोकेशन क्या है? अस्पतालों से कॉल आने के साथ ही सरकार का दबाव भी अत्यधिक है। ऐसे में घबराहट भी रहती है कि कहीं कुछ बड़ी घटना न हो जाए। 

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रविवार को भी राजधानी के अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने की समस्याएं देखने को मिलीं। जनकपुरी के ब्रेन वल्र्ड अस्पताल में ऑक्सीजन कम होने के बाद मरीजों को डिस्चॉर्ज करना शुरू कर दिया। इस अस्पताल से कोरोना के आठ मरीजों को डिस्चॉर्ज किया। वहीं सिरीफोर्ट इलाके में मौजूद सामा अस्पताल ने मरीजों के परिजनों से यह लिखवाया है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की तबीयत बिगड़ती है या उनकी मौत होती है तो वे अस्पताल को जिम्मेदार नहीं ठहराएंगे। अस्पताल ऑक्सीजन की कमी के लिए जिम्मेदार नहीं है। सामा अस्पताल की आरएमओ डॉक्टर अनुषा गुडुमुला ने बताया कि अस्पताल में 30 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती हैं। ऑक्सीजन की कमी की वजह से जिन मरीजों को तीन लीटर ऑक्सीजन की जरूरत है तो उन्हें दो लीटर ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से लगातार ऑक्सीजन कम आ रही है। 
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इनके अलावा मालवीय नगर स्थित मधुकर चिल्ड्रन अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने का अलर्ट मिलना शुरू हो गया। यहां 26 आईसीयू बेड में से 21 मरीज आईसीयू में उच्च दबाव वाले ऑक्सीजन बिस्तरों पर हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। दोपहर 12 बजे तक कई फोन कॉल करने के बाद अस्पताल ने तब राहत की सांस ली जब इनके सामने टैंकर आता दिखाई दिया। 
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वहीं, शाम होते होते सीताराम भरतिया अस्पताल से ऑक्सीजन खत्म होने का अलर्ट आता रहा। यहां 40 मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। इनके अलावा आकाश अस्पताल से भी ऑक्सीजन खत्म होने की सूचना मिलना शुरू हो गई। यहां करीब 200 मरीजों की जान आफत में आई। सीताराम भरतिया अस्पताल ने बताया कि उनके पास टैंकर तो नहीं आया लेकिन सरकार ने 20 सिलेंडर पहुंचाए हैं लेकिन इनसे अधिक काम नहीं चल सकता। अस्पतालों से अलर्ट आने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। विम्हंस अस्पताल ने भी ऑक्सीजन खत्म होने की जानकारी सरकार को दी है। हालांकि खबर लिखे जाने तक वहां टैंकर नहीं पहुंचा था। 

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