{"_id":"6915f055ae7c25cb5c0dd0ab","slug":"shahjahanpur-power-plant-instructed-to-improve-fly-ash-ashram-news-c-340-1-del1011-112299-2025-11-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi News: शाहजहांपुर बिजली संयंत्र को फ्लाई ऐश सुधारने के निर्देश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi News: शाहजहांपुर बिजली संयंत्र को फ्लाई ऐश सुधारने के निर्देश
विज्ञापन
-एनजीटी ने सख्ती दिखाई, कहा, फ्लाई ऐश भंडारण के लिए पूर्व अनुमति जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शाहजहांपुर के 90 मेगावाट कोयला आधारित बिजली संयंत्र बीईपीएल पर फ्लाई ऐश के अवैध भंडारण, नहरों-सड़कों के पास डंपिंग और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को पर्यावरणीय मुआवजा लगाने, बीईपीएल को 33 फीसदी हरित पट्टी विकसित करने और प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) को 6 माह में सत्यापन रिपोर्ट देने का सख्त निर्देश जारी किया है। अधिकरण ने कहा कि बीईपीएल को फ्लाई ऐश के प्रबंधन और निस्तारण में पर्यावरण मंत्रालय और यूपीपीसीबी के सभी नियमों का पालन करना होगा। बिना अनुमति के किसी भी तरह का फ्लाई ऐश भंडारण नहीं किया जाएगा। साथ ही, इसे नहरों, जलाशयों या आबादी वाले इलाकों के पास नहीं रखा जाएगा।
अदालत ने यूपीपीसीबी को निर्देश दिया गया है कि यदि बीईपीएल ने पर्यावरणीय नियमों या अनुमति शर्तों का उल्लंघन किया है, तो पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाकर और वसूली की जाए। यह राशि पर्यावरण सुधार में खर्च की जाएगी, जिसे जिला पर्यावरण समिति शाहजहांपुर के साथ मिलकर तैयार करेगी। यूपीपीसीबी को यह भी कहा गया है कि वह फ्लाई ऐश उपयोग की नीति तैयार करे, ताकि प्रदेश के सभी कोयला आधारित उद्योगों में एक समान नियम लागू हों। यह नीति छह माह के भीतर अंतिम रूप दी जानी है।
बोर्ड को बीईपीएल के 90 मेगावाट बिजली संयंत्र का नियमित निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि फ्लाई ऐश के भंडारण, परिवहन और अपशिष्ट जल प्रबंधन में किसी प्रकार का उल्लंघन न हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने शाहजहांपुर के 90 मेगावाट कोयला आधारित बिजली संयंत्र बीईपीएल पर फ्लाई ऐश के अवैध भंडारण, नहरों-सड़कों के पास डंपिंग और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। एनजीटी ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को पर्यावरणीय मुआवजा लगाने, बीईपीएल को 33 फीसदी हरित पट्टी विकसित करने और प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) को 6 माह में सत्यापन रिपोर्ट देने का सख्त निर्देश जारी किया है। अधिकरण ने कहा कि बीईपीएल को फ्लाई ऐश के प्रबंधन और निस्तारण में पर्यावरण मंत्रालय और यूपीपीसीबी के सभी नियमों का पालन करना होगा। बिना अनुमति के किसी भी तरह का फ्लाई ऐश भंडारण नहीं किया जाएगा। साथ ही, इसे नहरों, जलाशयों या आबादी वाले इलाकों के पास नहीं रखा जाएगा।
अदालत ने यूपीपीसीबी को निर्देश दिया गया है कि यदि बीईपीएल ने पर्यावरणीय नियमों या अनुमति शर्तों का उल्लंघन किया है, तो पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाकर और वसूली की जाए। यह राशि पर्यावरण सुधार में खर्च की जाएगी, जिसे जिला पर्यावरण समिति शाहजहांपुर के साथ मिलकर तैयार करेगी। यूपीपीसीबी को यह भी कहा गया है कि वह फ्लाई ऐश उपयोग की नीति तैयार करे, ताकि प्रदेश के सभी कोयला आधारित उद्योगों में एक समान नियम लागू हों। यह नीति छह माह के भीतर अंतिम रूप दी जानी है।
विज्ञापन
बोर्ड को बीईपीएल के 90 मेगावाट बिजली संयंत्र का नियमित निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि फ्लाई ऐश के भंडारण, परिवहन और अपशिष्ट जल प्रबंधन में किसी प्रकार का उल्लंघन न हो।
विज्ञापन