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स्क्रैप यार्ड का प्रस्ताव : वाहनों के कबाड़ से कम होगा प्रदूषण का खतरा

Mon, 06 Sep 2021 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 06 Sep 2021 05:44 AM IST
सार

  • पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से होगा निस्तारण
  • वाहनों के कुछ हिस्सों का दोबारा हो सकेगा इस्तेमाल, बढ़ेगा वित्तीय लाभ

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Scrap yard proposal: The risk of pollution will be reduced by the junk of vehicles
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में हर साल लाखों वाहनों की मियाद खत्म हो जाती है। कबाड़ बन चुके इन वाहनों के लिए नूंह या राजस्थान के निकटवर्ती इलाके में स्क्रैप यार्ड बनाने का प्रस्ताव है। सालाना बढ़ते प्रदूूषण को रोकने के लिए पुराने डीजल, पेट्रोल और सीएनजी वाहनों की रिसाइक्लिंग की जाएगी। इससे पहले इनसे खतरनाक मेटलिक और नॉन मेटलिक उपकरणों को निकाला जाएगा। अधिकृत स्क्रैपर से उन्हें यार्ड तक पहुंचाया जाएगा, ताकि कम से कम पर्यावरण नुकसान के बाद इनके कुछ हिस्से को निस्तारण के बाद दोबारा इस्तेमाल लायक बनाया जा सके। वाहनों का कबाड़ न बढ़े, इसलिए सरकार ने पुराने वाहनों को बेचने पर कई तरह की वित्तीय लाभ देने की भी योजना बनाई है।

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एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के रीजनल प्लान-2041 में एंड ऑफ लाइफ व्हीकल्स-ईएलवी के तहत यह मसौदा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर (सिआम) वर्ष 2014-15 के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान देश में करीब दो करोड़, 23 लाख से अधिक वाहनों का निर्माण किया गया। इनमें करीब 80 फीसदी दुपहिया हैं। यानी, एनसीआर में भी हर साल लाखों की संख्या में वाहनों की मियाद खत्म होने के बाद ईएलवी की श्रेणी में आ जाते हैं।
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एक स्क्रैपिंग कंपनी के निदेशक के मुताबिक, हर साल पुराने हो चुके वाहनों को अक्सर कबाड़ में बेच दिया जाता है, लेकिन अभी भी काफी कम संख्या में अधिकृत स्क्रैपर हैं। नतीजतन, कबाड़ बनने के बाद वाहनों को उचित निस्तारण की प्रक्रिया अपनाए बगैर आगे बेच दिया जाता है। इससे पर्यावरण को नुकसान होने के साथ ही वाहन मालिकों को डी-रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी नहीं मिलता हैै। इससे उन्हें नए वाहनों की खरीद पर मिलने वाले फायदे भी नहीं मिल सकेंगे। अधिकृत स्क्रैप एजेंसी या कंपनी को बेचने पर दोनों फायदे होते हैं। निस्तारण के दौरान प्रदूषण और पर्यावरण से संबंधित सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रखी जाती है। इसके बाद कबाड़ वाहनों के अलग-अलग हिस्सों को बेच दिया जाता है, ताकि दोबारा इस्तेमाल के लिए कुछ उत्पादों को निकाला जा सके।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने नूंह या राजस्थान के नजदीकी हिस्से में स्क्रैप यार्ड की सुविधा विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तैयार होने से न केवल वाहनों को स्क्रैप से भी फायदे मिल सकेंगे बल्कि, इससे पर्यावरण प्रदूषण में भी काफी कमी होगी। 

गांवों में होगी रीसाइक्लिंग की सुविधा
प्रस्ताव में 50 हजार से अधिक आबादी वाले शहरों में निर्माण (सीएंडडी) कचरे के निस्तारण की सुविधा को जरूरी बताया गया है। इसके तहत रेजीडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और नगर निगमों के सहयोग से 2026 तक एनसीआर के सभी शहरों में लागू करने का प्रस्ताव है। इससे प्रदूषण का खतरा कम होगा तो दूसरी तरफ लोगों की सहूलियतें भी बढ़ेंगी। ठीक इसी तरह 2000 से अधिक आबादी वाले गांवों में 2026 तक मैटेरियल रिकवरी सुविधा मुहैया करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत खासतौर पर कागजों को इकट्ठा कर उनकी रिसाइक्लिंग की जाएगी।


कचरे से बनती है 80-90 किलोग्राम की ईंट
दिल्ली के मायापुरी स्थित एक कंपनी के यश अरोड़ा ने बताया कि पुराने वाहनों के सभी हिस्सों को सबसे पहले अलग-अलग किया जाता है। सबसे पहले बैटरी, एसी निकाला जाता है। इसके बाद पेट्रोल, डीजल इंजन निकालने के बाद इंजन ऑयल, ब्रेक ऑयल निकालने के बाद सीट, कवर और फिर टायर निकाल लिए जाते हैं। इसके बाद वाहन की स्टील बॉडी को प्रोसेस कर 15 गुना 15 की स्टील की ईंटें तैयार की जाती हैं। एक ईंट का वजन 85-90 किलोग्राम होता है। स्टील, कांच सहित अन्य उपकरणों को दोबारा इस्तेमाल के लिए रिसाइक्लिंग की जाती है।

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