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दिल्ली : छोटे बच्चों के लिए दो साल बाद बजी खुशियों की घंटी, पहले दिन कम रही हाजिरी
Tue, 15 Feb 2022 05:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 15 Feb 2022 05:11 AM IST
सार
दिल्ली में नर्सरी से आठवीं तक के स्कूल खुले, पहले दिन 20 से 40 फीसदी रही उपस्थिति।
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खुल गए स्कूल...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी में कोरोना महामारी की स्थिति नियंत्रण में आने के बाद सोमवार से नर्सरी से आठवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खुल गए। ज्यादातर स्कूलों ने अभी तीसरी से आठवीं तक के बच्चों को और कुछ ने नर्सरी कक्षा से आठवीं तक के बच्चों को बुलाया। विद्यार्थियों के आने से स्कूलों में एक बार फिर से रौनक देखने को मिली। हालांकि, पहले दिन बच्चों की उपस्थिति 20 से 40 फीसदी रही।
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कई बच्चे ऐसे रहे जिन्होंने करीब दो साल बाद पहली बार स्कूल में कदम रखा। स्कूल पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। कहीं उन्हें गुब्बारे दिए गए तो कहीं चॉकलेट, कई स्कूलों ने सेल्फी प्वाइंट भी बनाया। स्कूल के गेट पर ही बच्चों के हाथ सैनिटाइज कराए गए। अलग-अलग समूह में उनकी प्रार्थना सभाएं हुई। जितनी खुशी बच्चों को स्कूल पहुंचने की थी, उतनी ही शिक्षकों को उनसे मिलने की थी। इस दौरान स्कूलों में बच्चों ने काफी दिनों बाद खूब मौज-मस्ती की।
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दोस्तों के साथ ली सेल्फी : स्कूल में अभी चौथी व आठवीं कक्षा तक के बच्चों को बुलाया गया है। इन कक्षाओं में केवल 10-12 फीसदी तक ही बच्चे उपस्थित रहे। प्रार्थना सभा स्कूल प्रांगण में सुबह आठ बजे के बाद हुई। स्कूल प्रिंसिपल डॉ. सतबीर ने बताया कि कक्षाएं ऑफलाइन व ऑनलाइन दोनों मोड में हुई। सुबह 8.40 से कक्षाओं की शुरुआत हुई और दोपहर 1.40 बजे खत्म हुई। स्कूल में एक सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया, जहां बच्चों ने अपने दोस्तों के साथ सेल्फी ली। इस दौरान बच्चे लंबे समय बाद अपने दोस्तों व शिक्षकों से मिलकर काफी खुश नजर आए।
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छोटे बच्चों को कराई हल्की गतिविधियां : सुबह आठ बजे से बच्चे स्कूल पहुंचने लगे। सामाजिक दूरी का पालन करवाते हुए स्कूल में प्रवेश दिया गया। परिवहन सुविधा नहीं होने के कारण अभिभावक ही बच्चों को लाने ले जाने के लिए पहुंचे। छात्र-छात्राओं को सम-विषम के आधार पर बुलाया गया। स्कूल प्रिंसिपल वंदना कपूर ने बताया कि पहले दिन पहली, तीसरी और पांचवीं सातवीं कक्षा के बच्चे स्कूल पहुंचे। मंगलवार को दूसरी, चौथी, छठी व आठवीं कक्षा के बच्चे स्कूल आएंगे। स्कूल ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया। एक कक्षा में 10 से 15 बच्चों को ही बैठाया गया, जो बच्चे स्कूल में पहली बार आए उन्हें स्कूल का टूर कराया गया। बच्चों को स्कूल के माहौल मेें ढालने के लिए कई तरह की गतिविधियां आयोजित की।
बच्चे स्कूल में, शिक्षक कोविड ड्यूटी पर
सरकारी स्कूलों में भी प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे लगभग दो वर्ष के बाद स्कूल पहुंचे। वह अति उत्साहित नजर आए और संख्या भी सामान्य से ज्यादा रही, लेकिन हजारों शिक्षकों की कोरोना में ड्यूटी है। कक्षाओं में शिक्षक कम उपस्थित दिखाई दिए। राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव अजय वीर यादव ने बताया कि अभी भी हजारों शिक्षकों की कोरोना में ड्यूटी में है, जिससे स्कूल खोलने की कोई सार्थकता नजर नहीं आई। शिक्षकों के अभाव में कक्षाएं खाली रही।
बड़े बच्चों ने किया छोटों का स्वागत
स्कूल में गुब्बारे लगाए गए और कार्ड बोर्ड से रंग-बिरंगी आकृतियां लगाई गई। माध्यमिक कक्षाओं के बच्चे कोविड से बचाव का संदेश भी दिए गए। स्कूल की प्रिंसिपल नीता दुआ ने बताया कि बड़े छात्रों ने खास अंदाज में छोटे छात्रों का स्वागत किया। बच्चे लंबे समय बाद स्कूल आए हैं, इसलिए यही प्रयास रहा कि उन पर पढ़ाई का बोझ कम से कम हो और वे विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर बेहतर ढंग से सीख सकें।
नौनिहालों के स्वागत में लगाए गुब्बारे
चेहरे पर मास्क लगाए और दो बेंच के बीच दूरी, भोजन साझा न करने जैसे एहतियातों के साथ लंबे समय बाद सोमवार को नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) के स्कूलों में नर्सरी से आठवीं तक के छात्र-छात्राएं पहुंचे। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पहुंचे, जिनके स्वागत के लिए स्कूलों को गुब्बारे से सजाया गया। स्कूल में छोटे बच्चों का पहला दिन होने की वजह से उन्हें पढ़ाई के लिए जरूरी तौर तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान मंदिर मार्ग, काका नगर, सरोजिनी नगर सहित एनडीएमसी के सभी अटल आदर्श विद्यालय और नवयुग स्कूलों ही विद्यार्थियों की हौंसलाफजाई की। एनडीएमसी के उप शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि पहले दिन बच्चों की उपस्थिति करीब 50 फीसदी रही।