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साइबर खतरों व ऑनलाइन ठगी के बारे में छात्रों को जागरूक करने का निर्देश
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने स्कूलों से कहा है कि वह छात्रों और अभिभावकों को कोरोना महामारी के दौरान साइबर खतरों व ऑनलाइन ठगी के बारे में जागरूक करें। शिक्षा निदेशालय का कहना है कि इन खतरों के प्रति छात्रों को चेताने की जरूरत है। बच्चों और उनके माता-पिता को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के विषय में जागरूक करना अनिवार्य हैै। इस संबंध में निदेशालय ने स्कूलों को सर्कुलर जारी किया है।
सभी स्कूल प्रमुखों को लिखे पत्र में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण स्कूलों में पढ़ाई ऑनलाइन हो गई है। इंटरनेट का इस्तेमाल भी बढ़ा है। इंटरनेट पर स्पेस बढ़ने और इस पर नजर बनाए रखने के लिए डेटा सुरक्षा व बचाव अपर्याप्त है। इसलिए जरूरी है कि इंटरनेट से जुड़ने वाले हर व्यक्ति को इसके खतरों के विषय में पता हो। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों की मासूमियत को बनाए रखते हुए गैर हानिकारक तरीके से उनकी जिज्ञासा पूरी करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
निदेशालय ने सर्कुलर में कहा है कि इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से बच्चों के ऑनलाइन शोषण एवं बाल सेक्स से संबंधित गतिविधि पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि लॉकडाउन के दौरान बाल पोर्नोग्राफी की मांग बढ़ी है। ऐसे में बच्चों और उनके माता-पिता को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के विषय जागरूक करना अनिवार्य है।
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इसके साथ ही कोविड-19 के समय में सेफ ऑनलाइन लर्निंग के संबंध में जानकारी दी गई है। साथ ही साइबर बुलिंग के संबंध में भी बताया गया है कि इसे समझना क्यों आवश्यक है, इसे कैसे रोकें व मुकाबला करें। ऑनलाइन सुरक्षित कैसे रहें। इसके साथ ही इस संबंध में स्कूलों को सहयोग व हेल्पलाइन नंबर भी भेजे गए हैं।
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सभी स्कूल प्रमुखों को लिखे पत्र में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण स्कूलों में पढ़ाई ऑनलाइन हो गई है। इंटरनेट का इस्तेमाल भी बढ़ा है। इंटरनेट पर स्पेस बढ़ने और इस पर नजर बनाए रखने के लिए डेटा सुरक्षा व बचाव अपर्याप्त है। इसलिए जरूरी है कि इंटरनेट से जुड़ने वाले हर व्यक्ति को इसके खतरों के विषय में पता हो। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों की मासूमियत को बनाए रखते हुए गैर हानिकारक तरीके से उनकी जिज्ञासा पूरी करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
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निदेशालय ने सर्कुलर में कहा है कि इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) की ओर से बच्चों के ऑनलाइन शोषण एवं बाल सेक्स से संबंधित गतिविधि पर किए गए अध्ययन से पता चला है कि लॉकडाउन के दौरान बाल पोर्नोग्राफी की मांग बढ़ी है। ऐसे में बच्चों और उनके माता-पिता को इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल के विषय जागरूक करना अनिवार्य है।
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इसके साथ ही कोविड-19 के समय में सेफ ऑनलाइन लर्निंग के संबंध में जानकारी दी गई है। साथ ही साइबर बुलिंग के संबंध में भी बताया गया है कि इसे समझना क्यों आवश्यक है, इसे कैसे रोकें व मुकाबला करें। ऑनलाइन सुरक्षित कैसे रहें। इसके साथ ही इस संबंध में स्कूलों को सहयोग व हेल्पलाइन नंबर भी भेजे गए हैं।