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सारकोमा कैंसर की जागरूकता बढ़ाने के लिए आरजीसीआईआरसी ने शुरू किया अभियान

Fri, 31 Jul 2020 06:03 PM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 31 Jul 2020 06:03 PM IST
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RGCIRC launches a campaign to raise awareness of sarcoma cancer
डॉ. मनीष परूथी- मसकुलोस्केलेटल ओंकोलॉजी कंसल्टेंट - फोटो : अमर उजाला

सारकोमा ट्यूमर का पता न चलने या गलत सर्जरी से बढ़ जाता है अंग काटने का खतराः डॉ. मनीष परूथी

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सारकोमा हड्डियों और नरम ऊतकों में होने वाला एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है और इसकी जांच में किसी भी तरह की गलती से इलाज की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा रहता है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) के मसकुलोस्केलेटल ओंकोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. मनीष परूथी बताते हैं, "आमतौर पर हाथ-पैरों में सारकोमा ट्यूमर का पता नहीं चल पाता है या फिर गलत सर्जरी कर दी जाती है। ऐसे मामले में अंगों को भारी नुकसान पहुंचता है और अंग काटने का खतरा बढ़ जाता है। हाथ या पैर कटने से किसी भी व्यक्ति का पूरा जीवन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में सारकोमा को पहचानने, उसकी जांच करने एवं इलाज के उपलब्ध तरीकों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।"

कैंसर का शिकार हो रहे युवाओं की जिंदगी और उनके अंगों की सुरक्षा के लिए सारकोमा के बारे में जागरूकता फैलाना समय की जरूरत है। युवाओं में होने वाले कुल कैंसर में करीब 3 प्रतिशत मामले सारकोमा के होते हैं, वहीं बच्चों के मामले में 10-15 प्रतिशत मामले सारकोमा के रहते हैं। इस स्थिति को देखते हुए सारकोमा के शिकार लोगों की जिंदगी और उनके अंगों की हिफाजत के लिए इस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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कम उम्र में होता है सारकोमा, खराब दिनचर्या जैसे रिस्क फैक्टर नहीं होते

डॉ. परूथी ने बताया कि आरजीसीआईआरसी जैसे अस्पतालों में जहां सारकोमा के इलाज की व्यवस्था है, वहां देखने में आया है कि ज्यादातर मामलों की जानकारी बहुत देर से हो पाती है, जिससे कम उम्र में ही बच्चों को अपना हाथ या पैर गंवाना पड़ जाता है। सारकोमा कम उम्र में होता है और उस उम्र में तंबाकू खाना या खराब दिनचर्या जैसे रिस्क फैक्टर नहीं होते हैं। इसलिए जब इसका पता चलता है, तो ज्यादातर मरीज सदमे में आ जाते हैं। दिल्ली-एनसीआर में एक समस्या यह भी है कि यहां बहुत ज्यादा अस्पतालों में सारकोमा की जांच और इलाज की व्यवस्था नहीं है।
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हाथ-पैरों में लगातार दर्द और बढ़ती सूजन को अनदेखा न करें

बचाव के तरीकों पर चर्चा करते हुए डॉ. परूथी ने कहा कि इस मामले में बचाव की बहुत बड़ी भूमिका नहीं होती है, क्योंकि इससे संबंधित कोई रिस्क फैक्टर नहीं होता है। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान देने की बात है इसकी समय पर जांच। अगर पारंपरिक इलाज से कोई राहत नहीं मिल रही हो तो किसी को भी हाथ-पैरों में लगातार दर्द और बढ़ती सूजन को अनदेखा नहीं करना चाहिए।


डॉ. परूथी ने आगे बताया कि हर गांठ कैंसर नहीं होती है। गांठ किसी संक्रमण के कारण या सामान्य भी हो सकती है। सारकोमा एक दुर्लभ मामला है। ध्यान देने की बात यही है कि हाथ-पैर में लगातार दर्द और सूजन को अनदेखा नहीं करना चाहिए, विशेषरूप से युवाओं में, क्योंकि यह सारकोमा भी हो सकता है।

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