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रिटायर्ड जजों और खुफिया प्रमुखों ने कहा, किसान आंदोलन पर गुमराह कर रहे हैं पूर्व नौकरशाह

Tue, 09 Feb 2021 04:47 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 09 Feb 2021 04:47 PM IST
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Retired judges and intelligence chiefs said former bureaucrats are misleading farmers movement
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
खुफिया एजेंसियों के पूर्व प्रमुख और रिटायर्ड जजों ने सोमवार को दावा किया कि किसानों के आंदोलन को लेकर पूर्व नौकरशाहों का एक समूह अभी भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, जबकि आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बारे में कानूनी आश्वासन देने और कृषि कानूनों को 18 महीनों तक स्थगित करने का मध्यम मार्ग सुझाया है।
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देश की अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी, पूर्व सीबीआई निदेशक नागेश्वर राव और एसएसबी के पूर्व महानिदेशक एवं त्रिपुरा के पूर्व पुलिस प्रमुख बीएल वोहरा सहित 180 लोगों का यह बयान तब आया है, जब कुछ दिन पहले 75 सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने एक खुले पत्र में आरोप लगाया था कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के प्रति केंद्र का नजरिया बेहद टकराव वाला रहा है। इस बयान में कहा गया है कि कभी भी सरकार ने यह नहीं कहा कि असली और वास्तविक किसान देश विरोधी हैं। 
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यहां तक कि गणतंत्र दिवस पर किसानों के साथ बेहद संयमित तरीके से बर्ताव किया गया। फोरम ऑफ कंर्संड सिटीजंस ने पूर्व नौकरशाहों द्वारा खुला पत्र लिखे जाने को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा, भोलेभाले किसानों को सरकार के खिलाफ उकसाने के बजाय, व्यवस्था में बुनियादी खामी के बारे में विचार करना चाहिए, जिससे किसान अब तक गरीब रहा है। 
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फोरम ने राष्ट्र-विरोधी साजिशकर्ताओं और अवसरवादी नेताओं के चंगुल में फंसने की बजाय सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी को बातचीत के जरिये मुद्दे के समाधान के लिए काम करना चाहिए। इस बयान पर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अनिल देव सिंह, केरल के पूर्व मुख्य सचिव आनंद बोस, जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद, एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) दुष्यंत सिंह, एयर वाइस मार्शल (सेवानिवृत्त) आरपी मिश्रा ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
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