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जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी : हिंदू आर्मी के अध्यक्ष की जमानत याचिका पर जवाब तलब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारेबाजी के मामले में हिंदू आर्मी के अध्यक्ष सुशील तिवारी की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पुलिस को आरोपी की जमानत याचिका पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए मामले में सुनवाई 26 अक्तूबर तय की है।
सुशील तिवारी को 20 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। 23 सितंबर को सुशील तिवारी की जमानत याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि मामले की जांच अभी नाजुक मोड़ पर है। संभावना है कि आरोपी जांच के साथ गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
पुलिस ने भी सुशील की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि उपलब्ध वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी भड़काऊ नारेबाजी व भाषण दे रहा था। यह भी दावा किया कि आरोपी ने एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की थी।
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वहीं, आरोपी सुशील ने दावा किया था कि उक्त वीडियो को एडिट किया गया है और उसे फंसाने के लिए जानबूझकर ऐसा किया गया है। हाईकोर्ट के समक्ष आरोपी ने तर्क रखा कि मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और ट्रायल में देरी होगी। ऐसे में उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पुलिस को आरोपी की जमानत याचिका पर अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए मामले में सुनवाई 26 अक्तूबर तय की है।
सुशील तिवारी को 20 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था और तभी से वह न्यायिक हिरासत में है। 23 सितंबर को सुशील तिवारी की जमानत याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि मामले की जांच अभी नाजुक मोड़ पर है। संभावना है कि आरोपी जांच के साथ गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
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पुलिस ने भी सुशील की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि उपलब्ध वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी भड़काऊ नारेबाजी व भाषण दे रहा था। यह भी दावा किया कि आरोपी ने एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की थी।
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वहीं, आरोपी सुशील ने दावा किया था कि उक्त वीडियो को एडिट किया गया है और उसे फंसाने के लिए जानबूझकर ऐसा किया गया है। हाईकोर्ट के समक्ष आरोपी ने तर्क रखा कि मामले में अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और ट्रायल में देरी होगी। ऐसे में उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।