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धोखाधड़ी के मामले में रेलिगेयर के पूर्व सीएमडी की जमानत खारिज
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नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने रेलिगेयर इंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुनील गोधवानी को धन के कथित दुरुपयोग, आरोपों की गंभीरता, ऋण राशि और लेनदेन में उनकी भूमिका को ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध को गंभीर माना जाता है। खासकर जब जनता के पैसे शामिल हों।
संस्थाओं ने कथित तौर पर आरएफएल को 2,397 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। 2019 में पुलिस ने गोधवानी, मालविंदर मोहन सिंह, शिविंदर मोहन सिंह व अन्य के खिलाफ आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि की शिकायत पर कंपनी के पैसे को कथित रूप से डायवर्ट करने व अन्य कंपनियों में निवेश करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की। आरईएल को पहले सिंह बंधुओं ने प्रमोट किया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने आरोपियों की कथित भूमिका व अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी सुनील गोधवानी की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों पर दो हजार करोड़ रुपये की भारी ऋण राशि के अवैध हस्तांतरण का आरोप है। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में शामिल नकद राशि सार्वजनिक धन/ निवेशक धन है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपी को हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। वह आरईएल कंपनी में एक महत्वपूर्ण शीर्ष पद पर काबिज था। ऐसी परिस्थितियों में आरोपी के न्याय से भागने और गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। जांच अधिकारी ने जमानत याचिका के जवाब में आरोप लगाया कि गोधवानी के निर्देश पर प्रमोटर समूह को ज्ञात कंपनियों को बिना किसी उचित परिश्रम और उचित दस्तावेज के अवैध रूप से ऋण दिया गया था। आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोपी ने इस आधार पर जमानत मांगी कि वह एक वरिष्ठ नागरिक है, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए जेल में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आरोप है कि गोधवानी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर जनता के रुपये का इस्तेमाल किया। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।
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संस्थाओं ने कथित तौर पर आरएफएल को 2,397 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। 2019 में पुलिस ने गोधवानी, मालविंदर मोहन सिंह, शिविंदर मोहन सिंह व अन्य के खिलाफ आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि की शिकायत पर कंपनी के पैसे को कथित रूप से डायवर्ट करने व अन्य कंपनियों में निवेश करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की। आरईएल को पहले सिंह बंधुओं ने प्रमोट किया था।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने आरोपियों की कथित भूमिका व अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरोपी सुनील गोधवानी की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपियों पर दो हजार करोड़ रुपये की भारी ऋण राशि के अवैध हस्तांतरण का आरोप है। न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में शामिल नकद राशि सार्वजनिक धन/ निवेशक धन है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद आरोपी को हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। वह आरईएल कंपनी में एक महत्वपूर्ण शीर्ष पद पर काबिज था। ऐसी परिस्थितियों में आरोपी के न्याय से भागने और गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। जांच अधिकारी ने जमानत याचिका के जवाब में आरोप लगाया कि गोधवानी के निर्देश पर प्रमोटर समूह को ज्ञात कंपनियों को बिना किसी उचित परिश्रम और उचित दस्तावेज के अवैध रूप से ऋण दिया गया था। आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोपी ने इस आधार पर जमानत मांगी कि वह एक वरिष्ठ नागरिक है, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। महामारी की तीसरी लहर को देखते हुए जेल में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आरोप है कि गोधवानी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर जनता के रुपये का इस्तेमाल किया। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।
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