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दिल्ली में बिजली चोरी में रिकार्ड कमी: 19 साल पहले होती थी 55 प्रतिशत बिजली की चोरी, अब घटकर 7.5 प्रतिशत पर पहुंची

Wed, 04 Aug 2021 12:25 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 04 Aug 2021 12:25 AM IST
सार

देश की राजधानी दिल्ली में 7.5 प्रतिशत बिजली चोरी के मामले कम हो गए हैं। चोरी के मामले 55 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत पर पहुंच गए हैं। जम्मू में अभी भी सबसे अधिक बिजली चोरी होती है। यूपी, राजस्थान, मध्यप्रदेश में भी बिजली चोरी हो रही है। 
 

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Record reduction in electricity theft at Delhi there used to be 55 percent power theft befro 19 years  now it has come down to 7.5 percent
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली में बिजली चोरी के मामलों में काफी गिरावट आई है। चोरी के मामले 55 प्रतिशत से घटकर 7.5 प्रतिशत तक ही रह गई है। इस आधार पर बिजली कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि 1.2 लाख करोड़ रुपये की बचत की गई है। 
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दिल्ली विधुत वितरण कंपनी ने दावा किया है कि देश की राजधानी दिल्ली में 19 साल पहले 55 प्रतिशत से अधिक बिजली चोरी होती थी। तकनीकी भाषा में इसे एटीएंडसी लॉस बताया है। जिसमें करीब 48 प्रतिशत की कमी आंकी गई है। 
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अब यह एंटीएंड सी लॉस घटकर करीब 7.5 प्रतिशत पर आ गया है। दिल्ली में कई ऐसे इलाके थे जिसमें पूर्वी दिल्ली व मध्य दिल्ली का इलाका है वहां 63 प्रतिशत बिजली की चोरी होती थी। 
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पावर सेक्टर के अधिकारियों के अनुसार एटीएंडसी लॉस में भारी कमी लाकर दिल्ली देश के न्यूनतम एटीएंडसी लॉस वाले राज्यों में शामिल हो गई है। यह भी कहा है कि एटीएंडसी लॉस में कमी करके व बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करके बिजली चोरी बचाई गई है। 

किस राज्य में कितना एंटीएंडसी लॉस (बिजली की चोरी)

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के उदय वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में एटीएंडसी लॉस 67.7 प्रतिशत है तो छत्तीसगढ़ में 40.45 प्रतिशत। इसी तरह मध्य प्रदेश में 26.31 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 24.89 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 20.76 प्रतिशत, राजस्थान में 20.47 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 19.39 प्रतिशत, पंजाब में 18.99 प्रतिशत, कर्णाटक में 13.8 प्रतिशत और तमिलनाडु में 12.46 प्रतिशत है। 

एटीएंडसी लॉस क्या है
एटीएंडसी लॉस का मतलब मुख्यत: बिजली की चोरी है। तकनीकी भाषा में इसे कुल तकनीकी व व्यायसायिक नुकसान कहते हैं। दिल्ली डिस्कॉम्स ने एटीएंडसी लॉस में कमी लाकर दिल्लीवालों के 95,000 करोड़ रूपये बचाए। क्योंकि एटीएंडसी लॉस में एक प्रतिशत की कमी का मतलब है बिजली उपभोक्ताओं के करोड़ों रूपये की बचत। एटीएंडसी लॉस में एक प्रतिशत की कमी का सीधा अर्थ है लगभग 250 करोड़ रूपये की बचत आंकी जाती है। दिल्ली डिस्कॉम्स ने बिजली वितरण के इंफ्रास्ट्रक्चर में 19,000 करोड़ रूपये का निवेश किया है। 

दिल्ली में बिजली की मांग में हुई बढ़ोत्तरी
दिल्ली में बिजली की मांग में 250 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2002 की बात करें तो बिजली की पीक डिमांड 2879 मेगावॉट थी। अब यह बढ़कर 7409 मेगावॉट तक पहुंच गई है। दिल्ली में बिजली की दरों में 2014 से बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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