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Purple Epilepsy Day : जागरूकता से कम हो सकती है मिर्गी में जटिलता, गलत घारणाओं को ध्वस्त करने की दरकार
Sun, 26 Mar 2023 02:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 26 Mar 2023 02:26 AM IST
सार
इस रोग को लेकर देश में कई गलत धारणाएं हैं। यह रोग कई प्रकार का होता है और उसी के अनुसार इसके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। इसी कारण लोग इसके बारे में भ्रमित रहते हैं और आसानी से परामर्श, जांच और इलाज के लिए चिकित्सक के पास नहीं जाते।
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Epilepsy Day
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विस्तार
मिर्गी को लेकर जागरूकता अभियान चलाने व आम लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर भ्रम को दूर करने से यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। इसी उद्देश्य को लेकर हर साल 26 मार्च को दुनिया भर में 100 से अधिक देशों में पर्पल एपिलेप्सी डे मनाया जाता है।
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इस रोग को लेकर देश में कई गलत धारणाएं हैं। यह रोग कई प्रकार का होता है और उसी के अनुसार इसके लक्षण भी अलग-अलग होते हैं। इसी कारण लोग इसके बारे में भ्रमित रहते हैं और आसानी से परामर्श, जांच और इलाज के लिए चिकित्सक के पास नहीं जाते।
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दिल्ली नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद) डॉक्टर आरपी पाराशर का कहना है कि टोनिक एपिलेप्सी में शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जबकि एटोनिक एपिलेप्सी में शरीर की मांसपेशियां शिथिल रहती हैं।
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मायोक्लोनिक एपिलेप्सी में कभी कभार शरीर के किसी अंग में झटके लगते हैं जबकि क्लोनिक एपिलेप्सी में शरीर के विभिन्न अंगों में लंबे समय तक झटके लगते रहते हैं। आयुर्वेद में अपस्मार के नाम से वर्णित यह रोग दोष की प्रधानता के अनुसार वातज, पित्तज, कफज और सन्निपातज चार प्रकार का माना गया है।
उन्होंने कहा कि तंत्रिका तंत्र का यह मन के दोषों-तामसिक और राजसिक में असंतुलन के कारण होता है। लंबे समय तक चिंता, अकेलापन, उदासी, गुस्सा या डर जैसी स्थितियों के चलते यह रोग उत्पन्न होता है और बढ़ता भी है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका उपचार है।
यह हैं लक्षण
- दौरे पड़ना
- मुंह से झाग निकलना
- याददाश्त में कमी
- मानसिक और बौद्धिक क्षमता में कमी