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शाहीन बागः प्रदर्शनकारियों को सता रहा है पुलिस बल का खौफ, फरवरी के पहले हफ्ते में कार्रवाई का अंदेशा

Fri, 24 Jan 2020 12:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 24 Jan 2020 12:39 PM IST
सार

  • पुलिस कर सकती है कार्रवाई
  • केंद्र के रुख से बढ़ रही है चिंता
  • भाजपा नेताओं के बयान दे रहे हैं टेंशन

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Protesters in Shaheen Bagh fear that police may take action in the first week of February
शाहीन बाग में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहीन बाग में महिलाओं का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने लगा है। लेकिन प्रदर्शन में शामिल वॉलंटियर्स को एक खौफ अंदर से परेशान कर रहा है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ वॉलंटियर्स का कहना है कि दिल्ली पुलिस के सहारे सरकार कभी भी सड़क बंद होने से जनता को हो रही परेशानी का हवाला देकर प्रदर्शन स्थल से उठा सकती है। बताते हैं इसका जाल बुना जा रहा है और फरवरी के पहले सप्ताह में इसे अंजाम दिया जा सकता है।
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एक वॉलंटियर ने बताया कि दिल्ली पुलिस की भाषा बदल रही है, जबकि प्रदर्शन पूरी तरह से सहयोगात्मक, अहिंसात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चेा शाामिल हैं। एक अन्य वॉलंटियर का कहना है कि हम तो केवल इतनी सी मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या केंद्र सरकार का वरिष्ठ जिम्मेदार मंत्री यहां आकर भरोसा दिलाए और कह दे कि भारत में रहने वाले सभी भारतीय हैं और नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है।

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नेताओं के बयान बढ़ा रहे खौफ

वॉलंटियर्स का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से भाजपा नेताओं के सुर बदल रहे हैं। जिसमें हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ का दिया वह बयान जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाएं और बच्चे चौराहे पर बैठे और पुरुष रजाई में। साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करेगी। वहीं दिल्ली से भाजपा के उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने बयान दिया था कि आठ फरवरी को सड़कों पर भारत-पाकिस्तान के बीच मैच होगा, जिसे भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने समर्थन भी दिया। वहीं दिल्ली के चुनाव में प्रचार अभियान में हिन्दू और मुसलमान में बंटवारा कर वोट ध्रुवीकरण के जरिए नफरत को हवा देने की कोशिशें की जा रही हैं।

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वॉलंटियर्स का यह है तर्क

  • डीयू की छात्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री हमारे भी हैं। वह पूरे देश के हैं। हम परेशान हैं और वह नहीं आए, न किसी जिम्मेदार को भेजा। हम 15 दिसंबर से बैठे हैं, वह कम से कम हमारी पीड़ा तो सुन लेते? साफ है, हमें अपना नहीं मानते।
  • एक प्ले स्कूल की टीचर का कहना है कि हमने अपनी आवाज उठाई है। आवाज उठाना, सरकार से परेशानी बताना, देश का नागरिक होने के नाते यह अधिकार संविधान ने दिया है। सरकार हमें सुनती क्यों नहीं? उनका कहना है क्योंकि सरकार जो चाह रही है, वह यहां आने से बेकार हो जाएगा।
  • गाजियाबाद के एक इंजीनियरिंग कालेज की पास आउट छात्रा का कहना है कि सरकार देश को दिशा नहीं दे पा रही है। बेरोजगारी चरम पर है, अर्थव्यवस्था की हालत खराब है, उद्योग, उत्पादन क्षेत्र सरकारी नीति में गड़बड़ हो रहे हैं। आए दिन राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी नकारात्मक रिपोर्ट दे रही हैं। बैंक हो या शिक्षा का क्षेत्र सब तंग हैं और सरकार को तीन तलाक का कानून, सीएए, एनआरसी, एनपीआर के बहाने लोगों को लड़ाने की पड़ी है।
  • असलम, फराज, जाकिर जैसै वॉलंटियर्स के मुताबिक सरकार का ध्यान फूट डालो, राज करो पर है। इसलिए ऐसे प्रावधान के बहाने वह जिम्मेदारी छिपाने और लोगों का ध्यान भटकाने में लगी है। 

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कहा सीएए नागरिकता देगा

वॉलंटियर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री एचएम शाह के स्पष्टीकरण कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। किसी की नागरिकता नहीं जाने वाली। वॉलंटियर का कहना है कि भरोसा करें? वह हमारे बीच जानबूझकर नहीं आ रहे हैं। सीएए में मुस्लिमों को बाहर रखा और हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन सब शामिल हैं। यहां तमिल समेत तमाम हिन्दू हैं जो पीड़ित हैं और भारत आना चाहते हैं।

क्या विदेशी हो....क्यों डर रहे हो?

वॉलंटियर का कहना है कि असम में एनआरसी हुआ। असमिया भी विरोध कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिजन, वायुसेना, सेना के पूर्व अधिकारी, गैलेंट्री अवार्ड पाए या राज्य सरकार से सम्मानित लोग नागरिक पंजीकरण रजिस्टर से बाहर हैं। मुसलमानों में शिक्षा का स्तर, सामाजिक विकास अपेक्षाकृत कम है। मजदूर, कामगार, छोटे पेशे के लोग ज्यादा हैं। लोगों के पास अपना और पीढ़ियों के दस्तावेज का हिसाब-किताब नहीं है। बुलंदशहर से आई 50 साल की एक महिला का कहना है कि उसके पास कागज नहीं है, वह अंगूठाछाप है। नागरिकता के दस्तावेज कहां से लाएगी।

क्या हो रोडमैप?

वॉलंटियर्स का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक यहां रहना है। वॉलंटियर सावधान हैं। स्कूल बस, एंबुलेंस और अनिवार्य सेवाओं को रास्ता देने में सहयोग कर रहे हैं। इनका आरोप है कि पुलिस ही एंबुलेंस आदि को रास्ता देने की बजाय उन्हें वापस कर दे रही है। वॉलंटियर की कोशिश बिना किसी से टकराए, शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक, सहयोगात्मक, प्रदर्शन जारी रखने की है। वह इसे अब सत्याग्रह भी बताने लगे हैं।

 

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