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वर्तमान में 5947 पुलिसकर्मी संक्रमित, वर्तमान में नौ अस्पताल में भर्ती
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नई दिल्ली। कोविड ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को पुलिस स्टेशनों में बैरक और रिटायरिंग रूम की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है। दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को यह जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था इस कारण की गई है ताकि वे संक्रमण को अपने घरों तक न ले जाएं और परिवार के सदस्यों को संक्रमित न करें।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि वहीं करीब 80 हजार पुलिसकर्मियों से 14 हजार पुलिसकर्मी पहली व दूसरी लहर में संक्रमित हो चुके हैै। वर्तमान में 5947 संक्रमित अधिकारियों में से केवल नौ अस्पताल में भर्ती हैं। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार कर पुलिसकर्मियों के अलग से वैकल्पिक आवास प्रदान करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस बल सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना जानता है। जब तक बैरकों में संक्रमण के प्रकोप को दिखाने के लिए चिकित्सा डाटा नहीं है। तब तक पुलिस को अपने कर्मचारियों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का निर्देश देने की जरूरत नहीं है।
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अदालत ने कहा कि पुलिस कर्मियों को बैरक व रिटायरिंग रूम के रूप में जो साजो-सामान उपलब्ध है, वह उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने हाल ही में चिकित्सकों व अन्य मेडिकल स्टाफ को अलग से रहने की व्यवस्था करने के मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस को भी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
दरअसल अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी कोविड अस्पताल, ऑॅक्सीजन रिफिलर सेंटर, श्मशान घाट इत्यादि स्थानों पर लगी हुई है। ऐसे में वे भी संक्रमित हो सकते हैं और उनके घरों में संक्रमण फैल सकता है। इसी दौरान 25 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है।
डीसीपी राजेश देव ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि करीब 80 हजार पुलिसकर्मियों से 14 हजार पुलिसकर्मी पहली व दूसरी लहर में संक्रमित हो चुके हैैं। वर्तमान में 5947 संक्रमित अधिकारियों में से केवल नौ अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा हम अपनी फोर्स का बहुत लगन से ध्यान रख रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया कि 90 प्रतिशत पुलिस कर्मियों ने कोविड -19 वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं। पुलिस कर्मियों और उनके परिजनों के लिए दो कोविड -19 स्वास्थ्य सेंटर हैं और उनके लिए एंबुलेंस की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणु गोपाल ने बताया कि पुलिसकर्मी शवों के दाह संस्कार में भी सहयोग कर रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस ने कहा कि वहीं करीब 80 हजार पुलिसकर्मियों से 14 हजार पुलिसकर्मी पहली व दूसरी लहर में संक्रमित हो चुके हैै। वर्तमान में 5947 संक्रमित अधिकारियों में से केवल नौ अस्पताल में भर्ती हैं। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार कर पुलिसकर्मियों के अलग से वैकल्पिक आवास प्रदान करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस बल सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने और कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना जानता है। जब तक बैरकों में संक्रमण के प्रकोप को दिखाने के लिए चिकित्सा डाटा नहीं है। तब तक पुलिस को अपने कर्मचारियों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का निर्देश देने की जरूरत नहीं है।
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अदालत ने कहा कि पुलिस कर्मियों को बैरक व रिटायरिंग रूम के रूप में जो साजो-सामान उपलब्ध है, वह उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने हाल ही में चिकित्सकों व अन्य मेडिकल स्टाफ को अलग से रहने की व्यवस्था करने के मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस को भी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
दरअसल अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी भी कोविड अस्पताल, ऑॅक्सीजन रिफिलर सेंटर, श्मशान घाट इत्यादि स्थानों पर लगी हुई है। ऐसे में वे भी संक्रमित हो सकते हैं और उनके घरों में संक्रमण फैल सकता है। इसी दौरान 25 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है।
डीसीपी राजेश देव ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि करीब 80 हजार पुलिसकर्मियों से 14 हजार पुलिसकर्मी पहली व दूसरी लहर में संक्रमित हो चुके हैैं। वर्तमान में 5947 संक्रमित अधिकारियों में से केवल नौ अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा हम अपनी फोर्स का बहुत लगन से ध्यान रख रहे हैं।
दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया कि 90 प्रतिशत पुलिस कर्मियों ने कोविड -19 वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं। पुलिस कर्मियों और उनके परिजनों के लिए दो कोविड -19 स्वास्थ्य सेंटर हैं और उनके लिए एंबुलेंस की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन वेणु गोपाल ने बताया कि पुलिसकर्मी शवों के दाह संस्कार में भी सहयोग कर रहे हैं।