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Hindi News ›   Delhi ›   Plea against blacklisting of YouTube vlogger denied early hearing ban expires on February 23

दिल्ली: यू-टयूब व्लॉगर को ब्लैक लिस्ट में डालने के खिलाफ याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार, 23 फरवरी को हो रही प्रतिबंध की अवधि समाप्त

Mon, 17 Jan 2022 08:52 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Mon, 17 Jan 2022 08:52 PM IST
सार

न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा कि वह यूट्यूबर की पत्नी द्वारा याचिका में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर सुनवाई करेंगे, लेकिन पहले से तय तारीख से पहले याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती।

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Plea against blacklisting of YouTube vlogger denied early hearing ban expires on February 23
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

उच्च न्यायालय ने सोमवार को कार्ल रॉक के नाम से मशहूर यूट्यूब व्लॉगर कार्ल एडवर्ड राइस को ब्लैक लिस्ट सूची में डालने से संबंधित याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा प्रतिबंध की अवधि 23 फरवरी को समाप्त हो रही है और फिर केंद्र उस पर नए सिरे से फैसला करेगा।

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न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा कि वह यूट्यूबर की पत्नी द्वारा याचिका में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर सुनवाई करेंगे, लेकिन पहले से तय तारीख से पहले याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा केंद्र द्वारा 23 फरवरी के बाद एक नया फैसला करने के बाद उस बिंदु पर विचार किया जाएगा। याचिका पर पहले से ही सुनवाई 21 मार्च तय है।
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बिना किसी नोटिस के काली सूची में डाल दिया
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता फुजैल अहमद अय्यूबी ने अदालत के रवैये को देख जल्द सुनवाई की अर्जी वापस ले ली। इससे पूर्व उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के पति को बिना किसी नोटिस के काली सूची में डाल दिया गया। केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि याचिकाकर्ता के पति का वीजा रद्द कर दिया गया और काली सूची में डालने का आदेश जारी किया गया, क्योंकि उसने प्रतिबंधित क्षेत्रों का दौरा करने, व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करने और अपनी वीजा शर्तों के उल्लंघन में पत्रकार गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास किया था।
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पति को प्रवेश वीजा देने से इनकार
याचिकाकर्ता मनीषा मलिक ने अपने पति को प्रवेश वीजा देने से इनकार करने के केंद्र सरकार के फैसले को मनमाना और अनुचित होने के आधार पर चुनौती दी है। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया था कि उसके मुवक्किल या उसके पति को वीजा से इनकार करने पर सरकार से कोई शब्द नहीं मिला और अक्तूबर 2020 में भारत से बाहर निकलते समय वीजा को बिना किसी पूर्वाग्रह के रद्द कर दिया गया।


अनुच्छेद 21 सहित संविधान के तहत अधिकारों का उल्लंघन 
मलिक ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके पति के पास न्यूजीलैंड और नीदरलैंड की दोहरी राष्ट्रीयता है और उन्होंने यहां की सुंदरता और यहां पर्यटन को बढ़ावा देने में योगदान देने के लिए भारत के अधिकांश हिस्सों का दौरा किया। याचिका में कहा गया है कि केंद्र की कार्रवाई अनुच्छेद 21 सहित संविधान के तहत अधिकारों का उल्लंघन करती है। याचिका में कहा गया है कि 2019 में उनकी शादी के बाद से दंपती दिल्ली में रह रहे हैं और अक्तूबर 2020 से न्यूजीलैंड से भारत नहीं लौट पाए हैं।

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