ट्रेनों में यात्रा करने से परहेज कर रहे हैं यात्री, पूर्वांचल की ओर जाने वाली गाड़ियों में 90 फीसदी सीटें खाली
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कोरोना काल में लोगों ने ट्रेन से भी दूरी बना ली है। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लोग सफर करने में परहेज कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए ढील तो दी जा रही है, लेकिन देश की लाइफ लाइन मानी जाने वाली ट्रेन जो पहले यात्रियों से खचाखच भरी रहती थीं, उनमें अब आसानी से सीट मिल रही हैं। रेल मंत्रालय ने 12 सितंबर से 40 जोड़ी और स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की है। इसके लिए बृहस्पतिवार से टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी गई। वहीं, पूर्वांचल दिशा की ओर जाने वाली ट्रेनों की 90 प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह गई।
कोरोना काल के पहले वंदे भारत ट्रेन से यात्रा करने वालों का जोश सिर चढ़कर बोल रहा था, परंतु अनलॉक-4 में इस ट्रेन से यात्रा करने को लोग तैयार नहीं हैं। शनिवार से वंदे भारत ट्रेन एक बार फिर पटरी पर उतर रही है। इसी तरह नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी भी रविवार से चलने लगेगी। दोनों ट्रेनों के लिए बृहस्पतिवार को टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी गई है।
हैरत की बात है कि इन दोनों ट्रेनों में 95 प्रतिशत से अधिक सीट खाली हैं। दिल्ली से वाराणसी के लिए शनिवार को चलने वाली वंदे भारत ट्रेन में 890 सीट में 829 सीट खाली हैं। इसी तरह लखनऊ शताब्दी ट्रेन में महज 50 सीट ही भरी हैं। इसमें 975 सीट खाली हैं। एसी प्रथम श्रेणी का तो और भी बुरा हाल है। महज दो सीट ही भरी हैं।
हालांकि, ट्रेन संख्या 2562 स्वतंत्रता सेनानी के स्लीपर कोच में बृहस्पतिवार को बुकिंग हुई। इसमें आरएससी टिकट उपलब्ध है। पहले से ट्रैक पर उतरने वाली स्पेशल ट्रेन में भी भीड़ नहीं है। एक सप्ताह बाद का आसानी से टिकट मिल रहा है। नई दिल्ली-लखनऊ रूट पर चलने वाली सप्तक्रांति ट्रेन में महज 11 वेटिंग हैं। श्रमजीवी में 10 वेटिंग, लखनऊ मेल में खाली सीट उपलब्ध हैं।
गोरखपुर-दिल्ली-गोरखपुर के बीच चलने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस में 17 सितंबर तक गोरखधाम में 3-12 वेटिंग टिकट मिल रहा है तो सत्याग्रह एक्सप्रेस में आरएससी। हमसफर ट्रेन में भी सीट उपलब्ध हैं। सुहेलदेव, लखनऊ मेल समेत अन्य ट्रेनों में भी बहुत अधिक वेटिंग सूची नहीं है। नई दिल्ली-पटना व पूर्वांचल दिशा में चलने वाली ब्रह्मपुत्र मेल, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ स्पेशल, श्रमजीवी जैसी ट्रेन में भी प्रतीक्षा सूची ज्यादा नहीं हैं।