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Delhi News: पैराथायराइड की सर्जरी गर्दन पर बिना चीर-फाड़ के हुई संभव
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-एम्स ने रोबोट की मदद से 30 से अधिक सर्जरी को दिया अंजाम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पैराथायराइड एडेनोमा की बीमारी से जूझने वाले मरीजों की सर्जरी के लिए अब गर्दन पर चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एम्स में रोबोट की मदद से सर्जरी को अंजाम दिया जा रहा है। बीते छह महीने में करीब 30 से ज्यादा सर्जरी की गई है, जिसके काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग के प्रो. सुनील चुम्बर के नेतृत्व में यह सर्जरी की गई है। विभाग में अतिरिक्त प्रो. डॉ. कमल कटारिया ने बताया, पारंपरिक ओपन सर्जरी में गर्दन में चीरा लगाने की जरूरत पड़ती है। इसके निशान गर्दन पर बने रहते हैं। लेकिन रोबोटिक तरीके से सर्जरी करने में चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं होती है। अंडरआर्म के रास्ते और शरीर के दूसरे हिस्सों से भी सर्जरी को अंजाम दिया जा सकता है। जिसके निशान दिखाई नहीं देते हैं।
सटीक स्थान पर होती है सर्जरी
रोबोटिक सर्जरी में थ्रीडी तस्वीरों के मिलने से सटीक स्थान पर सर्जरी होती है। सर्जरी के दौरान किसी दूसरे उतक को नुकसान नहीं पहुंचता है। मरीज को दर्द कम और जल्द से ठीक होने लगता है। सर्जरी में जटिलताएं कम होती हैं। उन्होंने बताया कि विभाग एंडोस्कोपिक तरीकों से भी थायराइड सर्जरी कर रहा है। एम्स दिल्ली का एकमात्र अस्पताल है जो मरीजों को निशुल्क एंडोक्राइन सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
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पैराथायराइड हार्मोन बढ़ने पर यह होती है दिक्कत
पैराथायराइड ग्लैंड आमतौर पर थायराइड ग्लैंड के पीछे होता है। यह चार छोटे और अंडाकार आकार के ग्लैंड होते हैं। शरीर में पैराथायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने पर किडनी में स्टोन, हड्डियों का कमजोर होना, पेट में दर्द, कब्ज, पेट का अल्सर, पैंक्रियाटाइटिस, थकावट, अवसाद, उलझन, व्यक्ति की सोचने की क्षमता का कम होना और मनोविकार की समस्या होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पैराथायराइड एडेनोमा की बीमारी से जूझने वाले मरीजों की सर्जरी के लिए अब गर्दन पर चीर-फाड़ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एम्स में रोबोट की मदद से सर्जरी को अंजाम दिया जा रहा है। बीते छह महीने में करीब 30 से ज्यादा सर्जरी की गई है, जिसके काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
एम्स के सर्जिकल डिसिप्लिन विभाग के प्रो. सुनील चुम्बर के नेतृत्व में यह सर्जरी की गई है। विभाग में अतिरिक्त प्रो. डॉ. कमल कटारिया ने बताया, पारंपरिक ओपन सर्जरी में गर्दन में चीरा लगाने की जरूरत पड़ती है। इसके निशान गर्दन पर बने रहते हैं। लेकिन रोबोटिक तरीके से सर्जरी करने में चीर-फाड़ की आवश्यकता नहीं होती है। अंडरआर्म के रास्ते और शरीर के दूसरे हिस्सों से भी सर्जरी को अंजाम दिया जा सकता है। जिसके निशान दिखाई नहीं देते हैं।
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सटीक स्थान पर होती है सर्जरी
रोबोटिक सर्जरी में थ्रीडी तस्वीरों के मिलने से सटीक स्थान पर सर्जरी होती है। सर्जरी के दौरान किसी दूसरे उतक को नुकसान नहीं पहुंचता है। मरीज को दर्द कम और जल्द से ठीक होने लगता है। सर्जरी में जटिलताएं कम होती हैं। उन्होंने बताया कि विभाग एंडोस्कोपिक तरीकों से भी थायराइड सर्जरी कर रहा है। एम्स दिल्ली का एकमात्र अस्पताल है जो मरीजों को निशुल्क एंडोक्राइन सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
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पैराथायराइड हार्मोन बढ़ने पर यह होती है दिक्कत
पैराथायराइड ग्लैंड आमतौर पर थायराइड ग्लैंड के पीछे होता है। यह चार छोटे और अंडाकार आकार के ग्लैंड होते हैं। शरीर में पैराथायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ने पर किडनी में स्टोन, हड्डियों का कमजोर होना, पेट में दर्द, कब्ज, पेट का अल्सर, पैंक्रियाटाइटिस, थकावट, अवसाद, उलझन, व्यक्ति की सोचने की क्षमता का कम होना और मनोविकार की समस्या होती है।