अदालतों के लिए चतुर्थ श्रेणी की परीक्षा लीक मामलाः कई राज्यों में बड़े पैमाने पर लीक हुआ है पेपर
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दिल्ली की अदालतों में तैनात के लिए गत रविवार को आयोजित हुई चुतर्थ श्रेणी की परीक्षा का पेपर कई राज्यों में बड़े पैमाने पर लीक हुआ है। दिल्ली पुलिस को शुरूआती जांच में इस तरह के संकेत मिले हैं। दिल्ली पुलिस ने पूरी दिल्ली में 14 एफआईआर दर्जकर कुल 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अपराध शाखा में कुल तीन एफआईआर दर्ज की गई है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से ज्यादा ब्लूटूथ के जरिए नकल कर रहे थे। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एक अंतरराज्यीय गिरोह ने इस परीक्षा के पेपर को लीक किया है।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता कार्यालय के अनुसार दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में तैनाती के लिए चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती का आयोजन 28 फरवरी को किया गया था। इस परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी गई थी। इसके लिए दिल्ली में कुल 41 केन्द्र बनाए गए थे। इस परीक्षा की निगरानी के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारियों व जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों की टीम गठित की गई। इस पेपर के लीक होने की सबसे पहले सूचना अपराध शाखा की सेक्टर-18, रोहिणी स्थित एसीपी उदयवीर विधुड़ की एसओएस को मिली थी। इस टीम ने सेक्टर-16रोहिणी स्थित माउंट आबू और सेक्टर-24 स्थित इंडिया कंवेंट स्कूल में छापेमारी की। अपराध ने इन स्कूलों से कुल 17 परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया।
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त(अपराध शाखा) प्रवीर रंजन ने बताया गिरफ्तार आरोपियों में 16 ब्लू टूथ के जरिए नकल कर रहे थे। ये सॉल्वर को पेपर व सवाल भेज देते और सॉल्वर इनको जवाब दे देता था। एक आरोपी बरवाला, हिसार हरियाणा निवासी रवि सोनी की जगह गांव बडसकरी खुर्द कैथल निवासी गुरमेल सिंह परीक्षा देते हुए पकड़ा गया। सभी आरोपियों के पास से सिम कार्ड, मोबइल व ब्लूटूथ आदि सामान बरामद किया गया है
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीन केस अपराध शाखा में व 11 केस जिला पुलिस ने दर्ज किए हैं। विशेष पुलिस आयुक्त प्रवीर रंजन का कहना है कि कोशिश कर रहे है कि सभी केस अपराध शाखा को मिल जाएं।
जिला एफआईआर दर्ज गिरफ्तार लोग
बाहरी 1 1
उत्तर-पश्चिमी 1 1
पश्चिमी 1 1
रोहिणी 3 1
पूर्व 2 4
द्वारका 3 4
अपराध शाखा 3 17
कुल 14 29
छापेमारी से पहले अदालत ने ली गई अनुमति
दिल्ली पुलिस ने नकल करते हुए परीक्षार्थियों को पकडने से पहले अदालत से अनुमति ली थी। दिल्ली पुलिस ने छापेमारी से पहले अदालत को पूरी जानकारी दी थी और अनुमति मिलने के बाद ही छापेमारी की गई थी। विशेष पुलिस आयुक्त का कहना है कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से अदालत काफी खुश है और दिल्ली पुलिस की तारीफ की है।
पांच से दस लाख में सौदा हुआ था
अपराध शाखा के पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरूआती जांच में ये बात सामने आई है कि पेपर सॉल्व करवाने के लिए पांच से दस लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। परीक्षार्थियों को पेपर देने के बाद ये पैसे देने थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पेपर सॉल्व करवाने वालों के गिरफ्त में आने के बाद ही पूरी बात सामने आ सकेगी। बताया जा रहा है कि जींद में चतुर्थ श्रेणी की परीक्षा का पेपर सॉल्व करवाया जा रहा था।
चतुर्थ श्रेणी का पर्चा 15 फरवरी को ही लीक हो गया था
दिल्ली की जिला अदालतों में चतुर्थ श्रेणी की भर्ती हुए हुई परीक्षा का पेपर 15 फरवरी को लीक हो गया था। कैथल के परीक्षार्थी ने पूछताछ में इस तरह के संकेत दिए हैं। गिरफ्तार किए गए भी आरोपियों ने मोबाइल व ब्लूटूथ अंडरगारमेंट में छिपा रखे थे। अंडरगारमेंट विशेष रुप से सिलवाए गए थे। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का ये भी कहना है कि परीक्षार्थियों ने मोबाइल व ब्लूटूथ ले जाने के लिए कोविड नियमों को फायदा उठाया।
अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि अपराध शाखा ने जिन 17 आरोपियों की पकड़ा हैं वह सभी कैथल, हिसार, जींद और सोनीपत समेत अन्य जिलों के है। इनमें कैथल के गिरफ्तार किए गए आरोपी ने बताया कि उसकी 15 फरवरी को एक व्यक्ति ने बात हुई थी। उस व्यक्ति ने कहा था कि वह उसका दिल्ली की अदालतों का पेपर सॉल्व करवा देगा। इसके बाद उस व्यक्ति ने उसे सिम व ब्लूटूथ दिया था। वह ब्लूटूथ को अंदर लेकर चला जाए वह उसके पेपर सॉल्व करवा देगा। पेपर सॉल्व करवाने के बाद उसे 50 हजार रुपये देने होंगे। ऐसे में पुलिस अधिकारी मान रहे हैं कि पेपर 15 फरवरी के पास ही लीक हो गया था।