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ऑक्सीजन ऑडिट : रिपोर्ट से दो सदस्य असहमत, नतीजे पर सवाल, हस्ताक्षर से इनकार
Sun, 27 Jun 2021 05:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 27 Jun 2021 05:32 AM IST
सार
- गृह सचिव ने कहा ऐसा लगता है पूर्व नियोजित उद्देश्यों की पूर्ति करती है कार्यवाही
- वहीं मैक्स के बुद्धिराजा ने कहा कि कई सुधारों के बाद आंकी गई थी ऑक्सीजन की मात्रा
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ऑक्सीजन एक्सप्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ऑक्सीजन विवाद मामले में गठित कमेटी के दो सदस्यों, दिल्ली सरकार के गृह सचिव बीएस भल्ला और मैक्स हेल्थकेयर के संदीप बुद्धिराजा ने रिपोर्ट पर असहमति जताई है। भल्ला और बुद्धिराजा ने अंतरिम रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं करने की बात कही है।
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डॉ. बुद्धिराजा ने अंतरिम रिपोर्ट में बदलाव और परिवर्तन की मांग तक की है। वे चाहते हैं कि दिल्ली को मेडिकल ऑक्सीजन के आवंटन की मात्रा ऑक्सीजन आयुक्त पर छोड़ दी जाए। यहां तक कहा है कि 15 मई की हुई बैठक के मिनट्स अनुमति लेने के लिए साझा तक नहीं किए गए। इसके चलते वह 18 मई की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। वहीं गृह सचिव ने भी ऐसी किसी रिपोर्ट पर सहमति अथवा हस्ताक्षर किए जाने से इंकार किया। इन दोनों सदस्यों का कहना है कि ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति को लेकर अंतरिम रिपोर्ट में कई सुधार और सुझावों को शामिल करने की आवश्यकता है।
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इस रिपोर्ट में भल्ला द्वारा 31 मई को भेजा गया कम्यूनिकेशन भी संलग्न है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कमेटी ने रिपोर्ट तैयार की उससे लगता है कि ये कार्यवाही पहले से निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति करने और यह दिखाने के लिए किया गया कि राजधानी में कम ऑक्सीजन की जरूरत थी। इसके अलावा इसका उद्देश्य ये दिखाना भी था कि दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के समक्ष ऑक्सीजन की मांग को काफी बढ़ाकर बताया था।
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भल्ला ने कमेटी के उस नतीजे पर भी आपत्ति जताई है कि राजधानी में बेड की संख्या के अनुपात में ऑक्सीजन की मांग अप्रैल के अंत में 250 टन, मई के पहले सप्ताह में 470-490 मीट्रिक टन और 10 मई तक बढ़कर 900 मीट्रिक टन होने का दावा किया गया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से ये पैरा हटाया जाना चाहिए क्योंकि ये न तो सही है और न ही वेरीफाइड डाटा पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि मई के पहले सप्ताह में बढ़ते मामलों और इसके बाद भी लगातार बढ़ती बेड ऑक्यूपेंसी के अनुसार ऑक्सीजन की मांग अप्रैल के अंत में 625 मीट्रिक टन और मई के पहले सप्ताह में 700 मीट्रिक टन थी। दिल्ली सरकार की ओर से ऑक्सीजन की अधिक मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि 700 मीट्रिक टन की गणना भारत सरकार और आईसीएमआर के मानकों के अनुरूप थी जो आईसीयू बेड के 24 लिटर प्रति मिनट और नॉन आईसीयू बेड के लिए 10 लिटर प्रति मिनट है।
ये हैं समिति में
समिति में एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया के अलावा डॉ बुद्धिराजा, गृह सचिव भल्ला, जल शक्ति मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुबोध यादव और पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन में नियंत्रक (पीईएसओ) संजय कुमार सिंह हैं।
ऑक्सीजन विवाद पर एम्स प्रमुख बोले. यह अंतरिम रिपोर्ट, रोज बदलती है ऑक्सीजन की जरूरत
एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की दिल्ली में ऑक्सीजन की आवश्यकता पर रिपोर्ट को लेकर उठे विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम रिपोर्ट है और ऑक्सीजन की जरूरत दिन प्रति दिन के हिसाब से बदलती रहती है। अभी यह मामला कोर्ट में है।
गुलेरिया के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय उपसमूह ने एक रिपोर्ट में कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली की ऑक्सीजन की आवश्यकता चार गुना बढ़ाकर बताई गई। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम रिपोट है। ऑक्सीजन की जरूरत क्रियाशील है और दिन प्रति दिन इसमें बदलाव होता है। साथ ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
रिपोर्ट के आधार पर भाजपा ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल सरकार पर हमला बोला और उस पर आपराधिक लापरवाही बरतने का आरोप लगाया जबकि केजरीवाल सरकार ने भाजपा पर ‘फर्जी रिपोर्ट’ के आधार पर बदनाम करने का आरोप मढ़ा।