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दिल्ली हिंसा में बाहरी लोगों का हाथ : केजरीवाल
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मानना है कि उत्तर- पूर्वी दिल्ली में फैली हिंसा में बाहरी लोगों का हाथ है। कुछ नेता और असामाजिक तत्वों की कारस्तानी से दिल्ली के कुछ इलाके जल रहे हैं। केजरीवाल बुधवार शाम विधानसभा में उपराज्यपाल के अभिभाषण पर सदन में लाए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने सुबह भी सेना बुलाने की केंद्र सरकार से गुजारिश की थी। एक बार फिर से सदन में उन्होंने दोहराया कि उत्तर-पूर्वी जिले में अगर शांति कायम करने के लिए सेना की जरूरत है तो उसे भेजा जाए। अगर जरूरत पड़े तो कर्फ्यू भी लगाया जाए। केजरीवाल ने दिल्लीवालों से शांति बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि दिल्ली का बेहतरीन शहर बनाना है।
केजरीवाल ने कहा कि पिछले तीन दिन से दिल्ली की दो तस्वीरें देश-दुनिया देख रही हैं। पहली दिल्ली की खुशी की, जो दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चों से जुड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप सरकारी स्कूल में पहुंचीं। आजादी के बाद से यह पहला मौका है, जब सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति की पत्नी किसी सरकारी स्कूल की हैपीनेस क्लास में शामिल हुईं और कहा कि इस तरह की क्लास सिर्फ भारत व अमेरिका में नहीं, पूरी दुनिया में होने चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि दूसरी तस्वीर इसी दौरान दिल्ली के जलने की है। दिल्ली के दंगों की खबर भी देश-दुनिया के अखबारों में प्रकाशित हुई। केजरीवाल ने कहा कि आज सबको तय करना है कि उनको कौन सी तस्वीर चुननी है। समय बेहद नाजुक है। हेड कांस्टेबल रतन लाल किसी समुदाय विशेष को बचाने के लिए शहीद नहीं हुए, मुल्क को बचाने लिए उन्होंने जान दी है। केजरीवाल ने कहा कि वह सदन की तरफ से पूरी दिल्ली को भरोसा देते हुए हैं कि रतन लाल की शहादत जाया नहीं होगी।
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केजरीवाल ने कहा कि दिल्लीवाले बहुत अच्छे हैं। उन्हें दंगा-फसाद नहीं चाहिए। यह कुछ बाहरी लोगों, राजनीतिक और असामाजिक तत्वों की कारस्तानी है, जिससे दिल्ली के कुछ इलाके जल रहे हैं। केजरीवाल ने सवाल किया इन दंगों में किसकी मौत हुई? साथ ही मृतकों का नाम गिनाते हुए जवाब भी दिया कि बीस लोगों की लिस्ट में हिंदू भी हैं और मुसलमान भी। पुलिसकर्मी की भी मौत हुई है। नुकसान सबका हो रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि आज हमारे पास दो विकल्प है। या तो हम सारे एक साथ खड़े हो जाएं, हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई सभी जाति व धर्म के लोग दिल्ली का सुनहरा भविष्य बनाने की कोशिश करें। या फिर एक-दूसरे को मारें और लाशें गिनने का काम करें। आधुनिक दिल्ली लाशों की बुनियाद पर नहीं बन सकती। पूरी दिल्ली को मिलकर कह देना चाहिए कि वह नफरत की राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। दंगों के बीच भी सुनने को मिला है कि एक समुदाय ने दूसरे समुदाय के लोगों की जान बचाई है। यही असली दिल्ली की तासीर है, इन्हीं के भरोसे भविष्य आगे बढ़ सकता है।
केजरीवाल ने किया पुलिस का बचाव
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीते दो तीन दिनों से हम जो कर सकते थे किया। विधायकों ने अपने-अपने स्तर पर जहां-जहों हो सकता पुलिस की मदद से या खुद के प्रयास से लोगों को बचाया। कई जगह पुलिसकर्मी कम थे। एक डीसीपी समेत 50 पुलिस वाले घायल हैं। पुलिस ने काफी कोशिश की, लेकिन माहौल ऐसा था कि हालात बिगड़े। कुछ पुलिसकर्मी कह रहे थे कि उनको ऊपर से आदेश नहीं है। कई वीडियो ऐसे भी है, जिसमें पुलिसवाले उपद्रवियों की मदद कर रहे हैं। केजरीवाल ने जांच कर इन पर कार्रवाई की मांग भी की।
रतनलाल के परिवार को मिलेगा एक करोड़, एक सदस्य को नौकरी
अरविंद केजरीवाल ने सदन से हिंसा में शहीद हुए रतनलाल के परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की है। साथ ही परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की है। उन्होंने कहा कि पता चला है कि केंद्र सरकार ने भी रतनलाल के परिवार एक करोड़ रुपये दिया है। यह खुशी की बात है। उन्होंने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने का वादा भी किया। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि सरकार हिंसा में मारे गए सभी लोगों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये देगी।
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केजरीवाल ने कहा कि पिछले तीन दिन से दिल्ली की दो तस्वीरें देश-दुनिया देख रही हैं। पहली दिल्ली की खुशी की, जो दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चों से जुड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप सरकारी स्कूल में पहुंचीं। आजादी के बाद से यह पहला मौका है, जब सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति की पत्नी किसी सरकारी स्कूल की हैपीनेस क्लास में शामिल हुईं और कहा कि इस तरह की क्लास सिर्फ भारत व अमेरिका में नहीं, पूरी दुनिया में होने चाहिए।
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केजरीवाल ने कहा कि दूसरी तस्वीर इसी दौरान दिल्ली के जलने की है। दिल्ली के दंगों की खबर भी देश-दुनिया के अखबारों में प्रकाशित हुई। केजरीवाल ने कहा कि आज सबको तय करना है कि उनको कौन सी तस्वीर चुननी है। समय बेहद नाजुक है। हेड कांस्टेबल रतन लाल किसी समुदाय विशेष को बचाने के लिए शहीद नहीं हुए, मुल्क को बचाने लिए उन्होंने जान दी है। केजरीवाल ने कहा कि वह सदन की तरफ से पूरी दिल्ली को भरोसा देते हुए हैं कि रतन लाल की शहादत जाया नहीं होगी।
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केजरीवाल ने कहा कि दिल्लीवाले बहुत अच्छे हैं। उन्हें दंगा-फसाद नहीं चाहिए। यह कुछ बाहरी लोगों, राजनीतिक और असामाजिक तत्वों की कारस्तानी है, जिससे दिल्ली के कुछ इलाके जल रहे हैं। केजरीवाल ने सवाल किया इन दंगों में किसकी मौत हुई? साथ ही मृतकों का नाम गिनाते हुए जवाब भी दिया कि बीस लोगों की लिस्ट में हिंदू भी हैं और मुसलमान भी। पुलिसकर्मी की भी मौत हुई है। नुकसान सबका हो रहा है।
केजरीवाल ने कहा कि आज हमारे पास दो विकल्प है। या तो हम सारे एक साथ खड़े हो जाएं, हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई सभी जाति व धर्म के लोग दिल्ली का सुनहरा भविष्य बनाने की कोशिश करें। या फिर एक-दूसरे को मारें और लाशें गिनने का काम करें। आधुनिक दिल्ली लाशों की बुनियाद पर नहीं बन सकती। पूरी दिल्ली को मिलकर कह देना चाहिए कि वह नफरत की राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। दंगों के बीच भी सुनने को मिला है कि एक समुदाय ने दूसरे समुदाय के लोगों की जान बचाई है। यही असली दिल्ली की तासीर है, इन्हीं के भरोसे भविष्य आगे बढ़ सकता है।
केजरीवाल ने किया पुलिस का बचाव
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बीते दो तीन दिनों से हम जो कर सकते थे किया। विधायकों ने अपने-अपने स्तर पर जहां-जहों हो सकता पुलिस की मदद से या खुद के प्रयास से लोगों को बचाया। कई जगह पुलिसकर्मी कम थे। एक डीसीपी समेत 50 पुलिस वाले घायल हैं। पुलिस ने काफी कोशिश की, लेकिन माहौल ऐसा था कि हालात बिगड़े। कुछ पुलिसकर्मी कह रहे थे कि उनको ऊपर से आदेश नहीं है। कई वीडियो ऐसे भी है, जिसमें पुलिसवाले उपद्रवियों की मदद कर रहे हैं। केजरीवाल ने जांच कर इन पर कार्रवाई की मांग भी की।
रतनलाल के परिवार को मिलेगा एक करोड़, एक सदस्य को नौकरी
अरविंद केजरीवाल ने सदन से हिंसा में शहीद हुए रतनलाल के परिवार को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की है। साथ ही परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा भी की है। उन्होंने कहा कि पता चला है कि केंद्र सरकार ने भी रतनलाल के परिवार एक करोड़ रुपये दिया है। यह खुशी की बात है। उन्होंने पूरे परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने का वादा भी किया। दूसरी तरफ दिल्ली सरकार के अधिकारियों का कहना है कि सरकार हिंसा में मारे गए सभी लोगों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये देगी।