{"_id":"6167333f546f2d26350c3014","slug":"other-reprimands-including-sho-for-lack-of-coordination-and-confused-conduct-ashram-news-noi6102613134","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली दंगा : तालमेल की कमी और भ्रमित आचरण पर एसएचओ सहित अन्य को फटकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली दंगा : तालमेल की कमी और भ्रमित आचरण पर एसएचओ सहित अन्य को फटकार
Thu, 14 Oct 2021 12:57 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 Oct 2021 12:57 AM IST
सार
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने पुलिस अधिकारियों और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और दंगों के मामले में प्रभावी अभियोजन के लिए आदेश की प्रति विशेष पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में तालमेल की कमी और उनके भ्रमित आचरण को लेकर एक एसएचओ सहित दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को फटकार लगाई है। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने पुलिस अधिकारियों और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने और दंगों के मामले में प्रभावी अभियोजन के लिए आदेश की प्रति विशेष पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष ने मामले को इस आधार पर मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित करने का आग्रह किया कि मामले में धारा 436 (आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा घर, आदि को नष्ट करने) लागू नहीं होती। वहीं एसएचओ और दो अन्य पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को अवगत कराया कि विशेष लोक अभियोजक दिनभर उपलब्ध नहीं हैं।
विज्ञापन
अदालत ने एसएचओ से पूछा कि यह आवेदन आप द्वारा दायर किया गया है, क्या यह एक मजाक है? क्या आरोपी की पुलिस हिरासत एक मजाक है? आप खुद नहीं जानते कि क्या करना है। धारा 436 कब लागू करनी है। अदालत से फटकार खाने के बाद पुलिस ने बताया कि वह अर्जी वापस लेना चाहती है।
विज्ञापन
अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने आरोपी की जमानत आवेदन का विरोध किया, आपने आरोपपत्र दायर किया। सबसे पहले आप तीनों अधिकारी तय करते कि क्या करना है। एक घंटे में आपका रुख बदल गया, आपकी समझ अचानक बदल गई।
अदालत ने कहा पुलिस अधिकारी खुद असमंजस में हैं क्योंकि उन्होंने सबसे पहले आवेदन दायर कहा मामले में धारा 436 लागू नहीं होती और फिर तुरंत आवेदन वापस लेने का तर्क रख रहे हैं। यह पुलिस का उचित तरीका नहीं है। उन्होंने मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए दायर आवेदन को खारिज कर दिया।