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इस्तीफा देने के बाद नियोक्ता-कर्मचारी का कानूनी संबंध खत्म : एयर इंडिया
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नई दिल्ली। एयर इंडिया ने कहा कि एक बार पायलट के इस्तीफा देने के बाद नियोक्ता-कर्मचारी का कानूनी संबंध खत्म हो जाता है। इसके बाद इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता।
एयर इंडिया ने पायलटों की पुन: बहाली के आदेश के खिलाफ दायर अपनी अपील में हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अगस्त तय की है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ के समक्ष सिंगल जज के फैसले के खिलाफ अपील पर अपना पक्ष रखते हुए एयर इंडिया ने कहा कि एकतरफा इस्तीफे को वापस लेना एक खतरनाक परंपरा बन जाएगी।
एयर इंडिया की ओर से पेश सालीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तय कानून के तहत इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति की जरूरत नहीं है। इस्तीफे के बाद छह महीने की नोटिस अवधि केवल यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए है। जिस क्षण आपने इस्तीफा दिया उसी समय नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध खत्म हो जाता है।
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उन्होंने कहा 40 पायलटों ने त्यागपत्र दिया और बाद में एयर इंडिया से कहा कि उनको त्यागपत्र वापस लेने की अनुमति दी जाए लेकिन उनके मुवक्किल ने इजाजत नहीं दी। मेहता ने कहा कि मूल याचिकाकर्ताओं को निजी एयरलाइन ने बेहतर नौकरी की पेशकश की और उन्होंने त्यागपत्र दे दिया लेकिन बाद में मन बदल लिया। यह एक एकतरफा इस्तीफा है। उन्होंने कहा कि सेवा कानून में कोई संभावित इस्तीफा या सशर्त इस्तीफा नहीं है।
पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि यह एक बहुत ही खतरनाक रास्ता है जहां एयर इंडिया चल रही है। पीठ ने कहा मान लीजिए कि कोई पायलट उड़ान भरता है और विमान में उसके साथ दुराचार होता है। उन्हें एहसास होता है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है और वह आज इस्तीफा दे देते हैं तो आपको आज उन्हें जाने देना होगा।
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एयर इंडिया ने पायलटों की पुन: बहाली के आदेश के खिलाफ दायर अपनी अपील में हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क रखा। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अगस्त तय की है।
न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ के समक्ष सिंगल जज के फैसले के खिलाफ अपील पर अपना पक्ष रखते हुए एयर इंडिया ने कहा कि एकतरफा इस्तीफे को वापस लेना एक खतरनाक परंपरा बन जाएगी।
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एयर इंडिया की ओर से पेश सालीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तय कानून के तहत इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति की जरूरत नहीं है। इस्तीफे के बाद छह महीने की नोटिस अवधि केवल यात्रियों को किसी तरह की परेशानी से बचाने के लिए है। जिस क्षण आपने इस्तीफा दिया उसी समय नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध खत्म हो जाता है।
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उन्होंने कहा 40 पायलटों ने त्यागपत्र दिया और बाद में एयर इंडिया से कहा कि उनको त्यागपत्र वापस लेने की अनुमति दी जाए लेकिन उनके मुवक्किल ने इजाजत नहीं दी। मेहता ने कहा कि मूल याचिकाकर्ताओं को निजी एयरलाइन ने बेहतर नौकरी की पेशकश की और उन्होंने त्यागपत्र दे दिया लेकिन बाद में मन बदल लिया। यह एक एकतरफा इस्तीफा है। उन्होंने कहा कि सेवा कानून में कोई संभावित इस्तीफा या सशर्त इस्तीफा नहीं है।
पीठ ने उनके तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि यह एक बहुत ही खतरनाक रास्ता है जहां एयर इंडिया चल रही है। पीठ ने कहा मान लीजिए कि कोई पायलट उड़ान भरता है और विमान में उसके साथ दुराचार होता है। उन्हें एहसास होता है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है और वह आज इस्तीफा दे देते हैं तो आपको आज उन्हें जाने देना होगा।