फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Now AIIMS app will save the lives of brain stroke patients

विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेष: अब एम्स के एप से बचेगी ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की जान, हिमाचल प्रदेश में मिली कामयाबी

Sat, 30 Oct 2021 09:15 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 30 Oct 2021 09:15 AM IST
सार

दिल्ली एम्स ने एक ऐसा एप बनाया है जिससे ब्रेन स्ट्रोक मरीजों की जान बच सकेगी। इस एप के जरिए एमबीबीएस डॉक्टर भी प्रशिक्षण ले सकेगा। 

विज्ञापन
Now AIIMS app will save the lives of brain stroke patients
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

विश्व स्ट्रोक दिवस पर दिल्ली एम्स ने देश को एक मोबाइल एप समर्पित किया है। इस एप की सहायता से हर जिले में बैठा कोई भी डॉक्टर मरीज की जान बचा सकता है। आमतौर पर किसी भी मरीज को स्ट्रोक आने पर तत्काल इलाज जरूरी होता है जिसके लिए उसे नजदीकी बड़े अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट की आवश्यकता पड़ती है लेकिन देश में लंबे समय से इन डॉक्टरों की भारी कमी है।
विज्ञापन


ऐसे में एम्स के डॉक्टरों ने एक अलग विकल्प चुनते हुए तकनीक की मदद लेते हुए डॉक्टरों के लिए यह एप तैयार किया है जो एमबीबीएस डॉक्टर को प्रशिक्षित करेगा। शुक्रवार को एम्स के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एमवी पद्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि देश में हर 20वें सेंकड में किसी न किसी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक हो रहा है लेकिन समय पर इलाज न मिलने की वजह से हर दो मिनट में इनमें से एक मरीज की मौत हो रही है। 
विज्ञापन


गौर करने वाली बात है कि ब्रेन स्ट्रोक का हर चौथा मरीज युवा आयु से जुड़ा है। चूंकि देश में अभी करीब तीन हजार न्यूरोलॉजिस्ट ही तैनात हैं। ऐसे में सालाना 18 लाख मरीजों की जिम्मेदारी इन्हीं पर होती है। इतनी बड़ी तादाद में मरीजों को उपचार दे पाना संभव भी नहीं है। इसलिए एप बनाया है, जिसका इस्तेमाल जिला स्तर पर कोई भी डॉक्टर कर सकता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


हिमाचल प्रदेश में कामयाब रहा एप
एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में यह मोबाइल एप कामयाब रहा है। कुछ समय पहले इस एप का इस्तेमाल हिमाचल प्रदेश के एक जिले में किया था जहां हड्डी रोग के एक डॉक्टर ने स्ट्रोक मरीज की जान बचाई और उसे लकवा भी नहीं होने दिया। इसीलिए अब एप को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च करने से पहले छह महीने का एक और पायलट ट्रायल शुरू किया है। इस मोबाइल एप का नाम स्ट्रोक एप है जो दिल्ली एम्स से जुड़ा है। अभी देश के 22 जिले इससे जोड़े गए हैं और सात नोडल केंद्र भी बनाए हैं। धीरे धीरे यह एप बाकी जिलों से भी जोड़ा जाएगा। 

महामारी का असर स्ट्रोक पर भी

एम्स के डॉ. रोहित भाटिया ने बताया कि कोरोना महामारी का असर ब्रेन स्ट्रोक पर भी दिखाई दिया है। जिन लोगों को संक्रमण हुआ और फिर उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हो गया, ऐसे मरीजों में से केवल 34 फीसदी को ही बचाया जा सका। जबकि जिन्हें कोविड नहीं था उनमें से 66 फीसदी को बचाने में कामयाबी मिली थी।

कोरोना संक्रमण की वजह से ब्रेन स्ट्रोक होने के तथ्य अब तक चिकित्सीय विज्ञान में सामने नहीं आए हैं लेकिन संक्रमण होने के बाद स्ट्रोक होने पर जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है जिसके तथ्य एम्स ने एकत्रित किए हैं। इसके लिए 18 अस्पतालों में कोरोना और ब्रेन स्ट्रोक मरीजों पर चिकित्सीय अध्ययन भी किया है।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed