फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Not only in Delhi and Ghaziabad, the condition of schools and the system there is the same across the country.

आंखोंदेखी : क्या करें...बच्चे हैं कि मानते ही नहीं, स्कूल बस और कैब का हाल है एक जैसा

Fri, 22 Apr 2022 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 22 Apr 2022 05:56 AM IST
सार

स्कूल से निकलते ही बसों व कैब में जाने के लिए भागते हैं बच्चे, छोटे बच्चे कहीं हाथ बाहर निकाल कर तो कहीं कैब में झूलते दिखाई दिए। चालकों का कहना है कि हर बच्चे पर ध्यान देना संभव नहीं।
 

विज्ञापन
Not only in Delhi and Ghaziabad, the condition of schools and the system there is the same across the country.
स्कूल कैब.... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गाजियाबाद के मोदीनगर में बीते बुधवार को दस साल के छात्र की चलती बस में सिर निकालने के कारण लोहे के गेट से टकराने से हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूलों में विद्यार्थियों को घर से लाने और पहुंचाने के लिए कैब, बस, ई-रिक्शा का प्रयोग किया जा रहा है। इनमें क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जाता है। चालक भी बच्चों पर ध्यान नहीं देते। उनका कहना है कि बच्चे बात मानते ही नहीं। इस कारण अक्सर छात्र बस या कैब में हादसे का शिकार हो जाते हैं। दिल्ली में अमर उजाला ने स्कूल की छुट्टी होने के बाद ऐसे ही स्कूल बसों व कैब का जायजा लिया। पेश है रश्मि शर्मा की रिपोर्ट।  

विज्ञापन


हर समय बच्चे पर ध्यान देना संभव नहीं
बच्चों के प्रति की जा रही अनदेखी पर पूछने पर एक कैब चालक ने बताया कि कई बार शरारत करने से मना करते हैं। लेकिन बच्चे हैं मानते ही नहीं। कितनी बार इन्हें टोकेें। बस या कैब चलाते समय हर बच्चे पर ध्यान देना संभव नहीं है। अभिभावकों को भी तो छात्रों को कुछ समझाना चाहिए। बच्चों की लापरवाही हम पर ही भारी पड़ जाती है। बच्चों को क्षमता से ज्यादा बिठाने  पर उनका जवाब था कि अभिभावक ही भेजते हैं हम चार बच्चे लेकर तो स्कूल आ नहीं सकते।
विज्ञापन


बस में बैठते ही हाथ बाहर निकाल लिए, कैब में झूलते रहे
बच्चे जैसे ही स्कूल बस में पहुंचे आपस में मस्ती करने लगे। किसी ने हाथ बाहर निकाल लिया तो कोई कैब के दरवाजे पर झूलते रहे। इस दौरान न ही स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई मौजूद था और न ही बस चालकों का बच्चों पर कोई ध्यान था। बसों से बाहर आकर वह आइसक्रीम लेनेे के लिए भागते रहे। किसी ने उन्हें रोकने का प्रयास नहीं किया। ऐसे हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, कैब में बच्चों को क्षमता से ज्यादा बैठाया गया। तमाम नियमों को ताक पर रखकर कैब वाले बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बस का दरवाजा बंद था और बस चली और गेट पर खड़ी लड़की झटके से बस के अंदर गिरते-गिरते बची। काफी समय से वह बस की सीढ़ियों पर खड़ी थी लेकिन उसे सीट पर बैठने के लिए नहीं कहा गया।  
विज्ञापन
विज्ञापन


छुट्टी होते ही बच्चे बसों में पहुंचे, चालक बातों में मशगूल
नई दिल्ली के पास दो नामी स्कूलों की छुट्टी दोपहर एक बजे होने लगी। दोनों स्कूलों की बसों में सीट पर बैठने के लिए बच्चे दौड़ते हुए पहुंचे। स्कूल मुख्य रोड पर है और ट्रैफिक की आवाजाही काफी। ऐसे में बच्चे किसी भी वक्त हादसे का शिकार हो सकते हैं। कैब व बस चालकों अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हुए एक जगह खड़े होकर आराम से बातें करते दिखाई दिए।



बच्चों की सुरक्षा को लेकर सेफ्टी गाइडलाइंस

  • बसों व वैन में बच्चों को भरकर नहीं ले जाने की हिदायत है
  • वैन में बच्चों को ठूंस कर ले जाने पर सख्ती होगी, स्कूलों को इसकी नियमित जांच करनी होगी
  • स्कूलों को सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे केवल मान्य वाहनों में स्कूल से घर आएं और जाएं
  • स्कूल देखें कि वाहन पूरी तरह से सुरक्षित हो और यातायात के नियमों का पालन करें
  • स्कूल वाहनों के स्टॉफ का पहचान पत्र दिल्ली पुलिस से सत्यापित कराना होगा
  • बसों व वैन में छात्राएं हो उनमें महिला कर्मचारी होना अनिवार्य है
  • टूर के दौरान दो छात्रों पर एक शिक्षक जरूरी है
  • अभिभावक यदि बच्चे के लिए प्राइवेट वाहन लगाते हैं तो स्कूल को उसके चालक की जांच करना जरूरी है
  • सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल प्रिंसिपल को प्रत्येक छह माह में प्राइवेट वाहनों के इस्तेमाल को लेकर अभिभावकों के साथ बैठक करनी होगी
  • प्राइवेट वाहनों में स्कूली छात्रों के लिए एक रजिस्टर भी होना चाहिए
  • जब बस चल रही हो तो बस के दरवाजे पूरी तरह से बंद हो
  • स्टॉप पर ही बस को रोका जाए
  • स्कूल संचालक ड्राइवर का रेगुलर चेकअप कराएं। शराब पीकर ड्राइवर गाड़ी ना चलाए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed