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बचत: मेट्रो के ट्रैक बदलने में अब सुरक्षा की नहीं होगी फिक्र, जर्मन तकनीक से पॉइंट मशीनें दोबारा हो सकेंगी इस्तेमाल

Tue, 21 Sep 2021 01:22 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 21 Sep 2021 01:22 AM IST
सार

मेट्रो ट्रेनों के ट्रैक बदलने में पॉइंट मशीनों की अहम भूमिका है। सुरक्षित परिचालन के लिए जरूरी अधिकतर मशीनें 10 साल से अधिक पुरानी या 10 लाख से अधिक बार इस्तेमाल की गई प्वाइंट मशीनों की ओवरहॉलिंग की जाएगी।
 

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no more worrying about safety in changing metro tracks point machines can be used again with german technology
delhi metro - फोटो : PTI

विस्तार

मेट्रो की ब्लू और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन की 10 साल पुरानी 260 पॉइंट मशीनों को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाएगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने दोनों लाइनों पर पुरानी या 10 लाख से अधिक पुरानी प्वाइंट मशीनों की ओवरहॉलिंग के लिए नई तकनीक को अपनाया है। इसके लिए जर्मनी से इसके लिए विशेष तौर पर डिजाइन किए गए कंटेनर मंगवाए गए हैं, जिनका दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यात्रियों को मेट्रो में सुरक्षित सफर का मौका मिलने के साथ ही नई मशीनों की तुलना में करीब 80 फीसदी की बचत होगी।

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मेट्रो ट्रेनों के ट्रैक बदलने में पॉइंट मशीनों की अहम भूमिका है। सुरक्षित परिचालन के लिए जरूरी अधिकतर मशीनें 10 साल से अधिक पुरानी या 10 लाख से अधिक बार इस्तेमाल की गई प्वाइंट मशीनों की ओवरहॉलिंग की जाएगी।
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ब्लू लाइन के यमुना बैंक डिपो में छह महीनों में मशीनों की ओवरहॉलिंग की जाएगी। कंटेनर आधारित ओवरहालिंग पद्धति से लाखों की बचत के साथ साथ प्रदर्शन और विश्वसनीयता में भी बढ़ोतरी होगी। इन मशीनों को दोबारा 10 वर्षों तक इस्तेमाल संभव होगा। मशीनों को रात में यात्री सेवाओं के बंद होने पर इस कंटेनर लैब में ले जाया जाएगा। प्वाइंट मशीन के ओवरहालिंग के बाद मेट्रो परिचालन में दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा।
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खास बात यह है कि इसके लिए जर्मनी के विशेषज्ञ डीएमआरसी इंजीनियरों को प्रशिक्षण भी देंगे ताकि भविष्य में डीएमआरसी के इंजीनियरों खुद ओवरहॉलिंग कार्य को पूरा कर सकें। इससे बचत के साथ साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। सभी पॉइंट मशीनों के ओवरहॉलिंग कार्य को मार्च 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा। प्वाइंट मशीन का ओवरहालिंग कार्य मार्च 2022 तक अस्थायी रूप से पूरा करने के बाद कंटेनर व दूसरे उपकरण व मशीनें जर्मनी भेज दी जाएंगी।


रोजाना तीन मशीनें दोबारा इस्तेमाल के लिए होंगी तैयार
पाइंट मशीनों का इस्तेमाल सिग्नलिंग प्रणाली के जरिये मेट्रो ट्रेनों को एक से दूसरे ट्रैक पर स्विच किया जाता है। सिग्नलिंग के लिहाज से यह अहम है। इससे मेट्रो का सुरक्षित परिचालन किया जाएगा। एक प्वाइंट मशीन रोजाना तीन प्वाइंट मशीनों को ओवरहाल कर सकता है।

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