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नोटबंदी के दौरान जमा कराए थे नौ करोड़, दबोचा
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नई दिल्ली। नोटबंदी के दौरान फर्जी कागजात से नौ बैंक खातेे खुलवाकर नौ करोड़ रुपये का काला धन जमा कराने वाले नवीन शाहदरा निवासी गौरव सिंघल को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ आयकर विभाग ने शिकायत दर्ज कराई थी। तभी से वह फरार था।
ईओडब्ल्यू के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि आयकर अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने वर्ष 2018 में दर्ज कराई शिकायत में कहा था कि 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर 2016 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 9 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। ये सभी बैंक खाते फर्जी कागजात से खुलवाए गए थे। बैंकों से पूछताछ में पता चला कि खाताधारक विश्वास नगर के एक ही परिसर से व्यावसायिक गतिविधियां चला रहा था। केवाईसी दस्तावेज की जांच के बाद आईटी अधिनियम के तहत उससे पूछताछ की गई। उसने बताया कि फर्जी पेन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र से खाते खुलवाकर उसने नोटबंदी के दौरान काला धन जमा कराया था। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि बैंक खाते योगेश जैन और राहुल जैन के नाम से थे, लेकिन उन पर फोटो गौरव सिंघल का ही था। फोन नंबर भी गौरव के ही थे। ज्यादातर पैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग से निकाले गए थे। जांच में पता चला कि नोटबंदी के दौरान काला धन रखने के लिए फर्जी नाम और पते से खाते खुलवाए गए। मामला दर्ज होने के बाद गौरव फरार हो गया।
निरीक्षक अमित चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने उसकी तलाश में यमुनापार, रोहिणी और नोएडा में दबिश दी। इसी बीच पता चला कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने घर के पास ही किसी पीजी में रह रहा है। इसके बाद पुलिस ने 24 दिसंबर को उसे नवीन शाहदरा से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि वह दसवीं तक पढ़ा है। इसके बाद एक केबल कंपनी में सुपरवाइजर बन गया। यहां उसकी मुलाकात कई सप्लायर से हुई। उसने जीएसटी और वैट में फायदे के लिए फर्जी बिल बनाना सीख लिया। नोटबंदी के दौरान लोगों का काला धन छुपाने के लिए उसने फर्जी खाते खोले।
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ईओडब्ल्यू के संयुक्त आयुक्त डॉ. ओपी मिश्रा ने बताया कि आयकर अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने वर्ष 2018 में दर्ज कराई शिकायत में कहा था कि 9 नवंबर 2016 से 30 दिसंबर 2016 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 9 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। ये सभी बैंक खाते फर्जी कागजात से खुलवाए गए थे। बैंकों से पूछताछ में पता चला कि खाताधारक विश्वास नगर के एक ही परिसर से व्यावसायिक गतिविधियां चला रहा था। केवाईसी दस्तावेज की जांच के बाद आईटी अधिनियम के तहत उससे पूछताछ की गई। उसने बताया कि फर्जी पेन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र से खाते खुलवाकर उसने नोटबंदी के दौरान काला धन जमा कराया था। ईओडब्ल्यू की जांच में पता चला कि बैंक खाते योगेश जैन और राहुल जैन के नाम से थे, लेकिन उन पर फोटो गौरव सिंघल का ही था। फोन नंबर भी गौरव के ही थे। ज्यादातर पैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग से निकाले गए थे। जांच में पता चला कि नोटबंदी के दौरान काला धन रखने के लिए फर्जी नाम और पते से खाते खुलवाए गए। मामला दर्ज होने के बाद गौरव फरार हो गया।
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निरीक्षक अमित चौधरी के नेतृत्व में पुलिस ने उसकी तलाश में यमुनापार, रोहिणी और नोएडा में दबिश दी। इसी बीच पता चला कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने घर के पास ही किसी पीजी में रह रहा है। इसके बाद पुलिस ने 24 दिसंबर को उसे नवीन शाहदरा से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि वह दसवीं तक पढ़ा है। इसके बाद एक केबल कंपनी में सुपरवाइजर बन गया। यहां उसकी मुलाकात कई सप्लायर से हुई। उसने जीएसटी और वैट में फायदे के लिए फर्जी बिल बनाना सीख लिया। नोटबंदी के दौरान लोगों का काला धन छुपाने के लिए उसने फर्जी खाते खोले।
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