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पहल : एनडीएमसी ने शुरू की स्वच्छ पर्यावरण मुहिम, साथ में जन-जागरण
Fri, 16 Jul 2021 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 16 Jul 2021 05:37 AM IST
सार
- अब घर और दफ्तर में मिलेगी तरोताजा हवा
- एनडीएमसी ने इंडोर प्लांट लगाने की शुरू की मुहिम, सरकारी कॉलोनियों समेत दफ्तरों में लगेंगे प्लांट
- आम लोगों को भी कर रहे हैं प्रोत्साहित, घर के अंदर की हवा साफ करने की बता रहे हैं औषधि
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एनडीएमसी की पहल...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आप घर पर हों या दफ्तर में, हर वक्त तरोताजा हवा मिलती रहेगी। नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने अपने इलाके की सरकारी कॉलोनियों और दफ्तरों में इंडोर प्लांट
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लगाने की मुहिम शुरू की है। इसके तहत एलोवेरा, सैंसवेरिया, सेफ्टीफाइला, आर्किड, स्नेक प्लांट समेत चुनिंदा प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं। सौंदर्यीकरण के साथ इन्हें सेहत, साफ-सुथरी आबोहवा का बेहतर विकल्प माना जाता है।
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दिलचस्प यह कि एनडीएमसी आम लोगों को भी इस तरह के इंडोर प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसमें ऐसे पौधों की पहचान की गई है जो प्रदूषण घटाने में मददगार होते हैं। इससे प्राकृतिक तरीके से घरों व दफ्तरों की हवा साफ हो सकती है।
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एनडीएमसी अधिकारी बताते हैं कि इस समय प्राकृतिक तरीके से दिल्ली की आबोहवा को बेहतर करने की दिशा में काम चल रहा है। इस इलाके का करीब 64 फीसदी हिस्सा पहले ही हरित क्षेत्र में आता है। इसे बढ़ाने के लिए सड़कों व घास के मैदानों को सीमित करके पौधे लगाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ घरों के अंदर की हवा साफ करने के लिए भी प्लांट्स का विकल्प आजमाया जा रहा है।
एनडीएमसी अपने अधीन आने वाली सरकारी कॉलोनियों व दफ्तरों में अपनी तरह के प्लांट लगा भी रही है। इसके सहारे घर के अंदर के धूल कण के साथ नुुकसानदेह पेंट से निकलने वाले जायलीन को भी हटा दिया जाता है। इसके अलावा रसोई समेत दूसरे अत्याधुनिक उपकरणों से निकलने वाले रसायन को भी पौधे सोख लेते हैं।
64 फीसदी हरित क्षेत्र, पीपल की बहुतायत
पूरी दिल्ली के करीब तीन फीसदी हिस्से पर बसे एनडीएमसी इलाके का करीब 64 फीसदी हरित क्षेत्र है। इनमें लाखों पेड़ और झाड़ियां हैं। करीब 43 वर्ग किलोमीटर में से 27 किलोमीटर क्षेत्र में हरियाली है। एनडीएमसी अधिकारी बताते हैं कि करीब 500 पीपल के पेड़ हैं। पीपल के पेड़ों से प्रति वर्ग मीटर, हर घंटे 10.8 किलोग्राम ऑक्सीजन मिलती है। दूसरी तरफ एनडीएमसी ने इस साल 3,850 पेड़ समेत पांच लाख झाड़ियां लगाने का लक्ष्य रखा है।
हाईटेक नर्सरी से बढ़ी हरियाली
एनडीएमसी का फैलाव करीब 43 वर्ग किलोमीटर तक है। इसका करीब 64.48 प्रतिशत हरित क्षेत्र है। इसमें 6 प्रमुख उद्यान, 3 अंतरराष्ट्रीय स्मारक पार्क, 5 रोज गार्डन शामिल हैं। इस क्षेत्र में 8 नर्सरी, 3 हाईटेक नर्सरी, 51 चौराहे, 3 हैप्पीनेस पार्क, 24 वर्टिकल गार्डन, 123 आवासीय कॉलोनियों के पार्क हैं। पौधों की सैकड़ों प्रजातियां नर्सरी में उपलब्ध हैं, ताकि जरूरत के मुताबिक पौधों का इस्तेमाल किया जा सके।
रात के वक्त भी ऑक्सीजन देने वाले इंडोर प्लांट
आर्किड : पेंट से निकलने वाले जायलिन उत्सर्जन को निष्क्रिय कर हवा को स्वच्छ बनाने में कारगर है।
पीपल : न केवल ऑक्सीजन उत्सर्जन करता है बल्कि कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी देता है।
स्नेक प्लांट : अधिकतर पेड़ों से रात के वक्त कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन होता है, जबकि स्नेक प्लांट रात के वक्त भी ऑक्सीजन देता है।
एलोवेरा : रात के वक्त भी ऑक्सीजन के उत्सर्जन से सेहत अच्छी रहती है। घर में इसके पौधे लगे होने से हमेशा स्वच्छ हवा मिलती है।
एक्सपर्ट की राय
घरों में लगाए जाने वाले पौधों से धूल कणों, पेंट या दूसरे रसायनों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। तुलसी, पुदीना सहित औषधीय पौधे लगाने के भी कई फायदे हैं।
- प्रोफेसर गोविंद सिंह