दिल्ली पुलिस: बटला हाउस एनकाउंटर पर सवालों से मनोबल तो नहीं गिरा पर जांच में देरी हुई
- अपने काम पर भरोसा था सो लड़ते गए और जीत मिलती गई
- हर जगह हुई जांच में दिल्ली पुलिस की जीत
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बटला हाउस एनकाउंटर पर उठे सवालों से दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल में उस समय तैनात अधिकारियों का मनोबल तो नहीं गिरा मगर जांच में जरूर देरी हुई। बटला हाउस एनकाउंटर की कई जगह अल्पसंख्यक आयोग, मानवाधिकार आयोग, निचली अदालत, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट समेत कई जगहों पर जांच हुई। हर जगह जवाब देना पड़ता था। इससे धमाकों के आरोपियों को पकड़ने व जांच में देरी हुई।
ये कहना है कि बटला हाउस एनकाउंटर में शहीद हुए मोहन चंद शर्मा के बैचमेट व एनकाउंटर में शामिल रहे इंस्पेक्टर संजय दत्त का। संजय दत्त इस समय स्पेशल सेल की साउथ वेस्टर्न रेंज के एसीपी हैं। उन्होंने मांग की है कि आरिज खान को मौत की सजा सुनाई जाए।
एसीपी संजय दत्त ने बताया कि 19 सितंबर को सुबह दिल्ली सीरियल बम धमाके के दोषियों के बटला हाउस में छिपे होने की सूचना मिली थी। वह इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा व टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बटला हाउस के मकान नंबर एल-18 में उस समय दो तरफ से दरवाजा था। एक तरफ का दरवाजा खुला हुआ था। दोषियों के दो साथी उस समय जामिया में पढ़ाई कर रहे थे और वह वहां चले गए थे।
पुलिस टीम ने दरवाजे को नॉक किया तो आरोपी दूसरे दरवाजे से भागने लगे। इसी बीच गोली चल गई। पुलिस ने सैफ को मौके से पकड़ लिया था। आतंकी शहनवाज और सादिक मौके पर मारे गए थे। आरिज खान दूसरे आतंकी के साथ फरार हो गया था।
एनकाउंटर में मोहन चंद शर्मा व हवलदार बलवंत को गोली लगी थी। शाम को इलाज के दौरान मोहन चंद शर्मा की मौत हो गई थी। एसीपी संजय दत्त का कहना है कि इसके बाद एनकाउंटर पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। एनकाउंटर पर सवाल उठने से दिल में टीस उठती थी। मगर उन्होंने देश के लिए अच्छा काम किया था। उन्हें विश्वास था कि जीत दिल्ली पुलिस की होगी और आखिर में दिल्ली पुलिस की जीत हुई।
फोर्स का मनोबल संभालने के साथ-साथ जांच करना चुनौती थी
बटला हाउस एनकाउंटर के समय स्पेशल सेल के डीसीपी आलोक कुमार का कहना है कि एनकाउंटर में मोहन चंद शर्मा के शहीद होने से फोर्स का मनोबल गिर गया था। उस समय फोर्स के मनोबल के साथ-साथ जांच को जारी रखना बहुत बड़ी चुनौती थी। दोनों कामों को जारी रखा गया और आखिर में दिल्ली पुलिस की जीत हुई।
आलोक कुमार दिल्ली पुलिस से रिटायर हो चुके हैं और इस समय बीसीसीआई में एंटी करप्शन ब्रांच संभाल रहे हैं। आलोक कुमार का कहना है कि इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा व हवलदार बलवंत को गोली लगने से फोर्स का मनोबल गिर गया था। स्पेशल सेल में पुलिस ऑफिसर काफी हतोत्साहित हो गए थे। इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को आतंकियों का पकड़ने का बहुत तजुर्बा था।
इससे फोर्स का मनोबल गिर रहा था। मगर स्पेशल सेल ने प्रोफेशनल तरीके से जांच को आगे जारी रखा। कुछ दिनों बाद आतंकी पकड़ लिए गए मगर एनकाउंटर पर सवाल उठने शुरू हो गए। इसके बाद कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। दिल्ली पुलिस अपनी जांच में टिकी रही। आखिर में जीत दिल्ली पुलिस की हुई।
पुलिस अधिकारी ने अपनी किताब में राजनेताओं पर किए थे सवाल खड़े
स्पेशल सेल के तत्कालीन प्रमुख व विशेष पुलिस आयुक्त रहे करनैल सिंह ने अपनी किताब ‘बटला हाउस-एन एनकाउंटर द शॉक द नेशन’ में जामिया नगर के बटला हाउस इलाके में मकान नंबर एल-18 में पुलिस ऑपरेशन के कई विवरणों को दोहराया था।
इस मामले ने एक राजनीतिक तूफान ला दिया। राजनेताओं समेत काफी लोगों ने स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के कार्यों पर सवाल उठाए। जनमत को विभाजित किया और मीडिया में एक विवादास्पद विषय बन गया जो आज तक जारी है।
उन्होंने अपनी पुस्तक में 2008 के बटला हाउस एनकाउंटर को रंग देने के लिए राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और मीडिया के एक वर्ग द्वारा फेक न्यूज और स्ट्रीट अफवाहों को उठाया था। एनकाउंटर से छह दिन पहले, 13 सितंबर 2008 को राष्ट्रीय राजधानी में पांच विस्फोटों की एक श्रृंखला में कम से कम 30 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हो गए।
एनकाउंटर पर फिल्म बनाई गई
निखिल आडवाणी के निर्देशन में इसी नाम से एक एक्शन थ्रिलर फिल्म का निर्माण हुआ। जॉन अब्राहम और मृणाल ठाकुर ने फिल्म में अभिनय किया था।