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बोर्ड का परिणाम सुधारने के लिए अर्धवार्षिक परीक्षाओं का विश्लेषण
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने दसवीं व बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। सरकार ने बेहतर रिजल्ट के लिए सरकारी स्कूलों मेें हाल में संपन्न हुई अर्धवार्षिक परीक्षाओं का विश्लेषण शुरू किया है। स्कूलों को यह विश्लेषण प्रश्नों के आधार पर करना होगा। स्कूल जैसे ही छात्र के अंकों को दिए गए परफार्मा में भरेंगे, वैसे ही प्रत्येक छात्र का विश्लेषण अपने आप (ऑटो जनरेटेड) हो जाएगा। इसके आधार पर ही स्कूलों को फाइनल परीक्षाओं की तैयारी करानी होगी। खासकर गणित व विज्ञान की कक्षाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को दसवीं की गणित, विज्ञान व सामाजिक ज्ञान व बारहवीं की अंग्रेजी, गणित व अकाउंटेंसी, अर्थशास्त्र व भूगोल विषयों के पेपर का क्वेश्चन आधारित विश्लेषण करने को कहा है। प्राप्त विश्लेषण के आधार पर छात्रों को समय प्रबंधन की तकनीक भी सिखाई जाएगी। इस विश्लेषण के बाद जिन भी छात्रों का जिस भी विषय के जिस भी हिस्से का प्रदर्शन खराब होगा, उसको उसी के आधार पर बोर्ड परीक्षाओं से पहले तैयार किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि यदि कहीं शिक्षकों की कमी के कारण प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है, तो इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। यदि छात्र वर्तनी, फॉर्मूला और न्यूमेरिकल्स की गलती कर रहे होंगे, तो उन्हें इसकी अलग से प्रैक्टिस कराई जाएगी, जिससे छात्र के प्रदर्शन को फाइनल परीक्षाओं में सुधारा जा सके। मालूम हो कि इस साल बोर्ड परीक्षाओं से पहले निदेशालय ने जनवरी में 33 फीसदी से कम अंक लाने वाले 200 विद्यार्थियों के 9 विषयों का भी विश्लेषण किया था।
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शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को दसवीं की गणित, विज्ञान व सामाजिक ज्ञान व बारहवीं की अंग्रेजी, गणित व अकाउंटेंसी, अर्थशास्त्र व भूगोल विषयों के पेपर का क्वेश्चन आधारित विश्लेषण करने को कहा है। प्राप्त विश्लेषण के आधार पर छात्रों को समय प्रबंधन की तकनीक भी सिखाई जाएगी। इस विश्लेषण के बाद जिन भी छात्रों का जिस भी विषय के जिस भी हिस्से का प्रदर्शन खराब होगा, उसको उसी के आधार पर बोर्ड परीक्षाओं से पहले तैयार किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि यदि कहीं शिक्षकों की कमी के कारण प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है, तो इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। यदि छात्र वर्तनी, फॉर्मूला और न्यूमेरिकल्स की गलती कर रहे होंगे, तो उन्हें इसकी अलग से प्रैक्टिस कराई जाएगी, जिससे छात्र के प्रदर्शन को फाइनल परीक्षाओं में सुधारा जा सके। मालूम हो कि इस साल बोर्ड परीक्षाओं से पहले निदेशालय ने जनवरी में 33 फीसदी से कम अंक लाने वाले 200 विद्यार्थियों के 9 विषयों का भी विश्लेषण किया था।
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