मास्टर प्लान 2041 : दिल्ली में है नदी, जलाशय और हरियाली ...फिर भी प्रदूषण
- डीडीए की योजना के अनुसार हरित व नीली संपदा को सहेजकर जीती जाएगी प्रदूषण के खिलाफ जंग
- विकास प्राधिकरण ने इसके लिए खाका तैयार कर लिया है और मसौदा सुझाव के लिए जनता के बीच है
विस्तार
सात जैव विविधता पार्क, 300 वर्ग किलोमीटर से अधिक हरित क्षेत्र, 7,784 हेक्टेयर में फैला रिज इलाका, 1,658 हेक्टेयर को समेटे हुए 26 आरक्षित वन, 1,090 हेक्टेयर में फैले 40 अवर्गीकृत वन, 18,000 से ज्यादा पार्क और करीब 900 जलाशय, दिल्ली में हरित व नीली संपदा अकूत है। इसके बाद भी यहां की हवा व पानी खराब है।
साल भर सांसों पर संकट बना रहता है जबकि यमुना समेत ज्यादातर जल स्रोत काले पड़े हैं। मास्टर प्लान-2041 के ड्राफ्ट में डीडीए ने डीडीए ने इसका खाका तो तैयार किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण के लिहाज से बेहद नाजुक दौर में डीडीए को संजीदगी से काम करना होगा। अमर उजाला संवाददाता किशन कुमार की दिल्ली की नब्ज टटोलती रिपोर्ट....
यमुना का आंचल गंदा करते हैं 24 नाले
- यमुना का कुल लंबाई 22 किलोमीटर, जो नदी की कुल लंबाई का दो फीसदी से भी कम।
- फिर भी, दिल्ली में ही 70 फीसदी प्रदूषित होती यमुना।
- नदी में ताजे पानी का नहीं है प्रवाह।
- 24 प्रमुख नाले गंदगी के जिम्मेदार, बिना साफ पानी नदी में मिलता।
सांसों के संकट के लिए भूगौलकि स्थिति के साथ अन्य कारक हैं शामिल
- धूल के महीन कणों का वायु प्रदूषण में अहम रोल।
- 40 फीसदी धूल के महीन कणों से प्रदूषित होती हवा।
- पीएम 2.5 का स्तर 26 से 36 फीसदी तक।
- वाहनों से निकलने वाला धुआं निभाता 20 फीसदी की भूमिका निभाता।
- इसके अलावा घरों से होने वाला प्रदूषण, ठोस कचरा जलाकर निकलने वाला धुआं व जेनरेटर से सांसों पर आता संकट।
ध्वनि प्रदूषण में भी पीछे नहीं हैं दिल्ली
प्रदूषण के विभिन्न वर्गों में शामिल ध्वनि प्रदूषण भी किसी भी शहर की शांति को भंग करने के लिए अहम भूमिका निभाता है। यहां जहां जितना ज्यादा होगा वहां उतना ही लोगों को मानसिक तनाव के साथ-साथ अन्य परेशानियों को सामना करना होता है। दिल्ली में लगातार बढ़ता गाड़ियों का शोर, औद्योगिक व निर्माण गतिविधियों समेत अन्य चीजों ध्वनि प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। यही वजह है कि वर्ष 2107 के वर्ल्ड वाइड इंडेक्स में दिल्ली दुनिया का सबसे ध्वनि प्रदूषित शहर है।
आंकड़ो में दिल्ली
- वर्ष 2001 में दिल्ली में 150 वर्ग किलोमीटर था हरित क्षेत्र, 2017 में दोगुने इजाफे के साथ हुआ 300 वर्ग किलोमीटर।
- यमुना नदी के बड़े हिस्से के साथ जलाशय और छोटे तालाब भी मौजूद।
- चार हजार से अधिक नाले, जिनमें 200 नालों की निकासी नजफगढ़, ट्रांस यमुना और बारापुला से।
- पिछले 10 सालों में दिल्ली की जल स्रोत के तौर पर नीली संपदा हुई कम। भूजल दोहन व यमुना प्रदूषण बड़ी अहम वजह।
विशेषज्ञों ने कहा...
दिल्ली में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिए हमें पुराने वाहन मालिकों को इंसेंटिव देकर वाहनों को मॉर्डन करना होगा। प्रदूषण जांच की व्यवस्था भी पुरानी हो चुकी है। इसके लिए नई व्यवस्था अपनाने की जरूरत है, जिससे वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को सही जांचा जा सके। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में हमें इलेक्ट्रिक बसों की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। साथ ही यात्रियों के लिए यह व्यवस्ता सुगम व आरामदायक भी होनी चाहिए। तभी लोग निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करेंगे। प्रदूषण के लिए ओद्योगिक इकाइयां भी भागीदारी निभा रही हैं। दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में ऐसी कई औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं जो कोयले का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए जरूरी है कि उन औद्योगिक इकाइयों को गैस चलित तकनीक में परिवर्तित कर दिया जाए। हालांकि, कई औद्योगिक इकाइयों को गैस में परिवर्तित कर दिया गया है।
-डॉ. सुमित शर्मा, निदेशक, पृथ्वी विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, टेरी
प्रदूषण को कम करने के लिए हमें प्रदूषण के कारकों को सही आकलन भी करना होगा। वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को बॉयोलॉजिकल फिल्टर से भी कम किया जा सकता है। इसके लिए हमें जैव विविधता पार्कों की संख्या को बढ़ाना होगा। अभी सात जैव विविधता पार्क हैं, लेकिन पर्यावरण के लिए इन्हें बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। यमुना के प्रदूषण को रोकने के लिए निर्मित वेटलैंड व्यवस्था की जरूरत है। इसके लिए कालिंदी में एक वेटलैंड पर काम भी चल रहा है। क्योंकि, इस तकनीक से हम खराब पानी को प्राकृतिक रूप से शोधित कर सकते हैं। इसके लिए हमें गंदे नालों व अन्य गंदे पाने के स्त्रोंतो को जोड़ने की आवश्यकता होगी। इसके बाद जल प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।
-डॉ. फैयाज खुदसर, प्रमुख वैज्ञानिक, जैव विविधता पार्क
दिल्ली में जल दोहन को रोकने के लिए बोतल बंद पानी की यूनिटों को बंद करने की जरूरत है। क्योंकि, यह दिल्ली के अनधिकृत कॉलोनियों में छोटी-छोटी यूनिटें लगाकर भूजल को सोख रहे हैं। इसके बाद उस पानी को साफ पानी बता महंगे दामों में बेच देते हैं। इससे प्राकृति का ही नुकसान हो रहा है। इस पानी का टीडीएस स्तर भी कम होता है जबकि सामान्य तौर पर इसका स्तर 500 टीडीएस तक होता है। यदि किसी शहर के पास जलाशय मौजूद हो तो हवा के आदान-प्रदान से भी प्रदूषण पर प्रभाव पड़ता है, लेकिन दिल्ली पूरी तरह से लैंडलॉक्ड शहर है। दूसरा, यहां पड़ोसी राज्यों में होने वाली गतिविधियों का भी सीधा असर यहां देखने को मिलता है। यदि हमें दिल्ली को प्रदूषण मुक्त करना हो तो इसके लिए पड़ोसी राज्यों से भी बात कर इस समस्या का समाधान करना होगा।
-भुवन भास्कर, पर्यावरणविद
मास्टर प्लान में प्रदूषण से निपटने के लिए किए गए प्रावधान
- भौगोलिक दृष्टि से दिल्ली को देखते हुए इसके पड़ोसी राज्यों से सामांजस्य बिठा बात कर प्रदूषण को कम करना। प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन का समाधान करने के लिए सहयोगात्मक कार्यों को शुरू किया जाएगा।
- जल प्रदूषण को कम करने के लिए संबंधित राज्यों सरकारों के साथ यमुना नदी में पर्याप्त पर्यावरणीय प्रवाह को को बनाए रखने के लिए सुनिश्चित किया जाएगा।
- संबंधित राज्य सरकारों को बायोमास जलाने, प्रदूषणकारी उद्योगों, वाहनों के उत्सर्जन, ईट भट्टे, कोयला आधारित बिजली संयंत्र आदि जैसे प्रदूषण के प्रमुख स्त्रोतों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(सीपीसीबी) के मानकों का पालन कराया जाएगा।
- प्रदूषणकारी उद्योगों को दिल्ली के अंदर चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संबंधित एजेंसियों की ओर से एक संयुक्त कार्य योजना विकसित की जाएगी जो मौजूद प्रदूषणकारी उद्योगों को स्थानांतरित करेगी। इनके स्थान पर गैर-प्रदूषणकारी गतिविधियां, सेवा उद्योग व सेवा निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाएगा।
- वाहनों के प्रदूषण को कम करने कि लि कार्यस्थलों और घरों के पास ही परिवहन नेटवर्क को करीब लाकर औसत यात्रा को कम करने के साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलेपमेंट(टीओडी) को अपनाया जाएगा।
- पैदल चलने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी जोर रहेगा वहीं, साइकिल ट्रैक आदि के सरंचना में सुधार व निर्माण कर यात्रा संसाधनों को बढ़ाया जाएगा।
- प्राकृतिक ग्रीन व ब्लू संपदा का संरक्षण व सुधार पर भी जोर रहेगा। इसके तहत नदी, नाले और जलाशयों को अधिसूचित कर लिया गया है। इनके संरक्षण के लिए एक क्षेत्र भी प्रदान किया जाएगा और यहां सीमित विकास की ही अनुमति होगी।
- प्रकृति के साथ लोगों का भी जुड़ाव किया जाएगा। इसके तहत विशिष्ट क्षेत्रों और मार्गों को इंटरेक्टिव जोन के रूप में चिन्हित किया जाएगा। यहां व्यायाम, योग, प्रकृति कक्षाएं, पिकनिक जैव विविधता पर्यटन आदि की सुविधाएं मिल सकेंगी।
- यमुना और उसेक बाढ़े के मैदानों के कायाकल्प के लिए भी विशेष पहल की जाएगी। इसके तहत नदी की किनारे 300 मीटर चौड़ा हरित बफर बनाया जाएगा। पेड़ लगाने के साथ-साथ जंगली घास व वनस्पति भी लगाए जाएंगे। साथ ही यमुना किनारे एक ऐसा पथ तैयार किया जाएगा जहां लोग आसानी से साइकिल चला सकेंगे।
- पेड़ों की रक्षा के लिए एक विशेष वृक्ष निर्देशिका तैयार की जाएगी। इसमें उच्च कार्बन भंडारण व विरासत वृक्ष आदि को चिन्हित किया जाएगा।
लोगों ने कहा...
दिल्ली में प्रदूषण के लिए लोगों की गतिविधियां भी जिम्मेदार हैं। लोग खुले में कचरा जला देते हैं। इससे काफी मात्रा में प्रदूषण फैल जाता है जबकि इस पर जुर्माना भी है। सरकार को ऐसे इलाकों की पहचान करनी चाहिए जहां अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं। रिहयाशी इलाकों को छोड़कर औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियां अधिक देखने को मिलती हैं।
-निखिल
यह स्पष्ट है कि घरों से भी प्रदूषण फैलता है। चाहे इसमें किचन का प्रदूषण हो या अन्य प्रदूषण। कई लोग अपने घरों का कचरा खुले में ही बाहर फेंक देते हैं या नाली या बड़े नालों में डाल जिम्मदेरी पूरी कर लेते हैं। इसके लिए कड़े नियम होने चाहिए। बड़े नालों को फेंसिंग कर बंद कर देना चाहिए, जिससे इस तरह की गतिविधियां न हो। साथ ही निगरानी समितियों को समय-समय पर कॉलोनियों का निरीक्षण कर दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना भी करना चाहिए।
-नेहा, गृहिणी
दिल्ली की औद्योगिक इकाइयों की वजह से भी सांसों पर संकट आता है। कई ऐसे औद्योगिक संयंत्र हैं जहां प्रदूषण मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कई बार निगरानी समितियां मौके पर पहुंचती हैं तो लेकिन सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी हो जाती है। पूर्व में कई ऐसी औद्योगिक इकाइयों को गैस चलित में तब्दील किया गया जो प्रदूषण फैला रही थी। प्रदूषण के स्तर को देखते हुए इसकी अभी भी जरूरत है। सरकार जितना जल्दी इसे कर देगी उतना ही लोगों के लिए बेहतर है।
-मुशर्रफ फहीम
यमुना के प्रदूषण के लिए मास्टर प्लान में बेहतर उपाय बताए गए हैं। यदि सरकार ईमानदारी से उपायों को धरातल पर उतारे तो हम यमुना को प्रदूषण मुक्त कर सकते हैं। क्योंकि, दिल्ली में पहले ही पानी की कमी है। पीने के पानी का बड़ा हिस्सा यमुना के पानी से पूरा किया जाता है। इसके गंदे होने से भी लोगों के लिए पीने के पानी का संकट का खड़ा हो जाता है। हालांकि, यमुना के प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्लीवासियों को भी अपने स्तर पर जागरूक होना होगा।
-मिस्बाह उर रहमान