दिल्ली: सिसोदिया ने रिजल्ट तैयार करने को लेकर शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल को भेजे सुझाव, दिया यह फॉर्मूला
सिसोदिया का कहना है कि बीता साल बच्चों व अभिभावकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। बच्चों को पढ़ने और सीखने के उचित और समान अवसर नहीं मिल सके। ऐसे में यदि अगर प्रस्तावित नई मूल्यांकन प्रक्रिया की वजह से बच्चों का रिजल्ट ज्यादा बेहतर होता है तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बारहवीं कक्षा का रिजल्ट तैयार करने का एक फॉर्मूला केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भेजा है। सिसोदिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक बार फिर सुझाव दिया है कि बारहवीं के बच्चों के आंकलन में उनके द्वारा पूर्व में दी गई परीक्षाओं के अंकों को आधार बनाया जा सकता है। इसके लिए दसवीं बोर्ड परीक्षा के 20 अंक की वेटेज, ग्यारवीं की वार्षिक परीक्षा के 20 अंक की वेटेज व बारहवीं के प्री बोर्ड परीक्षा को 30 अंक की वेटेज दी जा सकती है। इस तरह से थ्यौरी के लिए इस आधार पर 70 अंकों से मूल्यांकन हो और 30 फीसदी प्रैक्टिकल के अंकों को शामिल किया जा सकता है।
मनीष सिसोदिया ने मई के अंत में भेजे गए पत्र में भी कहा था कि बच्चों का आंकलन उनकी पूर्व परीक्षाओं के आधार पर बनाया जा सकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि यह अच्छी बात है कि अब सीबीएसई बारहवीं के रिजल्ट के लिए इसी प्रकार के मानदंडों पर विचार कर रहा है। उप-मुख्यमंत्री ने दिल्ली के विभिन्न शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के साथ इस संदर्भ में चर्चा की। जिसके आधार पर सुझाव तैयार कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भेजे गए हैं। सिसोदिया ने पत्र में कहा है कि रिजल्ट तैयार करने के लिए जो भी पद्धति अपनाई जाए वह बच्चों के हित में होनी चाहिए।
सिसोदिया का कहना है कि बीता साल बच्चों व अभिभावकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। बच्चों को पढ़ने और सीखने के उचित और समान अवसर नहीं मिल सके। ऐसे में यदि अगर प्रस्तावित नई मूल्यांकन प्रक्रिया की वजह से बच्चों का रिजल्ट ज्यादा बेहतर होता है तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही मूल्यांकन में अलग-अलग स्त्रोतों और परीक्षाओं को आधार बनाकर रिजल्ट तैयार करेंगे तो सभी बच्चों के साथ न्याय हो पायेगा।
उनका कहना है कि 10वीं की परीक्षा का जो वेटेज 20 अंको का दिया जाये, वह उस विषय के आधार पर होना चाहिए जिसमें बच्चे ने सर्वाधिक अंक हासिल किए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि 10वीं के विषय 12वीं के विषयों से अलग होते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि 12वीं परीक्षा का रिजल्ट उस आधार पर निकालना जिसके बारे में बच्चों को सत्र के शुरुआत में कोई जानकारी नहीं थी, यह एक आदर्श तरीका नहीं है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में अन्य कोई विकल्प नहीं था। पर अगले वर्ष के लिए अभी से तैयारी की जा सकती है। हमें अब 12वीं में आने वाले बच्चों को अगले एक महीने में बताना चाहिए की उनकी परीक्षा इस साल किस प्रकार होगी।
मॉडरेशन को लेकर भी दिया सुझाव
सिसोदिया ने सीबीएसई की ओर से किए जाने वाले मॉडरेशन को लेकर भी सुझाव दिया है। उनका सुझाव है कि सीबीएसई ने मॉडरेशन के संदर्भ में 10वीं की मार्किंग-स्कीम के लिए जो योजना निर्धारित की है, उसके अनुसार स्कूल के पिछले 3 वर्ष के रिजल्ट के आधार पर मॉडरेशन का रेफरेंस प्वाइंट तय किया जाएगा और उसमें +2/-2 अंको के मॉडरेशन की अनुमति होगी। ऐसे में बारहवीं के रिजल्ट के लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि इसमें मॉडरेशन की रेंज +5/-5 कर दी जाए।
नए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का रेफरेंस ईयर नजदीक स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से लिया जाए
दिल्ली में कुछ नए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस शुरु हुए हैं। इन स्कूलों के बच्चे पहली बार बारहवीं की परीक्षा देने वाले थे। इन स्कूलों का पुराना कोई रेफरेंस नहीं है। ऐसे में सिसोदिया का सुझाव है कि ऐसे स्कूलों का रेफरेंस ईयर उनके सबसे नजदीक स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से ही लिया जाये।