Delhi: गृह मंत्री अमित शाह के घर के बाहर प्रदर्शन, कुकी समुदाय की महिलाओं ने की ये मांग
दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर मणिपुर कुकी समुदाय के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके बाद शाह के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है।
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मणिपुर हिंसा के दौरान कुकी समुदाय से शाह ने की थी मुलाकात
दिल्ली में मणिपुर में कुकी आदिवासी समाज की महिलाएं एकजुट हुई हैं। यहां वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मणिपुर दौरे के दौरान अमित शाह ने राहत शिविरों का दौरा किया था और यहां के लोगों से मुलाकात भी की थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए सरकार की पहल को लोगों का मजबूत समर्थन मिल रहा है। शाह राज्य के अपने दौरे के तीसरे दिन हिंसा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने पहुंचे थे। उन्होंने जहां कांगपोकपी में कुकी राहत शिविर का दौरा कर पीड़ितों की बातें सुनीं थीं। वहीं इंफाल में एक राहत शिविर में मैतेई शरणार्थियों की पीड़ा भी सुनाई थी।
विस्थापित लोगों के लिए बनाई गई समिति
मिजोरम सरकार ने हिंसा प्रभावित मणिपुर से आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) के मुद्दों से निपटने के लिए गृह मंत्री लालचमलियाना के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति बनाई है। गृह विभाग के अनुसार, पिछले महीने की शुरुआत में पड़ोसी राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर के कुल 9,501 आईडीपी ने मिजोरम के विभिन्न हिस्सों में शरण ली है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री जोरमथांगा के निर्देश पर यह समिति रविवार को बनाई गई।
मणिपुर की स्थिति को लेकर मंगलवार दोपहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। वहीं, कांग्रेस नेता ने बताया कि मणिपुर के बिगड़ते हालात को काबू लाने के लिए उन्होंने मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। नेता ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के एक सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच आयोग के गठन सहित 12 मांगें रखी हैं।
ऐसे भड़की थी मणिपुर में हिंसा
हिंसा पहली बार तब भड़की जब तीन मई को राज्य के पहाड़ी जिलों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में आदिवासी एकजुटता मार्च का आयोजन किया गया। हिंसा से पहले कुकी समुदाय के ग्रामीणों को आरक्षित वन भूमि से बेदखल करने को लेकर तनाव पैदा हो गया था।