फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   malkaganj sabji mandi accident local said there is no money to get repairs done compulsion to live in a broken house

सब्जी मंडी हादसा: स्थानीय बोले- मरम्मत करवाने का पैसा है नहीं, टूटे-फूटे मकान में रहना बनी मजबूरी

Tue, 14 Sep 2021 01:34 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 14 Sep 2021 01:34 AM IST
सार

अमर उजाला से बातचीत में पड़ोस में रहने वाले विजय सिंह ने बताया कि वह पिछले 50 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। यहां अधिकतर मकान 50 से 60 साल पुराने हैं। कुछ मकानों को फिर से बनाया गया, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अधिकतर लोग अपने घरों को पुर्ननिर्माण नहीं करा सके।

विज्ञापन
malkaganj sabji mandi accident local said there is no money to get repairs done compulsion to live in a broken house
स्थानीय लोग - फोटो : amar ujala

विस्तार

हादसे के तुरंत बाद इमारत के आसपास लोगों का तांता लग गया चीख पुकार के बीच मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास किया। कुछ ही देर में अग्मिशमन विभाग के जवान और पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। सबसे पहले बैरिकेंडिग लगाकर घटना स्थल के आसपास के पूरे क्षेत्र को सील कर दिया। इमारत की ओर जाने वाले रास्तों को भी आम लोगों के लिए बंद किया गया। इमारत से सटी हुई दुकानों को बंद कराया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन राहत और बचाव कार्य शुरू किया। कुछ देर बाद एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई।

विज्ञापन


बैरिकेंडिंग के बाहर की तरफ स्थानीय लोग खड़े रहे और बचाव कार्य को देखते रहे। तारों और यही चर्चा चल रही थी कि इमारत में कितने लोग थे और बाहर जो दोनों बच्चे खड़े थे। उनका क्या हुआ। कई लोग फोन पर बातचीत भी कर रहे थे और अपने परिजनों को घटना की जानकारी दे रहे थे। आसपास मौजूद रहने वाले लोगों का कहना है कि वह इस मंजर को कभी नहीं भूल पाएंगे। 
विज्ञापन


अमर उजाला से बातचीत में पड़ोस में रहने वाले विजय सिंह ने बताया कि वह पिछले 50 साल से इस इलाके में रह रहे हैं। यहां अधिकतर मकान 50 से 60 साल पुराने हैं। कुछ मकानों को फिर से बनाया गया, लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अधिकतर लोग अपने घरों को पुर्ननिर्माण नहीं करा सके। अब इस घटना के बाद उन्हें भी डर लग रहा है कि कहीं उनका घर भी कहीं ऐसे हादसे का शिकार न हो जाए। आर्थिक स्थिति ठीक न होने से जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सुनील जैन( 45) ने बताया कि कुछ दिन से इस इमारत में काम चल रहा था। बड़ी ड्रिल मशीन चलाई जा रही थी। कुछ लोगों ने कहा भी कि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है, लेकिन निर्माण करा रहे व्यक्ति ने इस बात पर गौर नहीं किया। लगता है कि ड्रिल चलाने से बुनियाद कमजोर हुई थी। इससे ही यह इमारत गिरी है। 


उन्होंने कहा कि इस इलाके में अधिकतर घरों की हालत काफी जर्जर है। इसके बावजूद भी लोग उनके पर दूसरी या तीसरी मंजिल का भी निर्माण करा लेते हैं। जो काफी खतरनाक है। सुखदेव राज ( 70) ने बताया कि एक जमाने में इस रोड में ट्राम चलती थी। तब यहां का माहौल अलग था। बाद में पुरा इलाका बाजार के रूप में तबदील हो गया। यहां कई घर तो आजादी से पहले के भी बने गुए हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed