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नहाय खाय के साथ शुरू हुआ सूर्य उपासना का महापर्व
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नई दिल्ली। सूर्य उपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय खाय के साथ शुरू हो गया। खर दिवसीय पूूजा के पहले दिन व्रतियों ने शुद्ध जल (गंगाजल) से स्नान कर व्रत धारण किया। परंपरा के अनुसार पूरी शुद्धता के साथ कद्दू, चावल, चने की दाल ग्रहण कर पूजा शुरू की गई। बृहस्पतिवार को व्रती सूर्य अस्त होने के साथ खरना पूजा करेंगे।
चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से छठ व्रत प्रारंभ हुआ। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बनाया गया। इसके पश्चात छठव्रतियों ने स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत शुरू किया। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। इसे प्रसाद स्वरूप अन्य लोगों में भी वितरित किया। छठ पूजा के दूसरे दिन पंचमी तिथि को खरना किया जाएगा। खरना के रूप में कार्तिक शुक्ल पंचमी को मनाया जाएगा। पंचमी को दिनभर खरना का व्रत रखने वाले व्रती शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल प्रसाद से पूजा करेंगे। इसके बाद उसी प्रसाद को अन्य लोगों में वितरित कर प्रसाद रूप में ग्रहण कर निर्जला उपवास रखेंगे और षष्ठी के दिन अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। सप्तमी तिथि भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत को समाप्त करेंगे।
पंडित कौशल किशोर व पंडित राधेश पांडेय ने बताया कि छठ महापर्व को पूरे नियम के साथ किया जाता है। मुख्य प्रसाद के रूप में ठेकुआ जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, बनाया जाता है। छठ पूजा का आयोजन मुख्य रूप से बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जहां भी रहते हैं, पूरे धार्मिक नियमों से देश के कोने-कोने में सूर्य उपासना करते हैं। मान्यता के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया भाई-बहन हैं। छठ व्रत नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। भक्ति-भाव से किए गए इस व्रत द्वारा नि:संतान को संतान सुख प्राप्त होता है।
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चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से छठ व्रत प्रारंभ हुआ। सबसे पहले घर की सफाई कर उसे पवित्र बनाया गया। इसके पश्चात छठव्रतियों ने स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत शुरू किया। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। इसे प्रसाद स्वरूप अन्य लोगों में भी वितरित किया। छठ पूजा के दूसरे दिन पंचमी तिथि को खरना किया जाएगा। खरना के रूप में कार्तिक शुक्ल पंचमी को मनाया जाएगा। पंचमी को दिनभर खरना का व्रत रखने वाले व्रती शाम के समय गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल प्रसाद से पूजा करेंगे। इसके बाद उसी प्रसाद को अन्य लोगों में वितरित कर प्रसाद रूप में ग्रहण कर निर्जला उपवास रखेंगे और षष्ठी के दिन अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। सप्तमी तिथि भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत को समाप्त करेंगे।
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पंडित कौशल किशोर व पंडित राधेश पांडेय ने बताया कि छठ महापर्व को पूरे नियम के साथ किया जाता है। मुख्य प्रसाद के रूप में ठेकुआ जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं, बनाया जाता है। छठ पूजा का आयोजन मुख्य रूप से बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जहां भी रहते हैं, पूरे धार्मिक नियमों से देश के कोने-कोने में सूर्य उपासना करते हैं। मान्यता के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया भाई-बहन हैं। छठ व्रत नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। भक्ति-भाव से किए गए इस व्रत द्वारा नि:संतान को संतान सुख प्राप्त होता है।
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