{"_id":"6091a6a88ebc3ec36a604554","slug":"label-were-being-ffixed-on-cheap-antibiotic-injections-ashram-news-noi5803247149","type":"story","status":"publish","title_hn":"50 रुपये के इंजेक्शन पर लगा रहे थे रेमडेसिविर का लेबल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
50 रुपये के इंजेक्शन पर लगा रहे थे रेमडेसिविर का लेबल
विज्ञापन
नई दिल्ली। कोरोना की दवाओं के नाम पर ठगी का सिलसिला लगातार जारी है। नंद नगरी थाना पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो महज 50 रुपये के मोनोसेफ एंटीबायोटिक इंजेक्शन पर रेमडेसिविर का लेबल लगाकर उसकी कालाबाजारी कर रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में दो आरोपियों को दबोचा है। इनकी पहचान मीत नगर निवासी अमित और अशोक नगर निवासी धनेश कुमार उर्फ पप्पू के रूप में हुई है।
पुलिस ने इनसे दो नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन व कुछ लेबल बरामद किए हैं। दोनों धोखाधड़ी करने के अलावा मरीजों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे थे। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस के मुताबिक नंद नगरी निवासी एक युवक ने थाने में शिकायत देकर कुछ लोगों के नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने की सूचना दी थी। युवक ने पुलिस के साथ आरोपियों की फोटो भी शेयर की थी। सूचना के बाद फौरन एक टीम का गठन किया गया। इसके बाद फोटो से एक आरोपी की पहचान अमित के रूप में हुई। अमित पहले जीटीबी अस्पताल में नौकरी करता था।
विज्ञापन
जानकारी जुटाने के बाद सिपाही नितिन को नकली ग्राहक बनाकर अमित के पास भेजा गया। सिपाही ने यूपी में भर्ती मरीज की बात कर अमित से रेमडेसिविर की मांग की। आरोपी ने इलाज का पर्चा मांगा। इसके बाद बातचीत हो गई। एक इंजेक्शन 5500 रुपये में तय हुआ। नकली ग्राहक के कहने पर आरोपी इंजेक्शन ले आया। आरोपी को मौके से दबोच लिया गया।
इंजेक्शन की जांच करने पर उस पर नकली रेमडेसिविर का लेबल लगा मिला। अमित से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दूसरे साथी धनेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों इस गोरखधंधे को कर रहे थे।
विज्ञापन
पुलिस ने इनसे दो नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन व कुछ लेबल बरामद किए हैं। दोनों धोखाधड़ी करने के अलावा मरीजों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे थे। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
विज्ञापन
पुलिस के मुताबिक नंद नगरी निवासी एक युवक ने थाने में शिकायत देकर कुछ लोगों के नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने की सूचना दी थी। युवक ने पुलिस के साथ आरोपियों की फोटो भी शेयर की थी। सूचना के बाद फौरन एक टीम का गठन किया गया। इसके बाद फोटो से एक आरोपी की पहचान अमित के रूप में हुई। अमित पहले जीटीबी अस्पताल में नौकरी करता था।
विज्ञापन
जानकारी जुटाने के बाद सिपाही नितिन को नकली ग्राहक बनाकर अमित के पास भेजा गया। सिपाही ने यूपी में भर्ती मरीज की बात कर अमित से रेमडेसिविर की मांग की। आरोपी ने इलाज का पर्चा मांगा। इसके बाद बातचीत हो गई। एक इंजेक्शन 5500 रुपये में तय हुआ। नकली ग्राहक के कहने पर आरोपी इंजेक्शन ले आया। आरोपी को मौके से दबोच लिया गया।
इंजेक्शन की जांच करने पर उस पर नकली रेमडेसिविर का लेबल लगा मिला। अमित से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दूसरे साथी धनेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों इस गोरखधंधे को कर रहे थे।