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दिल्ली: तीन हफ्ते बाद दोबारा तिहाड़ जेल पहुंची नताशा, पिता के निधन के बाद मिली थी अंतरिम जमानत

Mon, 31 May 2021 06:50 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 31 May 2021 06:50 PM IST
सार

रविवार को समय पूरा होने पर वह वापस तिहाड़ जेल पहुंची। जेल जाने से पहले की उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 

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JNU Student Natasha narwal returned Tihar jail again after three weeks delhi high court granted Bail
फाइल फोटो - फोटो : ANI

विस्तार

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट और पिंजरा तोड़ गैंग की कार्यकर्ता नताशा नरवाल फिर से तिहाड़ जेल पहुंच गई हैं। नताशा के पिता का निधन होने पर उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय ने तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी। 
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रविवार को समय पूरा होने पर वह वापस तिहाड़ जेल पहुंची। जेल जाने से पहले की उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 

आपको बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिंजरा तोड़ गैंग की कार्यकर्ता नताशा नरवाल को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत 10 मई को दी थी। उनके पिता का 9 मई को कोरोना से निधन हो गया था। पिता महावीर नरवाल के अंतिम संस्कार के लिए अदालत ने नताशा को अंतरिम जमानत दी थी। वह पिछले साल मई से तिहाड़ जेल में बंद है। 
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अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 के कारण नरवाल के पिता का निधन हो गया था और उनके अंतिम संस्कार के लिए अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह की जमानत प्रदान की थी। 
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जेल के अधिकारियों के अनुसार, नताशा रविवार को जेल में वापस लौटीं। फिलहाल उन्हें 14 दिन तक आइसोलेट किया जाएगा। उनकी सेहत की निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि बाद में नरवाल को अन्य कैदियों के साथ रखा जाएगा।
 

गौरतलब है कि पिंजरा तोड़ अभियान की कार्यकर्ता नताशा नरवाल को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े मामले में पिछले साल मई में गिरफ्तार किया गया था। नताशा नरवाल पर दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने नताशा पर UAPA के तहत मामला दर्ज किया था। उन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 

बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में सीएए समर्थकों व विरोधियों के बीच टकराव होने के बाद 24 फरवरी 2020 को हिंसा भड़क गई थी। इसके बाद हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे जबकि 200 से ज्यादा जख्मी हुए थे। पिंजरा तोड़ समूह 2015 में बनाया गया था और इसका मुख्य उद्देश्य छात्रावास तथा पीजी में छात्राओं पर लगने वाली पाबंदी का विरोध व उन्हें कम करवाना था।
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