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जेएनयू ने माना दिव्यांगों को नहीं मिल रहा पांच प्रतिशत आरक्षण

Wed, 14 Oct 2020 12:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2020 12:24 AM IST
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jnu concedes divyang students are not getting five per cent reservation
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने मंगलवार को हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि दिव्यांगों को पाठ्यक्रमों में सीट आवंटन की मौजूदा प्रक्रिया में अनिवार्य पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। पीठ ने मामले की सुनवाई 6 नवंबर के लिए तय की है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष जेएनयू के वकील ने स्वीकार किया कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिव्यांगों की कुल संख्या पांच प्रतिशत नहीं है जबकि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम के तहत यह प्रावधान है। पीठ ने कहा कि जेएनयू प्रवेश में पांच प्रतिशत आरक्षण के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाया। आरक्षण संस्थान के स्तर पर दिया जाता है न कि पाठ्यक्रमवार।
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पीठ ने जेएनयू से पूछा कि क्या आपने प्रशासनिक स्तर पर आवंटन किया, जिसकी वजह से प्रवेश में पांच प्रतिशत आरक्षण के लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सका? अगर आपको इस कानून के पीछे के उद्देश्य का अहसास नहीं है तो हमें समस्या है। आप सीटों के आवंटन में ऐसे काटछांट नहीं दिखा सकते जिससे आप दिव्यांगों को केवल चार या साढे़ चार प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य हासिल कर सकें। यह आरक्षण पांच प्रतिशत या इससे अधिक होना चाहिए। अंतत: सभी सीटों को भरने के बाद आपको यह देखना होगा कि दिव्यांगों को पांच प्रतिशत आरक्षण हर हाल में मिले।
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जेएनयू की ओर से अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने कहा कि मामले को कार्यकारी परिषद के समक्ष रखा जाएगा, ताकि वह सीट आवंटन की बेहतर प्रक्रिया बनाए जिससे पांच प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने याचिका को निस्तारित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह मुद्दा भविष्य में विचार के लिए छोड़ दिया जाए।

हालांकि पीठ ने इससे इनकार करते हुए कहा कि अदालत निश्चित खाका जानना चाहती है कि कैसे आप प्रवेश में निर्धारित आरक्षण सुनिश्चित करेंगे और सीट आवंटन केवल कागज पर नहीं होगा। इस मुद्दे पर जावेद आबिदी फांउडेशन की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि जेएनयू ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 में दिव्यांगों को पांच प्रतिशत से कम सीटों पर प्रवेश दिया है।
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