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Delhi News: एशियन यूथ गेम्स के लिए भारतीय कुराश टीम का चयन, बहरीन में दिखाएंगे दम
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- ग्रेटर नोएडा के मलकपुर स्टेडियम में हुए ट्रायल, चार खिलाड़ियों ने पाया भारतीय टीम में स्थान
फोटो--
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। एशियाई यूथ गेम्स-2025 में शामिल होने के लिए बुधवार को ट्रायल के माध्यम से भारतीय कुराश (जैकेट कुश्ती) टीम का गठन किया गया। ट्रायल में पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के चार खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। चयनित खिलाड़ी बहरीन में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आएंगे। प्रतियोगिता में एशिया के कई देशों के खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
बहरीन में 17 से 30 अक्तूबर तक बालक व बालिका वर्ग में एशियाई यूथ गेम्स-2025 का आयोजन होगा। इसमें शामिल होने के लिए बुधवार को ग्रेनो के सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में भारतीय कुराश एसोसिएशन की ओर से ट्रायल का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत राज्यों से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। एसोसिएशन के महासचिव विक्रांत कुमार ने बताया कि बालक वर्ग में 65 किग्रा भार वर्ग में पंजाब के वैभव ओहरी, 83 किग्रा भार वर्ग में हरियाणा के अरविंद का चयन भारतीय टीम के लिए हुआ है। वहीं, बालिका वर्ग में 52 किग्रा भार वर्ग में दिल्ली की कनिष्का, 70 किग्रा भार वर्ग में खुशी ने शानदार प्रदर्शन किया। चारों खिलाड़ी अक्टूबर में बहरीन में होने वाली एशियन यूथ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। ट्रायल का शुभारंभ अंतर राष्ट्रीय कुराश एसोसिएशन के तकनीकी निदेशक रवि कपूर व प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली ने किया। एसोसिएशन के तकनीकी निदेशक सोमबीर सिंह, प्रशिक्षण निदेशक राजेश कुमार, शक्ति सिंह, राकेश कुमार, सतपाल गुलिया, सुरजीत वालिया, किरन, रजनी, मंजू, अक्षत, इंदू शर्मा, नताशा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
उज्बेकिस्तान की प्राचीन पारंपरिक जैकेट कुश्ती है कुराश
महासचिव ने बताया कि कुराश उज्बेकिस्तान की प्राचीन पारंपरिक जैकेट कुश्ती है। इसमें पहलवान एक-दूसरे को जमीन पर पटकने का प्रयास करते हैं। जिसमें किसी भी दर्दनाक या समर्पण तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता। यह एक स्टैंडिंग गेम है जहां खिलाड़ी एक-दूसरे को पकड़ने के लिए अपनी जैकेट का इस्तेमाल करते हैं और लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी को पीठ के बल गिराकर जीत हासिल करना होता है। उन्होंने बताया कि भारत में इस खेल की शुरूआत वर्ष 2000 में हुई थी। वर्ष 2015 में गौतमबुद्ध नगर राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी कर चुका है। वर्ष 2018 में भारतीय टीम ने पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था। इसमें दिल्ली की पिंकी बलारा ने 62 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक और कर्नाटक की माला प्रभा ने भी 62 किग्रा भार में कांस्य पदक हासिल किया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। एशियाई यूथ गेम्स-2025 में शामिल होने के लिए बुधवार को ट्रायल के माध्यम से भारतीय कुराश (जैकेट कुश्ती) टीम का गठन किया गया। ट्रायल में पंजाब, हरियाणा व दिल्ली के चार खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। चयनित खिलाड़ी बहरीन में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए नजर आएंगे। प्रतियोगिता में एशिया के कई देशों के खिलाड़ी भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
बहरीन में 17 से 30 अक्तूबर तक बालक व बालिका वर्ग में एशियाई यूथ गेम्स-2025 का आयोजन होगा। इसमें शामिल होने के लिए बुधवार को ग्रेनो के सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में भारतीय कुराश एसोसिएशन की ओर से ट्रायल का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत राज्यों से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। एसोसिएशन के महासचिव विक्रांत कुमार ने बताया कि बालक वर्ग में 65 किग्रा भार वर्ग में पंजाब के वैभव ओहरी, 83 किग्रा भार वर्ग में हरियाणा के अरविंद का चयन भारतीय टीम के लिए हुआ है। वहीं, बालिका वर्ग में 52 किग्रा भार वर्ग में दिल्ली की कनिष्का, 70 किग्रा भार वर्ग में खुशी ने शानदार प्रदर्शन किया। चारों खिलाड़ी अक्टूबर में बहरीन में होने वाली एशियन यूथ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। ट्रायल का शुभारंभ अंतर राष्ट्रीय कुराश एसोसिएशन के तकनीकी निदेशक रवि कपूर व प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी डॉ. परवेज अली ने किया। एसोसिएशन के तकनीकी निदेशक सोमबीर सिंह, प्रशिक्षण निदेशक राजेश कुमार, शक्ति सिंह, राकेश कुमार, सतपाल गुलिया, सुरजीत वालिया, किरन, रजनी, मंजू, अक्षत, इंदू शर्मा, नताशा ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
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उज्बेकिस्तान की प्राचीन पारंपरिक जैकेट कुश्ती है कुराश
महासचिव ने बताया कि कुराश उज्बेकिस्तान की प्राचीन पारंपरिक जैकेट कुश्ती है। इसमें पहलवान एक-दूसरे को जमीन पर पटकने का प्रयास करते हैं। जिसमें किसी भी दर्दनाक या समर्पण तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता। यह एक स्टैंडिंग गेम है जहां खिलाड़ी एक-दूसरे को पकड़ने के लिए अपनी जैकेट का इस्तेमाल करते हैं और लक्ष्य प्रतिद्वंद्वी को पीठ के बल गिराकर जीत हासिल करना होता है। उन्होंने बताया कि भारत में इस खेल की शुरूआत वर्ष 2000 में हुई थी। वर्ष 2015 में गौतमबुद्ध नगर राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता की मेजबानी कर चुका है। वर्ष 2018 में भारतीय टीम ने पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था। इसमें दिल्ली की पिंकी बलारा ने 62 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक और कर्नाटक की माला प्रभा ने भी 62 किग्रा भार में कांस्य पदक हासिल किया था।
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