जूता फेंकने वाले भार्गव के ठिकानों पर पड़े थे आयकर के छापे, करोड़ों की संपत्ति का चला था पता
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कानपुर के सिविल लाइंस स्थित भार्गव हॉस्पिटल के मालिक का बेटा और डॉक्टर शक्ति भार्गव खुद को फेसबुक पर व्हिसलब्लोअर बताता है। कुछ दिन पहले ही उसने लाल इमली फैक्ट्री में 14 कर्मचारियों की मौत का जिक्र करते हुए सरकार की आलोचना की थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसके के खिलाफ आयकर विभाग आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति मामले में जांच कर रहा है। पिछले साल दिसंबर में तीन दिन तक उसके ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चला था। इसमें 11.50 करोड़ में तीन बंगले खरीदने की बात सामने आई थी। ये बंगले उसने पत्नी, बच्चे व रिश्तेदार के नाम पर खरीदे थे। छापेमारी में 28 लाख नकद और 50 लाख के आभूषण भी मिले थे। वह इससे जुड़ी रकम का स्रोत नहीं बता पाए थे। वहीं, भार्गव के खिलाफ रिश्तेदारों ने प्रताड़ना का मामला भी दर्ज करा रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे जांच के आदेश
भार्गव के घर छापेमारी से पहले सीबीआई ने ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीआईसीएल) के सीएमडी सहित कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज किया था। इसके बाद उनके निवास पर छापेमारी की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने भार्गव द्वारा सरकार के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए सीबीआई को उसके खिलाफ जांच के आदेश दिए थे।
भार्गव के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल
भार्गव का नाम बीआईसी के बंगलों की खरीद-फरोख्त और आयकर छापे के दौरान सामने आया था। आयकर विभाग को छापेमारी के दौरान उनके यहां से 1.44 लाख रुपये की पुरानी करेंसी मिली थी। मामले में आयकर विभाग की तरफ से भार्गव की मां डॉ. दया भार्गव के खिलाफ कोतवाली थाने में 5ए/7 रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जूता कांड के बाद अधिकारियों ने जब मामले की फाइल पलटी तो पता चला कि 31 मार्च को पुलिस भार्गव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
फ्लैट नंबर-801 में रहता है शक्ति
भार्गव पार्वती बांगला रोड स्थित शिव रतन अपार्टमेंट के आठवीं मंजिल में स्थित प्लैट नंबर-801 में पत्नी शिखा भार्गव के साथ रहता है। उनको एक संतान है, जो बाहर पढ़ता है। दया भार्गव सिविल लाइंस स्थित भार्गव हॉस्पिटल से सटे मकान में दूसरे बेटे संजीव व उसके परिवार के साथ रहती हैं। उनके पति वेद प्रकाश भार्गव का निधन हो चुका है।
अस्पताल के हिसाब में हेरफेर के मास्टर माइंड थे भार्गव
कानपुर के सिविल लाइंस स्थित भार्गव हॉस्पिटल में चार माह पहले करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। मरीजों से इलाज के नाम लाखों रुपये वसूले जाते थे, लेकिन हिसाब-किताब में मामूली रकम दिखाई जाती थी। कच्चे बिलों पर हुए सैकड़ों बड़े भुगतानों में भार्गव का ही नाम सामने आया था। यह हॉस्पिटल सिविल लाइंस निवासी डॉक्टर बंधु शक्ति भार्गव और संजीव भार्गव का है। दोनों भाई मिलकर भार्गव समूह के अस्पतालों का संचालन करते हैं। इनका सालाना कारोबार 50 से 60 करोड़ रुपये का है। हिसाब-किताब छिपाने के लिए दस्तावेजों का रखरखाव नहीं किया जाता था।
प्रॉपर्टी में निवेश का हिसाब नहीं दे पाए
भार्गव ने स्काई लाइन निर्माण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में करीब आठ करोड़ रुपये का निवेश किया था। वह आयकर विभाग को आज तक यह नहीं बता पाए कि इस रकम का स्रोत क्या है। इतनी रकम किस तरह से जुटाई है। स्काई लाइन निर्माण प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में शहर के बिल्डर अनूप अग्रवाल की भी भागीदारी है। इस वजह से अफसरों ने अनूप अग्रवाल के प्रतिष्ठानों पर भी जांच की थी।