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पहल: अब व्हील चेयर सड़कों पर मोटर साइकिल की तरह भरेगी फर्राटा, देश का पहला स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन तैयार
Tue, 24 Aug 2021 12:05 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Aug 2021 12:05 AM IST
सार
आईआईटी मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग व टीटीके सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलेपमेंट की प्रो. सुजाता श्रीनिवासन और नियोमोशन स्टार्टअप के सहयोग से इस नियोबोल्ट नामक इस पहले स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन को तैयार किया गया है।
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स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने देश का पहला स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन तैयार किया है। नियोबोल्ट नामक व्हीलचेयर प्रतिघंटा 25 किलोमीटर की रफ्तार से चल सकता है। जबकि एकबार चार्ज करने के बाद 25 किलोमीटर तक चलेगा।
देखने में व्हील चेयर पर सड़क पर आते ही मोटसाइकिल की तरह बन जाता है। इसका उपयोग समतल सड़कों के अलावा उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी किया जा सकता है। इसमें लिथियम-आयन बैटरी का प्रयोग किया गया है।
आईआईटी मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग व टीटीके सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलेपमेंट की प्रो. सुजाता श्रीनिवासन और नियोमोशन स्टार्टअप के सहयोग से इस नियोबोल्ट नामक इस पहले स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन को तैयार किया गया है।
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टीम ने बताया कि दिव्यांगजनों की सुविधाओं व दिक्कतों का ध्यान में रखते हुए इसे डिजाइन किया है। इसे डिजाइन करने के दौरान शोधकर्ता टीम ने लोकोमोटर से पीड़ित लोगों व कार्यरत संगठनों व अस्पतालों के विशेषज्ञों की भी सहायता ली थी। उनके अनुभवों को ध्यान में रखे हुए प्रोडेक्ट में बदलाव व डिजाइन में सुधार भी किया गया है।
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देखने में व्हील चेयर पर सड़क पर आते ही मोटसाइकिल की तरह बन जाता है। इसका उपयोग समतल सड़कों के अलावा उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी किया जा सकता है। इसमें लिथियम-आयन बैटरी का प्रयोग किया गया है।
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आईआईटी मद्रास के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग व टीटीके सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलेपमेंट की प्रो. सुजाता श्रीनिवासन और नियोमोशन स्टार्टअप के सहयोग से इस नियोबोल्ट नामक इस पहले स्वदेशी मोटर चालित व्हीलचेयर वाहन को तैयार किया गया है।
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टीम ने बताया कि दिव्यांगजनों की सुविधाओं व दिक्कतों का ध्यान में रखते हुए इसे डिजाइन किया है। इसे डिजाइन करने के दौरान शोधकर्ता टीम ने लोकोमोटर से पीड़ित लोगों व कार्यरत संगठनों व अस्पतालों के विशेषज्ञों की भी सहायता ली थी। उनके अनुभवों को ध्यान में रखे हुए प्रोडेक्ट में बदलाव व डिजाइन में सुधार भी किया गया है।
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घर से बाहर सड़क पर आम लोगों की तर्ज पर आजादी देना मकसद
प्रो. सुजाता ने बताया कि अक्सर हम दिव्यांगजनों को व्हीलचेयर पर देखते हैं। लेकिन उनका जीवन सिमटकर रह जाता है। उन्हें घर की चारदिवारी से बाहर सड़कों पर आम लोगों की तर्ज पर आजादी देना मकसद था। इसी सोच केसाथ नियोबोल्ट को डिजाइन किया गया । यह घर के अंदर व्हीलेचयर तो बाहर मोटर साइकिल बन जाता है। इसे विशेष लोगों को चलाना बेहद आसान है। इसमें झटके आदि से बचने के लिए सस्पेंशन भी लगा हुआ है।
अन्य प्रोडेक्ट से ऐसे हैं अलग
नीयोमेशन के सीईओ स्वास्तिक सौरव दास के मुताबिक, मार्केट में नीयोप्लाई व्यक्तिगत व्हीलचेयर 39900 रुपये की है। जबकि नीयोबोल्ट मोटरराइज्ड ऐड -ऑन 55 हजार रुपये में मिल रहा है। हम ग्राहकों को आसान किश्तों का विकल्प भी दे रहे हैं। जबकि महज एक हजार रुपये देकर ऑडर बुक किया जा सकता है। दास ने बताया कि भारत में सालाना तीन लाख व्हीलचेयर की बिक्री होती है। इसमें से ढाई लाख विदेशों से मंगवायी जाती हैं। हालांकि यह विशेष लोगों को सड़कों पर आम लोगों की तरह चलने की आजादी नहीं दे पाती है।
अन्य प्रोडेक्ट से ऐसे हैं अलग
नीयोमेशन के सीईओ स्वास्तिक सौरव दास के मुताबिक, मार्केट में नीयोप्लाई व्यक्तिगत व्हीलचेयर 39900 रुपये की है। जबकि नीयोबोल्ट मोटरराइज्ड ऐड -ऑन 55 हजार रुपये में मिल रहा है। हम ग्राहकों को आसान किश्तों का विकल्प भी दे रहे हैं। जबकि महज एक हजार रुपये देकर ऑडर बुक किया जा सकता है। दास ने बताया कि भारत में सालाना तीन लाख व्हीलचेयर की बिक्री होती है। इसमें से ढाई लाख विदेशों से मंगवायी जाती हैं। हालांकि यह विशेष लोगों को सड़कों पर आम लोगों की तरह चलने की आजादी नहीं दे पाती है।